जम्मू, विवेक सिंह: जम्मू में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर घुसपैठरोधी तंत्र निरंतर मजबूत होता देख पाकिस्तानी सेना और उसकी खुफिया एजेंसी आइएसआइ ने अपनी सारी ताकत सीमा के नीचे से सुरंग खोदकर घुसपैठ करवाने पर केंद्रित कर दी है। पिछले आठ वर्षों में जम्मू संभाग में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सुरंग खोदकर घुसपैठ करवाने की नौ साजिशें हो चुकी हैं।

कठुआ जिले के हीरानगर सेक्टर के बोबिया इलाके के पार जिस जगह से 150 मीटर सुरंग की खोदाई शुरू हुई है वह क्षेत्र पाकिस्तानी रेंजर्स की चक्क समां पोस्ट के बिल्कुल पास है। ऐसे में रेंजर्स की सहायता के बिना इस सुरंग की खोदाई करना संभव ही नहीं है। जमीन के नीचे इंजीनिर्यंरग तकनीक का इस्तेमाल कर इतनी लंबी सुरंग बनाने में कई दिन का समय लगा होगा। जम्मू संभाग में सुरंग खोदकर घुसपैठ करवाने की तीन साजिशें तो अगस्त 2020 के बाद हुई हैं। जमीन के ऊपर से घुसपैठ कराने में नाकाम रहने वाला पाकिस्तान सुरंग को आतंकी धकेलने का आसान विकल्प मानता है, इसलिए वह साजिशें नाकाम होने के बाद भी कोशिश जारी रख रहा है। पाकिस्तान की ओर से सुरंग खोदने की साजिशों से निपटने के लिए सीमा सुरक्षा बल ने भी चौकसी को बढ़ाया दिया है।

सीमा पर आधुनिक उपकरणों से चौकसी : जम्मू संभाग में 192 किमी लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर नए एचडी कैमरे लगाए गए हैं, इनसे सीमा के एक किमी आगे तक दिन-रात गतिविधियों को कैद किया जा रहा है। इस समय जारी विंटर मैनेजमेंट रणनीति के तहत सुरक्षा को और पुख्ता किया गया है। सीमा पर तारबंदी, हीट सेंसर, आधुनिक उपकरण भी पाकिस्तान की हताशा का कारण है। इनसे बचने के लिए ही सुरंगें खोदने की साजिशें जारी हैं।

घुसपैठ पर अंकुश लगने से पाकिस्तान हताश: डीआइजी - सुरंग का निरीक्षण करने वाले सीमा सुरक्षा बल के डीआइजी (जी ब्रांच) एसपीएस संधु का कहना है कि घुसपैठ पर अंकुश लगने से पाकिस्तान हताश है। सीमा पर ऐसे प्रबंध हैं कि घुसपैठिये तारबंदी के पास नहीं पहुंच सकते हैं। यह उच्चतम सर्तकता के स्तर का ही नतीजा है कि छह महीनों में सीमा पर पाकिस्तान की तीन सुरंगों को खोज निकाला गया है। उनका कहना है कि पाकिस्तान की ओर पूरी मदद के बिना सीमा पर इस तरह की सुरंगें खोदना संभव नहीं है।

जीपीआर तकनीक से जमीन के अंदर की हलचल भी पता चलेगी: पाकिस्तान की सुरंगें खोदने की साजिशें भी आने वाले समय में नाकाम की जाएंगी। सीमा सुरक्षा बल की पूरी कोशिश है कि जल्द से जल्द उसे ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार (जीपीआर) तकनीक मिल जाए। इससे जमीन के अंदर की हलचल को भी पता लगाया जा सकेगा। फिलहाल, शक पड़ने पर जेसीबी, ट्रैक्टर की सहायता से सीमा पर खुदाई कर सुनिश्चित किया जा रहा है कि जमीन के अंदर सुरंग तो नहीं है।

सरहद पर अब तक मिली सुरंगें : 

  • 13 जनवरी 2021 : कठुआ के हीरानगर के बोबिया में
  • 22 नवंबर 2020 : सांबा के रेगाल में
  • 29 अगस्त 2020 : सांबा के बैनग्लाड
  • 30 सितंबर 2017 : जम्मू के आरएसपुरा सेक्टर के अरनिया
  • 14 फरवरी 2017 : सांबा के रामगढ़ छन्नी फतवाल
  • 3 मार्च 2016 : जम्मू के आरएसपुरा
  • 4 मई 2014 : सांबा सेक्टर के चलयाड़ी
  • 23 अगस्त 2014 : अखनूर सेक्टर में चकला
  • 28 जुलाई 2012 : सांबा के चचवाल 

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