'हमारी विदेश नीति सही, किसी के सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं', उमर अब्दुल्ला का बड़ा बयान
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत की विदेश नीति की सराहना की, ब्रिक्स घोषणापत्र में पहलगाम हमले की निंदा को बड़ी कूटनीतिक जीत बताया।
-1789491672575_m.webp)
पाकिस्तान के कई सहयोगी देशों की मौजूदगी में पहलगाम हमले की निंदा भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत।
HighLights
उमर अब्दुल्ला ने भारत की विदेश नीति की जमकर सराहना की
ब्रिक्स घोषणापत्र में पहलगाम हमले की निंदा को बताया बड़ी जीत
यूसीसी बिल को संसद में लाने की वकालत, राज्यों से नहीं
राज्य ब्यूरो, जम्मू। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार की विदेश नीति की जमकर सराहना की। उमर ने मंगलवार को कहा कि ब्रिक्स सम्मेलन में पाकिस्तान के कई सहयोगी देशों की मौजूदगी के बावजूद घोषणापत्र में पहलगाम आतंकी हमले की निंदा किया जाना भारत की एक बड़ी कूटनीतिक जीत है।
उन्होंने कहा कि हमारी विदेश नीति सही है और इसके लिए हमें किसी दूसरे से प्रमाणपत्र लेने की जरूरत नहीं है। श्रीनगर में शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में पत्रकारों से बातचीत में ब्रिक्स नई दिल्ली घोषणापत्र में पाकिस्तान का नाम सीधे तौर पर नहीं लेने के सवाल पर उमर ने कहा कि यह भारत सरकार और विशेष रूप से विदेश मंत्रालय का विषय है कि वही इस पर बात करें।
अलबत्ता, ब्रिक्स नई दिल्ली घोषणा-पत्र में पहलगाम आतंकी का नाम लिया जाना भारत की विदेश नीति की बड़ी सफलता है। उन्होंने कहा कि भारत को अपनी विदेश नीति को लेकर दूसरे देशों की प्रशंसा या आलोचना को जरूरत से ज्यादा महत्व नहीं देना चाहिए।
देश को अपनी नीति और राष्ट्रीय हितों पर ध्यान केंद्रित रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि यही हमारी विदेश नीति की सफलता है। वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) की स्थिति में सुधार और चीनी सैनिकों की तैनाती में कमी की खबरों पर उमर ने इसे एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम बताया। उन्होंने उम्मीद जताई कि समय के साथ एलओसी पर भी स्थिति में सुधार होगा।
वहीं, प्रस्तावित यूसीसी बिल को उमर ने अलग-अलग राज्यों के जरिए लागू किए जाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस संबंध में विधेयक को संसद में लाया जाना चाहिए, ताकि स्पष्ट हो सके कि सरकार के पास इसे पारित कराने के लिए पर्याप्त संख्या है या नहीं।
ऐसे मामलों में कानून बनाने का अधिकार संसद का है और राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों का फैसला अलग-अलग राज्यों के स्तर पर नहीं किया जाना चाहिए। उमर ने कहा कि एनडीए के सभी सहयोगी इस प्रस्ताव के समर्थन में नहीं हैं।
