जम्मू, जागरण संवाददता : ऐतिहासिक मुबारक मंडी के एक हिस्से को हेरिटेज होटल में बदलने की कवायद शुरू होते ही इसके विरोध में राजनीतिक और सामाजिक संगठन एकजुट होने लगे हैं। प्रदेश सरकार ने डिजाइन डेवलपमेंट-फाइनेंस-बिल्ड-मेंटेन एंड ऑपरेट के आधार पर पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप यानी पीपीपी मॉडल के तहत ऐतिहासिक मुबारक मंडी कांप्लेक्स के एक हिस्से को हेरिटेज होटल में बदलने की दिशा में प्रयास शुरू किए हैं। इसके अलावा कुछ अन्य इमारतों, जिन्हें जम्मू और कश्मीर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड द्वारा प्रदान की गई धनराशि का उपयोग कर संरक्षित किया जा रहा है। इसे अत्याधुनिक संग्रहालय में परिवर्तित कर दिया जाएगा।

हेरिटेज होटल में बदलने के लिए सरकार ने जनाना महल नामक विरासत परिसर के पूर्वी भाग को चिह्नित किया है, जो आवासीय महलों की पहचान है, जिसमें दीवारों पर बनी कलाकृतियां, शीशे से हुआ काम, सजावटी छत असाधारण और अद्वितीय वास्तुकला का नमूना है। जनाना महल परिसर में छह इमारतें हैं। रानी बंद्राली महल, राजा अमर सिंह की रानियों का महल, रानी गुलेरी महल, रानी चाढ़की महल, राजा राम सिंह रानियों का महल और नवा महल।

पिछले 15 वर्षों से भी ज्यादा समय से मुबारक मंडी के जीर्णोद्धार का कार्य लगा हुआ है, लेकिन अभी तक इन महलों के जीर्णोद्धार की ओर से कोई ध्यान नहीं दिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इसे पीपीपी मॉडल पर दिया जाता है तो इसका जीर्णोद्धार कार्य भी जल्दी होगा और महलों के सरंक्षण के साथ-साथ हेरिटेज होटल भी बन जाएगा। इससे यहां आने वाले खास तरह के पर्यटकों की आवाजाही बढ़ेगी। इससे क्षेत्र का महत्व भी बढ़ेगा और दुनिया भर को डोगरा विरासत को जानने का मौका भी मिल सकेगा।

कांग्रेस-पीडीपी कार्यकाल में शुरू हुई थी प्रक्रिया : मुबारक मंडी को हेरिटेज होटल में बदलने की कवायद पीडीपी कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में तत्कालीन पर्यटन मंत्री कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रिग्जिन जोरा ने विधान सभा में इसे हेरिटेज होटल बनाने का प्रस्ताव रखा था, जिसका विपक्षी दलों और भारतीय जनता पार्टी ने विरोध किया था। बाद में मुबारक मंडी परिसर के एक हिस्से को हेरिटेज होटल में बदलने का फैसला मुबारक मंडी जम्मू हेरिटेज सोसायटी के शासी निकाय ने कई साल पहले लिया था, लेकिन उसके बाद कोई कदम नहीं उठाया गया। हाल के दिनों में वर्तमान सरकार ने इस पहलू पर विस्तृत चर्चा की और सोसायटी को इस दिशा में एक अभ्यास शुरू करने की अनुमति दी गई। माना जा रहा है कि हेरिटेज होटल बनने से जो राजस्व जुटाया जाएगा उसे आगे भी संरक्षण कार्य पर खर्च किया जाता रहेगा।

अब आजाद भी कर रहे विरोध : कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने भी ऐतिहासिक मुबारक मंडी के एक हिस्से को हेरिटेज होटल में बदलने की कवायद का विरोध किया है। उनका कहना है कि इससे विरासत को नुकसान पहुंचेगा। जिस तरह के पर्यटन की जरूरत है, उस पर भी कई तरह की पाबंधियां लग सकती हैं। पैसे की कोई कमी नहीं है। फिर पीपीपी मॉडल पर विरासत को होटल बनाने का क्या मतलब है। जल्द पूरी मुबारक मंडी का संरक्षण किया जाना चाहिए।

बुखारी ने कहा- विरासत के साथ मजाक नहीं : जम्मू-कश्मीर अपनी पार्टी के अध्यक्ष अल्ताफ बुखारी ने कहा कि ऐतिहासिक मुबारक मंडी का जल्द जीर्णोद्धार होना चाहिए। इसे हेरिटेज होटल बनाने का उनकी विरोध करती है। जम्मू के हित में यही है कि तरीके से विरासत का संरक्षण हो और अच्छा संग्रहालय बने ताकि अधिक से अधिक पर्यटक डोगरा विरासत से जुड़ सकें। इसे देख सकें।

रद हुए प्लान लाने का क्या औचित्य, नए मास्टर प्लान पर अमल हो : पूर्व मंत्री गुलचैन सिंह चाढ़क ने कहा कि जो प्रस्ताव रद हो चुके हैं। उन पर बात करना या उनकी आड़ में कोई निर्णय लेना गलत है। नया मास्टर प्लान बनवाने पर लाखों रुपए खर्च किए गए हैं। उसमें तो होटल का कोई प्रस्ताव नहीं हैं। हां, कैफटेरिया और रेस्तरां की बात है, लेकिन वह भी स्थाई नहीं हैं। विरासत के साथ खिलवाड़ का डोगरा सदर सभा विरोध करता है।

संरक्षित स्मारकों से छेड़-छाड़ नहीं : ऐतिहासिक मुबारक मंडी संरक्षित स्मारक है। किसी भी संरक्षित विरासत के साथ खिलवाड़ नहीं की जा सकती। जिन क्षेत्रों में भी हेरिटेज होटल बने हैं। वहां संरक्षित स्मारक घोषित नहीं हैं। प्राइवेट संपत्ति को ही होटल में परिवर्तित करना संभव है। ऐसे हालात में मुबारक मंडी को हेरिटेज होटल नहीं बनाया जा सकता।

जम्मू बेस्ट असेंंबली मूवमेंट कर रही विरोध : जम्मू वेस्ट असेंबली मूवमेंट के अध्यक्ष सुनील डिम्पल का कहना है कि मुबारक मंडी डोगरा शौर्य की प्रतीक है। इसे होटल में बदलने का जोरशोर से विरोध होता रहेगा। विरासत के साथ मनमर्जी नहीं करने दी जाएगी। जब तक लोकतांत्रिक प्रक्रिया शुरू नहीं हो जाती इस तरह के फैसले होते रहेंगे। हम बचपन से मुबारक मंडी के जीर्णोद्धार और संरक्षण के सपने देखते आए हैं और अब इसे होटल बनाने का फैसला कैसे बर्दाशत किया जा सकता है।