जम्मू, राज्य ब्यूरो : कश्मीर पर कब्जा करने की पाकिस्तान की साजिश को नाकाम बनाते हुए बारामूला में शहादत देने वाले सैनिकों व क्षेत्र के निवासियों को बुधवार 75वें इन्फैंटरी दिवस पर बारामूला के सिख वार मेमोरियल में श्रद्धांजलि दी गई।

सेना ने इस मौके पर 1 सिख रेजीमेंट के वीरों के साथ कश्मीर के रक्षक ब्रिगेडियर राजेन्द्र सिंह के साथ क्षेत्र के निवासी मकबूल शेरवानी असाधारण बहादुरी को भी याद किया। देश से जम्मू कश्मीर के विलय के बाद सेना ने 27 अक्टूबर 1947 को कश्मीर में पहला कदम रख कर पाकिस्तानी सेना की शह पर आगे बढ़े रह कबायलियों को रोक दिया था। ग्यारह नवंबर तक सेना ने उड़ी से कबायलियों व पाकिस्तानी सैनिकों को खदेड़ दिया था। इस दौरान सेना की 1 सिख रेजीमेंट ने कई वीरों ने शहादत भी पाई।

उड़ी में दुश्मन से लोहा लेने वाले महाराजा की फौज के चीफ आफ स्टाफ ब्रिगेडियर राजेन्द्र सिंह की शहादत के बाद सेना ने बारामूला में दुश्मन को रोक लिया।

हमले का रोकते हुए कमान अधिकारी समेत 7 सैनिक शहीद हुए। सेना की एक सिख को असाधारण वीरता के लिए इसके वीरों को 1 परमवीर चक्र व 4 महावीर चक्रों से सम्मानित किया गयाकिया गया था। सेना के इन बहादुरों को हर इन्फैंटरी दिवस पर याद कर उनके पदचिन्हों पर चलने की प्रेरणा ली जाती है।

एक सिख रेजीमेंट की बहाुदरी के कारण सेना को मिले कुछ दिनों में बारामूला के शाल्टैंग इलाके में कबायलियों को उनके अंजाम तक पहुंचाने की तैयारी कर ली थी। ऐसे में सात नवंबर को सेना की 1 सिख्, 1 कुमाउं, व 7 कैवेलरी के जवानों ने 20 मिनट चली भीषण मुठभेड़ में दुश्मन को तबाह कर दिया। बारामूला व शाल्टैंग के बीच सेना ने 634 दुश्मनों को मार गिराया गया। भारतीय सेना ने बारामूला से 9 नवंबर व उड़ी से 11 नवंबर 1947 तक दुश्मन का नामो निशान मिटा दिया था। 

Edited By: Rahul Sharma