जम्मू (आरएसपुरा), दलजीत सिंह। जम्मू से करीब 35 किलोमीटर दूर उपजिला आरएसपुरा पर्यटन की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे आरएसपुरा में लहलहाते खेत, विदेशों से आने वाले प्रवासी पक्षी और भारत-पाकिस्तान विभाजन की दास्तां बयान करती ऑक्ट्राय पोस्ट अपने आप में ही अद्भुत नजारा पेश करती है। भारत-पाक में तनाव बढ़ते ही सुरक्षा कारणों से इस क्षेत्र को पर्यटकों के लिए बंद कर दिया जाता है। फिर भी गंभीर प्रयास हों तो इसे भी अमृतसर के वाघा बार्डर की तर्ज पर विकसित किया जा सकता है जहां रोजाना एक लाख के करीब पर्यटक पहुंचते हैं।

प्रवासी पक्षियों के मन को भाता है घराना वेटलैंड

सर्दी की शुरुआत के साथ ही भारत-पाकिस्तान सीमा पर स्थित घराना वेटलैंड में झुंड के झुंड प्रवासी पक्षियों का जमावड़ा शुरू हो जाता है। कुछ क्षण के लिए वे हवा में उड़ान भरते हैं और फिर वहीं लौट आते हैं। उनकी चहचहाहट से पूरे इलाके का माहौल बदल जाता है। वैसे सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक यह वेटलेंड सही मायनों में करीब 14 वर्ग किमी के क्षेत्र में फैला हुआ है। अतिक्रमण का नतीजा है कि यह अब 4 से 5 वर्ग किमी के बीच ही सिमटकर रह गया है। यहां हर साल लाखों प्रवासी पक्षी पहुंचते हैं जिन्हें देखने के लिए देश-विदेश से पर्यटक आते हैं। इस वेटलैंड को विकसित करने को लेकर सरकारी प्रयास भी जारी है और अब वेटलैंड के आसपास रहने वाले लोगों के पुनर्वास पर भी काम हो रहा है।

भारत-पाक सीमा पर स्थित है ऑक्ट्राय पोस्ट

आरएसपुरा से मात्र दस किलोमीटर की दूरी पर स्थित ऑक्ट्राय पोस्ट भारत-पाक सीमा पर स्थित है। यहां आजादी से पहले बने प्राचीन मंदिर व मजार का जीर्णोद्धार किया गया है। यहां सौ साल पुराना पीपल का पेड़ है जिसका आधा हिस्सा आज भारत व आधा हिस्सा पाकिस्तान में है। ऑक्ट्राय पोस्ट पर पर्यटकों की सुविधा के लिए टूरिस्ट रिसेप्शन सेंटर की स्थापना की गई है। यहां पर्यटकों के बैठने, खाने-पीने व ठहरने की व्यवस्था है। वीआइपी लोगों के लिए फैमिली सुईट भी है। पर्यटन विभाग की ओर से यहां 25 कनाल जमीन पर ढांचागत सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं।

जम्मू को सियालकोट से जोड़ता था आरएसपुरा

आरएसपुरा एक ऐतिहासिक क्षेत्र है जो जम्मू को पाकिस्तान के सियालकोट से जोड़ता था। जम्मू से सीधा सड़क मार्ग आरएसपुरा से होकर सियालकोट पहुंचता था। इसी मार्ग पर जम्मू-सियालकोट ट्रेन भी चलती थी। इसके निशान अभी भी आरएसपुरा में बाकी हैं।

Posted By: Rahul Sharma

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