संवाद सहयोगी, पुंछ: राजौरी-पुंछ जिले की मिलती सीमा पर डेरा की गली क्षेत्र के जंगल में आतंकियों के छिपने के पीछे नई साजिश सामने आ रही है। तकरीबन डेढ़ दशक बाद आतंकियों ने इस इलाके को चुना है। डेरा की गली का जंगल भिंभर गली बालाकोट से शुरू होता है और पीरपंजाल के पहाड़ों के साथ कश्मीर में शोपियां तक फैला है। यह इलाका राजौरी और पुंछ दोनों जिलों से सटा है। सर्दी में बर्फबारी के दौरान इस इलाके में आवाजाही नहीं होती। इसकी आड़ में पाकिस्तान में बैठे आतंकी घुसपैठ को अंजाम देकर राजौरी-पुंछ होते हुए कश्मीर पहुंचने की चाल चल रहे हैं। डेरा की गली के जंगल में गत चार दिन से सुरक्षाबल आतंकियों को तलाश रहे हैं। तीन से चार आतंकियों के इस गुट ने ही 11 अक्टूबर को घात लगाकर हमला किया था, जिसमें सेना के पांच जवान शहीद हो गए थे।

सूत्रों के अनुसार कश्मीर में आतंकी संगठनों की कमर टूटने और कार्रवाई का दबाव बढ़ने से आतंकी राजौरी-पुंछ में घाटी से सटे इलाको को नया ठिकाना बना रहे हैं। ठीक वैसे ही जिस तरह से वर्ष 1990 से 2000 के बीच पीरपंजाल के पहाड़ों में हिलकाका में आतंकियों ने ट्रेनिग कैंप बना रखा था। आतंकी उन्हीं हालात को वह दोबारा लाने की साजिश में हैं क्योंकि कश्मीर में उनकी दाल नहीं गल रही है। इसीलिए वह कश्मीर से लगते जिलों में अपने ठिकाने खोज रहे हैं। हालांकि, आतंकियों ने हिलकाका इलाके की बजाय मुगल रोड पर डेरा की गली के इलाके को ठिकाना बनाया है। आतंकी इसे अपने लिए सुरक्षित पनाहगाह मान रहे हैं क्योंकि इस इलाके में लंबे समय से कोई आतंकी घटना अंजाम नहीं दी गई है। इससे आतंकियों को लगता था कि सुरक्षाबल इस पर ध्यान नहीं देंगे, लेकिन सुरक्षाबलों ने उनके मंसूबों पर पानी फेर दिया। नए ओजीडब्ल्यू समेत पुराने आतंकियों को किया जा रहा सक्रिय

सूत्रों ने बताया कि आतंकी संगठन राजौरी-पुंछ में नए ओवर ग्राउंड वर्कर (ओजीडीब्ल्यू) तैयार कर रहे हैं। इन्हें फिलहाल नियंत्रण रेखा पार से नशे की तस्करी को बढ़ावा देने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके अलावा पाकिस्तान में बैठे आतंकी सरगना राजौरी-पुंछ में गत सदी के दसवें दशक के पुराने आतंकियों को भी सक्रिय कर नए पनाहगाह तलाशने की साजिश में हैं। इसके पीछे मकसद घुसपैठ के बाद आतंकियों को कम समय में कश्मीर तक पहुंचाया जा सके। घने जंगल में लोकेशन बदल रहे आतंकी

डेरा की गली में सुरक्षाबल बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चला रहे हैं। अभियान में ड्रोन, हेलीकाप्टर और पैरा कमांडो भी उतारे गए हैं। इस दौरान कई बार आतंकियों से सामना भी हुआ, लेकिन घने जंगल की आड़ में आतंकी अपनी लोकेशन बदलने में कामयाब रहे।

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