जम्मू, राज्य ब्यूरो। एकीकृत जम्मू-कश्मीर राज्य के पुनर्गठन के बाद से कश्मीर में हालात सामान्य बनाने के लिए पुलिस व प्रशासन लगातार प्रयास कर रहा है। पहले लोगों को भड़काने की आशंका के चलते जहां अलगाववादी नेताओं को हिरासत में लिया गया, वहीं अब पुलिस की हिटलिस्ट में पत्थरबाज और अफवाहें फैलाने वाले हैं। पुलिस हर दिन ऐसे कई पत्थरबाजों और अफवाह फैलाने वालों को उठाकर उन्हें समझाती है और फिर घर वालों के आश्वासन के बाद उन्हें वापस घर भेज देती है।

कश्मीर के आतंकवादग्रस्त क्षेत्रों और जहां पर अधिक पत्थरबाजी होती हैं, वहां के अधिकांश पुलिस स्टेशनों ने ऐसे पत्थरबाजों की सूचियां तैयार की हैं। पुलिस को जब भी उन पर संदेह होता है, उन्हें दिन को उठाकर थाने में बुला लेती है। उन्हें वहीं पर खाना भी दिया जाता है। उन्हें यह समझाया जा रहा है कि वे पत्थरबाजी की घटनाओं में संलिप्त न हों और एक जिम्मेदार नागरिक बन कर सरकार के साथ विकास कायों में शामिल हों। कई बार इन युवाओं के साथ उनके परिजनों को भी नहीं मिलने दिया जाता है। उनके अनुरोध पर ही उन्हें मिलने की अनुमति दी जाती है, लेकिन देर शाम को उन्हें समझाकर घर वापस भेज दिया जाता है।

अफवाह फैलाने वालों पर कड़ी नजर : पुलिस ने कश्मीर में अफवाहें फैलाकर कश्मीर के हालात को खराब कर रहे युवाओं पर भी पैनी नजर रखी हुई है। पिछले कुछ दिनों में ही अफवाहें फैलाने के आरोप में भी कुछ युवाओं को हिरासत में लिया है। कश्मीर पुलिस के डिवीजनल कमिश्नर बसीर खान ने एक दिन पहले ही अफवाहें फैलाने वालों को चेतावनी दी है कि अगर किसी ने भी कश्मीर के माहौल को खराब करने का प्रयास किया तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह स्पष्ट किया था कि उन्हें श्रीनगर और अनंतनाग जिलों से शिकायतें मिली हैं। उन्होंने पहले से ही सभी डिप्टी कमिश्नरों और एसएसपी को निर्देश दिए हैं कि ऐसी तत्वों की पहचान कर कड़ी कार्रवाई की जाए।

श्रीनगर का डाउन टाउन इलाका प्राथमिकता पर: श्रीनगर के डाउन टाउन क्षेत्र में पत्थरबाज सबसे अधिक पुलिस की हिट लिस्ट में हैं। यह क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित रहता है। अब जबसे अनुच्छेद 370 हटा है, तब से पत्थरबाजी में कमी आई है। अब पाकिस्तान भी पत्थरबाजों की आर्थिक मदद नहीं कर पा रहा है। इस कारण अब पत्थरबाजी की घटनाओं में कमी आई है। पुलिस अब अधिक सख्त हो गई है। पुलिस इन युवाओं को मुख्यधारा में लाने के लिए जुटी हुई है। इन युवाओं की काउंसलिंग की जाती है।

Posted By: Rahul Sharma

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