जम्मू, विवेक सिंह। जम्मू कश्मीर में सरकारी फंड के खुले इस्तेमाल से मुख्यमंत्री आवास को ख्वाबगाह बनाने दिन लद गए हैं। केंद्र शासित प्रदेश बनने जा रहे जम्मू कश्मीर में मुख्यमंत्री की शानोशौकत अब बीते जमाने की बात होगी। तंगहाली से जूझ रहे जम्मू कश्मीर में मुख्यमंत्री अपने आवास को सजाने, संवारने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर देते थे। यही नहीं, मंत्रियों की फौज भी सरकारी खर्च को बढ़ाती थी।

मुख्यमंत्री की मर्जी के एपल के उपकरण, अत्याधुनिक होम थियेटर, स्वीमिंग पूल, चुटकियों में बदल दिए जाने वाले महंगे कालीन, फर्नीचर व इलेक्ट्रॉनिक सामान जम्मू कश्मीर की अर्थव्यवस्था पर भारी पड़ते रहे हैं। अब जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री बड़े काफिले के साथ घूमने, सरकारी बंगलों में बेशकीमती साजो सामान नहीं लगा पाएंगे।

केंद्र शासित प्रदेश के मुख्यमंत्री अब न तो करोड़ों रुपये खर्च कर सरकारी आवास सजाने की मनमानी कर पाएंगे और न ही उन्हें वह दर्जा व सुख सुविधाएं मिलेंगी जो करीब सात दशक तक मिलती रही हैं। इसके लिए उन्हें साल का एक फिक्स बजट ही मिलेगा। केंद्रीय मंत्री तो दूर की बात, वह प्रोटोकॉल में सांसद से भी नीचे होंगे। ऐसे में जम्मू कश्मीर राज्य के मुख्यमंत्री रहे चुके नेताओं के लिए केंद्र शासित जम्मू कश्मीर का मुख्यमंत्री बनना उनकी प्राथमिकता नहीं होगा।

बंगले में फर्नीचर आदि के लिए मिलेंगे डेढ़ लाख

केंद्र सरकार के नियमों के आधार पर उन्हें बंगले में फर्नीचर, इलेक्ट्रानिक के लिए डेढ़ लाख का बजट मिलेगा। पहले एक कालीन भी इस बजट से कई गुना महंगी होती थी। अब दो डुपलेक्स सुईट की कोठी के हकदार ही होंगे। अन्य सुख सुविधाएं अपनी मर्जी से नहीं, अपितु सभी केंद्र शासित प्रदेशों के लिए जारी गृह मंत्रालय की अधिसूचना के आधार पर ही मिलेंगी।

प्रोटोकाल का दर्जा गिरकर 15वें पायदान पर पहुंचा

पहले जम्मू कश्मीर का मुख्यमंत्री होना शान की बात था। जम्मू कश्मीर राज्य के मुख्यमंत्री को देश में प्रोटोकाल में 7वां स्थान मिलता था। केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद यह दर्जा खिसककर 15वें पायदान पर पहुंच जाएगा। राज्य में उनसे भेंट करने वाले केंद्रीय मंत्री उन्हें निर्देश भी दें सकेंगे। पहले मुख्यमंत्री का दर्जा केंद्रीय मंत्रियों से ऊपर थे। केंद्र शासित जम्मू कश्मीर का लेफ्टिनेंट गवर्नर पद प्रोटोकाल में अब 11वें पायदान पर होगा। पहले जम्मू कश्मीर का राज्यपाल चौथे पायदान पर थे। वरीयता से में उनसे ऊपर राष्ट्रपति, उप राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री थे।

आजाद ने करोड़ों खर्च कर बनाया सीएम आवास, उमर ने नकारा

पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद ने करोड़ों रुपये खर्च कर वर्ष 2007-08 में श्रीनगर में मुख्यमंत्री का नया आवास बनाया था। श्री बाबा अमरनाथ की भूमि के आंदोलन के कारण कांग्रेस-पीडीपी की सरकार गिर गई। इसके बाद मुख्यमंत्री बने उमर अब्दुल्ला ने इस नए आवास में रहने से इन्कार कर दिया। उन्होंने गुपकार रोड स्थित अपने सरकारी आवास को ही मुख्यमंत्री के आवास के रूप में इस्तेमाल करने का फैसला किया। ऐसे में आजाद द्वारा बनाए गए आवास का इस्तेमाल नहीं हो पाया। बाद में इसे सरकारी गेस्ट हाउस बना दिया गया।

Posted By: Rahul Sharma

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