जम्मू, जागरण संवाददाता। जानीपुर से हाईकोर्ट शिफ्ट करने के प्रस्ताव के विरोध में वकील 26 दिन से हड़ताल पर हैं, लेकिन अगर सरकारी योजना की तरफ जाएं तो आने वाले दिनों में जानीपुर में सिर्फ जिला कोर्ट ही रह जाएंगे। इसमें अधिकांश आपराधिक मामलों की ही सुनवाई होगी।

जम्मू कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद राज्य के कई कानून रद हुए हैं और केंद्रीय कानून लागू हुए हैं। इसके तहत कुछ विभागों से संबंधित केसों की सुनवाई भी अब कोर्ट की बजाय विभागों में ही होगी। इसके लिए विभागों में ही कोर्ट स्थापित होंगे। ये कोर्ट अभी तक जानीपुर जिला कोर्ट परिसर में चल रहे थे, लेकिन भविष्य में ऐसा नहीं होगा। चूंकि इस समय जेएंडके हाईकोर्ट बार एसोसिएशन हाईकोर्ट शिफ्ट करने के विरोध में हड़ताल पर है, इसलिए अन्य कोर्ट शिफ्ट करने के प्रस्ताव पर आधिकारिक स्तर पर कोई बोलने को तैयार नहीं है।

सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट 1986 लागू

जम्मू कश्मीर के दो केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद जम्मू कश्मीर कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट के स्थान पर सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट 1986 लागू किया गया। इसके चलते राज्य सरकार ने 23 व 24 अक्टूबर को एक आदेश जारी कर स्टेट कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रेडरेसल कमीशन (एससीडीआरसी) और डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर फोरम्स (डीसीएफ) को बंद कर दिया। पहले कमीशन व फोरम्स कोर्ट परिसर में चलते थे और डिस्ट्रिक्ट जजों को डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर फोरम के प्रधान पद पर नियुक्त थे। इन जजों ने हाईकोर्ट में रिपोर्ट कर दिया है और जानीपुर में चलने वाला यह कोर्ट बंद हो गया है। कोर्ट का सारा रिकॉर्ड उपभोक्ता मामलों एवं जन-वितरण विभाग को भेज दिया गया है।

जूवेनाइल जस्टिस केयर एंड प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन एक्ट 2015 होगा लागू

इसी तरह जम्मू कश्मीर में अब जूवेनाइल जस्टिस केयर एंड प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन एक्ट 2015 लागू किया जा रहा है। यह कोर्ट भी पहले जानीपुर में चलता था, लेकिन अब बाहु प्लाजा में शिफ्ट कर दिया गया है। विश्वसनीय सूत्रों की माने तो आने वाले दिनों में विभिन्न विभागों से संबंधित विवादों के निपटारों के लिए विभागों में ही कोर्ट स्थापित होंगे। इसके लिए जमीनी स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार नगर निगम से संबंधित मामलों के निपटारों के लिए नगर निगम में ही कोर्ट स्थापित होगा। ऐसे में यह कोर्ट टाउन हॉल स्थित नगर निगम परिसर में शिफ्ट होगा। इसी तरह एक्साइज, वन व ट्रैफिक विभाग के केसों की सुनवाई भी विभागों में स्थापित कोर्ट में ही होगी। सड़क हादसों से जुड़े केसों की सुनवाई के लिए अलग से कोर्ट बनाने का प्रस्ताव है। वहीं, शादियों से जुड़े विवादों के लिए बनतालाब में अलग से कोर्ट स्थापित करने का प्रस्ताव है।

एससीडीआरसी व डीसीएफ में 2500 केस लंबित

जम्मू-कश्मीर सरकार ने 23 व 24 अक्टूबर को आदेश जारी कर एससीडीआरसी व डीसीएफ को बंद कर दिया था। उस समय कमीशन व फोरम्स में 2500 से अधिक केस थे, जिन पर एक महीने से कोई सुनवाई नहीं हो पाई है। आदेश में सभी केसों का रिकॉर्ड उपभोक्ता विभाग के संबंधित असिस्टेंट डायरेक्टरों के पास भेजने का निर्देश दिया गया था।

Posted By: Rahul Sharma

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