श्रीनगर, रजिया नूर। मजबूत इरादे जीवन को दिशा देते हैं। अपंगता इसमें बाधा नहीं बनती। यह कर दिखाया है दक्षिणी कश्मीर के आमिर हुसैन लोन ने। उनके दोनों हाथ नहीं हैं, वह भी कंधे के पास से, लेकिन क्रिकेट खेलते हैं। वह पैरा क्रिकेटर हैं और कोच भी। वह उनके लिए प्रेरणा है जो अक्षमता का श्राप ओढ़कर चुप बैठ जाते हैं। आमिर खुद में जीती जागती मिसाल हैं। तभी तो उनके जीवन पर बालीवुड की फिल्म बन रही है। इसमें उनकी हिम्मत, उनके हौसले, उनकी मेहनत को दर्शाया जाएगा ताकि दुनिया भर के दिव्यांगों को सीख मिले कि रुकना नहीं, आगे बढऩा ही जिंदगी है...।

पैरा क्रिकेटर आमिर लोन अनंतनाग जिले के बिजबिहाड़ा जिले के रहने वाले हैं। वह 24 वर्ष के हैं। आमिर बताते हैं कि आठ वर्ष के थे जब एक हादसे में उन्होंने दोनों बांहों को गंवा दिया। गांव में उनकी आरा मिल थी। एक दिन पिता और भाई को खाना देने गए तो मेरा जैकेट मशीन में उलझ गया। इससे मशीन में जा गिरा। जब होश आया तो अस्पताल में था। दोनों बाहें कंधे के पास से कट चुकी थीं। तीन वर्ष इलाज चला। पढ़ाई भी छूट गई। किसी काम का नहीं रहा। मैं खुद को परिवार के लिए बोझ समझने लगा। निराशा में आत्महत्या करने के भाव आने लगे। पर मेरे घरवालों ने मेरी हिम्मत बढ़ाई।

इसी बीच, मेरे एक दोस्त के भाई ने एक कालेज के प्रोफेसर से मिलवाया। उन्होंने मुझे पैरा क्रिकेट के बारे में बताया। यह वर्ष 2013 की बात है। इसके बाद जम्मू कश्मीर पैरा क्रिकेट टीम का हिस्सा बन गया। यहां कंधे और गर्दन से बल्ला पकडऩा, पैर से गेंद फेंकना और बतख की तरह फुदक कर चलते हुए फील्डिंग करना सीखा। मेरी मेहनत रंग लाई और फिर मुझे जम्मू कश्मीर पैरा क्रिकेट टीम का कप्तान चुन लिया गया। आमिर कप्तान होने के साथ-साथ टीम के कोच भी हैं। बेहतर प्रदर्शन के लिए वह कई बार सम्मानित किए जा चुके हैं।

ऐसे खेलते हैं क्रिकेट

आमिर ने अपने दोनों हाथ खोने के बावजूद जिंदगी की जंग लड़ी और आत्मनिर्भर बने। वह कंधे, गले और छाती के सहारे बैट पकड़ते हैं। वह धुआंधार बल्लेबाजी करते हैं। उनके बल्ले से चौके-छक्के निकलते हैं। उनके शाट पर फील्डर को गेंद पकडऩे के लिए मैदान पर लंबी दौड़ लगानी पड़ती है। वह पैर की अंगुलियों और अंगूठे से गेंद को पकड़कर बेहतरीन गेंदबाजी करते हैं। गेंद उनके इशारों पर नाचती है। उनका एक वीडियो खूब वायरल हो रहा है जिसमें वह पूर्व क्रिकेटर अजय जडेजा के लिए गेंदबाजी कर रहे हैं। आमिर राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी क्रिकेट खेलते हैं। पूर्व क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर उनके आदर्श हैं।

...और उस दिन वह खूब रोये

हादसे से पहले आमिर ने मोहल्ले के बच्चों के साथ खूब क्रिकेट खेला। वह बताते हैं कि हादसे के बाद मैं बहुत समय तक क्रिकेट नहीं खेल सका, लेकिन मुझमें जुनून बरकरार था। कहा-मुझे याद है कि एक दिन वह भारत और आस्ट्रेलिया के बीच क्रिकेट मैच टीवी पर देखने के लिए पड़ोस के घर पर गया था, लेकिन उन्होंने यह कहकर मुझे कमरे से बाहर निकाल दिया कि तुम अब क्रिकेट मत देखा करो। तुम अब जिंदगी में कभी भी क्रिकेट नहीं खेल पाओगे। उस दिन घर आकर बहुत रोया।

यह कंपनी बना रही फिल्म

आमिर लोन के जीवन पर पिकल एंटरटेनमेंट प्रोडक्शंस फिल्म बनाएगी। इस फिल्म का निर्देशन महेश वी भट करेंगे। फिल्म कंपनी के अधिकारियों के अनुसार अभी फिल्म का नाम तय नहीं किया गया है, लेकिन जल्द ही टीम शूटिंग के लिए कश्मीर पहुंचेगी। फिल्म के बारे में आमिर ने बताया कि संबंधित प्रोडक्शन हाउस ने उनसे संपर्क किया है। मैंने उन्हें अनुमति दे दी है और वह बहुत जल्द शूटिंग शुरू करेंगे। आमिर कहते हैं कि अगर मेरी जीवनी से लोगों को कोई सीख मिलती है तो इससे बढ़कर मेरे लिए और क्या खुशी की बात हो सकती है।

खुश हूं कि मैं आत्मनिर्भर हूं

आमिर भले ही दिव्यांगों की श्रेणी में शामिल हो गया है, लेकिन वह किसी पर बोझ नहीं है। वह कहते हैं कि अब आत्मनिर्भर जिंदगी जी रहा हूं। खाना-पीना हो, कपड़े पहनना हो या दाढ़ी बनानी हो...यह सारे काम पैरों से करते हैं। क्रिकेट व कोचिंग से होने वाली कमाई से वह अपने परिवार की सहायता भी करते हैं। आमिर का कहना है कि इंसान के लिए कुछ भी असंभव नहीं है। मेरे मजबूत इरादों ने मुझे उड़ान दी है।

Edited By: Vikas Abrol