दिनेश महाजन, जम्मू

पुरानी बसावट वाले शहर में कई तंग गलिया हैं। कुछ तो इतनी संकरी हैं कि एक बाइक सवार आ जाए तो पैदल चलने वालों को भी रुकना पड़ता है। ऐसी गलियों में आग लगने जैसी अनहोनी हो जाए तो राहत पहुंचाने में खासी परेशानी हो सकती है। इन विपरीत परिस्थितियों के बाद भी तंग गलियों में नियमों को दरकिनार कर धड़ल्ले से बहुमंजिली इमारतों का निर्माण हो रहा है। इनमें फायर फाइ¨टग सिस्टम को दरकिनार किया जा रहा है। नगर निगम भी आंखें मूंदे है। वहीं, फायर एंड इमरजेंसी विभाग की बात करे तो अभी भी पानीवाले दमकल पर निर्भर है। विभाग के पास पर्याप्त उपकरण नहीं हैं।

पुराने शहर की कई तंग गलियां ऐसी हैं, जहां पर घनी आबादी रहती है। शहर के ज्यूल चौक की बात करें तो वहां रहने वाले लोगों ने अपने घरों को होटलों में तबदील कर दिया है। इन तीन से चार मंजिला होटलों में यदि कोई अनहोनी होती है तो सोच कर ही दिल दहल उठता है। इन तंग गलियों में दमकल की गाड़ियां नहीं जा सकती। इसी प्रकार प्रसिद्ध रघुनाथ बाजार की बात करें तो एक तरफ रघुनाथ पुरा मोहल्ला जबकि दूसरी ओर प्रताप गढ़ मोहल्ला पड़ता है। इन मोहल्लों में घनी आबादी है और गलियां संकरी। इसी प्रकार मल्होत्रा मोहल्ला, काली जनी, पटेल बाजार, पक्काडंगा, जुलाका मुहल्ला, मस्त गढ़, जैन बाजर, खिलौने वाली गली समेत कई ऐसे इलाके हैं, जहां पैदल चलना भी आसान नहीं है।

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बंद पड़े हैं हाईड्रेंट

करीब चार दशक पूर्व शहर में होने वाली आग की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए 12 स्थानों में हाईड्रेंट लगाए गए थे। मौजूदा समय में केवल मुबारक मंडी और पक्काडंगा ही ऐसे क्षेत्र बचे हैं, जहां के हाईड्रेंट में पानी सप्लाई सुचारु है। दरअसल हाईड्रेंट लगाने का मुख्य उद्देश्य यह था कि इन पाईप में चौबीस घंटे पानी की आपूर्ति होगी तो किसी स्थान पर आग लगने पर हाईड्रेंट की मदद से काबू पाया जा सकेगा। दमकल विभाग की मानें तो पीएचई विभाग ने इन हाईड्रेंट में पानी आपूर्ति को बंद कर दिया, जिस कारण से समय के साथ इन हाईड्रेंट ने काम करना बंद कर दिया। वहीं, पीएचई विभाग का दावा है कि उन्हें इन हाईड्रेंट पर पानी आपूर्ति करने के लिए वार्षिक किराया नहीं मिलता है।

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तंग गलियों के लिए

मोटरसाइकिल दस्ता

फायर एंड इमरजेंसी विभाग के डिवीजनल फायर ऑफिसर मंजूर हुसैन मलिक कहते हैं, संकरी गलियों में आग पर काबू पाने के लिए विभाग ने विशेष मोटरसाइकिल दस्ते का गठन किया है। इस दस्ते के सदस्य कंधे में पानी की छोटी टंकी, फोम तथा हैंड सेट लेकर आग पर काबू पाने के लिए पहुंचते हैं। इन जवानों को विशेष ट्रे¨नग दी गई है।

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फायर फोर्स एक्ट

राज्य में लागू नहीं

यदि किसी इमारत में आग पर काबू पाने के लिए पर्याप्त उपकरण नहीं लगे हो तो दमकल विभाग उस इमारत को सील तक कर सकती है। देश के कई राज्यों में इस बाबत फायर फोर्स एक्ट लागू है। लेकिन जम्मू कश्मीर राज्य में अभी तक फायर फोर्स एक्ट लागू नहीं हो पाया है। इमारत के निर्माण से पूर्व उसका नक्शा पास करवाना अनिवार्य है। नक्शा पास करवाने के लिए दमकल विभाग से एनओसी लेना अनिवार्य है। कई मामलों में आदेश को भी नजरअंदाज कर दिया जाता है।

Posted By: Jagran