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कौन हैं निखिल सिंह? लद्दाख मैराथन में मारी बाजी, 8 हजार धावकों को पीछे छोड़ 2 घंटे 44 मिनट में पूरी की 42 KM की रेस

Published: Mon, 14 Sep 2026 05:20 AM (IST)

मुंबई के एलीट धावक निखिल सिंह ने चुनौतीपूर्ण लद्दाख मैराथन का 13वां संस्करण 2 घंटे 44 मिनट 40 सेकंड में जीतकर खिताब अपने नाम किया।

लद्दाख मैराथन में मुंबई के निखिल सिंह ने मारी बाजी। फोटो सोशल मीडिया

लद्दाख मैराथन में मुंबई के निखिल सिंह ने मारी बाजी। फोटो सोशल मीडिया


HighLights

  1. मुंबई के निखिल सिंह ने लद्दाख मैराथन का खिताब जीता।

  2. उन्होंने 42 किलोमीटर की दौड़ 2 घंटे 44 मिनट 40 सेकंड में पूरी की।

  3. उपराज्यपाल ने मैराथन को प्रतिष्ठित वैश्विक खेल आयोजन बताया।

राज्य ब्यूरो, जम्मू। लद्दाख की ऊंचाई पर आयोजित चुनौतीपूर्ण लद्दाख मैराथन में मुंबई के एलीट धावक निखिल सिंह ने शानदार प्रदर्शन करते हुए खिताब अपने नाम कर लिया। स्थानीय लंबी दूरी के कई धावकों को पीछे छोड़ते हुए निखिल ने 42 किलोमीटर की रेस 2 घंटे 44 मिनट 40 सेकंड में पूरी की।

रविवार को आयोजित लद्दाख मैराथन के 13वें एडिशन में हिस्सा लेने के लिए पूरे भारत और विदेशों से 8000 से ज़्यादा धावक लेह में इकट्ठा हुए।लद्दाख के उप राज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने 42 किलोमीटर की फुल मैराथन और 21 किलोमीटर की हाफ मैराथन को हरी झंडी दिखाकर शुरू किया।

ग्लोबल स्पोर्ट्स इवेंट के तौर पर स्थापित 

उन्होंने कहा कि पूरे भारत और दुनिया भर से धावकों को लद्दाख में एक साथ आते और सहनशक्ति, दृढ़ संकल्प और रोमांच की भावना को अपनाते हुए देखना प्रेरणादायक है। प्रतिभागियोंए आयोजकों, स्वयंसेवकों और सपोर्ट टीमों को बधाई देते हुए सक्सेना ने कहा कि इस इवेंट की बढ़ती लोकप्रियता ने इसे एक प्रतिष्ठित ग्लोबल स्पोर्ट्स इवेंट के तौर पर स्थापित किया है।

उन्होंने कहा कि यह मैराथन देश और दुनिया भर के लोगों के सामने लद्दाख के अनोखे लैंडस्केपए संस्कृति और गर्मजोशी भरे आतिथ्य को दिखाने का मौका देती है।

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खिताब जीतकर वह बेहद उत्साहित

वहीं मैराथन में भाग लेने वालों में खासा उत्साह था। मैराथन जीतने के बाद निखिल ने अपनी सफलता का श्रेय मानसिक मजबूती, निरंतरता और सही रणनीति को दिया। उन्होंने कहा कि पूरी रेस के दौरान उन्होंने एक बार भी पैदल चलने का सहारा नहीं लिया।

अंतिम चढ़ाई कठिन थी, लेकिन उन्होंने अपनी गति बनाए रखी।निखिल ने बताया कि उन्हें भरोसा था कि वह शीर्ष तीन में जगह बनाएंगे और जैसे-जैसे रेस आगे बढ़ी, उनका आत्मविश्वास बढ़ता गया। यह लद्दाख मैराथन में उनका पहला प्रयास था और पहली ही बार में खिताब जीतकर वह बेहद उत्साहित हैं।उन्होंने कहा कि वह पहली बार लद्दाख आए हैं और यह उनका ऊंचाई वाले क्षेत्र में दूसरा रन था।

ध्यान केंद्रित और स्पीड वर्क भी किया

इससे पहले उन्होंने स्पीति में दौड़ लगाई थी। उनकी नियमित ट्रेनिंग मुंबई में होती है। निखिल ने बताया कि वह रेस से करीब 9-10 दिन पहले लद्दाख पहुंचे थे।ऊंचाई पर दौड़ने की चुनौती के बारे में उन्होंने कहा कि शुरुआती पांच-छह दिनों में उन्हें सिरदर्द, नींद न आने और चक्कर आने जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने अपनी तैयारी पर ध्यान केंद्रित रखा और स्पीड वर्क भी किया।

निखिल ने बताया कि उन्हें रेस के रूट की जानकारी नहीं थी, इसलिए शुरुआत में वह दूसरे धावकों को फालो करते रहे। हालांकि, जब रूट का सपाट हिस्सा आया तो उन्होंने अपनी ताकत का फायदा उठाया और रेस में बढ़त बना ली।

निखिल का मैराथन में सर्वश्रेष्ठ समय 2 घंटे 22 मिनट है। उन्होंने कहा कि उनका मुख्य इवेंट 42 किलोमीटर है और फिलहाल उनका लक्ष्य इसी दूरी में बेहतर प्रदर्शन करना है।

इंडियन एलीट कैटेगरी और वेदांता मैराथन में भी हिस्सा ले चुके हैं

वह अगले साल लद्दाख लौटकर अपने खिताब का बचाव करने और इससे बेहतर समय दर्ज करने की कोशिश करेंगे। उन्होंने बताया कि हाल ही में उन्होंने 10 किलोमीटर में महाराष्ट्र स्टेट स्तर पर पदक जीता है।

इसके अलावा वह टाटा मुंबई मैराथन में इंडियन एलीट कैटेगरी और वेदांता मैराथन में भी हिस्सा ले चुके हैं।हालांकि, निखिल ने अपने करियर की अगली छलांग के लिए आर्थिक सहयोग की जरूरत पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि वह अगले स्तर तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन फिलहाल उन्हें कोई वित्तीय सहायता नहीं मिल रही है। उनका कहना है कि यदि उन्हें सहयोग नहीं मिला तो उनकी मेहनत और समय दोनों प्रभावित हो सकते हैं।