जागरण संवाददाता, जम्मू :

जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित झज्जर कोटली के साथ लगते ककरेयाल में 32 घंटे चले ऑपरेशन में तीनों आतंकियों को मार गिराने के बाद मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) ने अनौपचारिक रूप से संभाल ली है। एनआइए की टीम और सुरक्षाबलों ने शुक्रवार को मुठभेड़ स्थल को खंगाला और कई सुराग जुटाए।

एनआइए के जम्मू कश्मीर कॉडर के आइजी मुकेश ¨सह की अध्यक्षता में टीम तीर्थी गांव में राजकुमार के घर गई, जहां आतंकी वीरवार तड़के घुस गए थे। इसी घर के आसपास तीनों आतंकियों को सुरक्षाबलों ने मार गिराया था। करीब एक घंटे की बातचीत में राजकुमार ने एनआइए को बताया कि तीनों आतंकी पाकिस्तान के सियालकोट और जम्मू के आरएसपुरा क्षेत्र में बोली जाने वाली पंजाबी भाषा में बात कर रहे थे। इससे यह स्पष्ट होता है कि आतंकी जैश-ए-मोहम्मद के हैं। सीमा पार आतंकियों के शिविर भी सियालकोट में चल रहे हैं। इसकी पुष्टि सेना की यूफोर्स के जीओसी अर¨वद भाटिया ने भी की है।

इसके बाद एनआइए की टीम ने ककरेयाल से लेकर सुकेतर तक के पांच किलोमीटर लंबे जंगल के रास्ते में तलाशी अभियान चलाया। एनआइए को आशंका थी कि कहीं आतंकी सुरक्षाबलों को नुकसान पहुंचाने के लिए रास्ते में कोई आइइडी न बिछा गए हों। इसके लिए सेना के बम निरोधक दस्ते की भी मदद ली। यह भी आशंका थी कि मुठभेड़ के दौरान कोई ¨जदा ग्रेनेड बिना फटे न रह गया हो। इसके बाद इलाके को सुरक्षित घोषित कर दिया गया। इस क्षेत्र में करीब आधा दर्जन गांव हैं, जहां के लोग जंगलों के रास्ते गांव जाते हैं। कुछ स्थानीय लोग ककरेयाल और कटड़ा के लिए भी इस रास्ते का इस्तेमाल करते हैं।

एनआइए के प्रवक्ता आलोक मित्तल ने कहा कि अभी उन्हें गृह मंत्रालय से मामले की जांच के आदेश नहीं मिले हैं, फिर भी हम मामले की अपने स्तर पर छानबीन कर रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि एक हफ्ते के अंदर गृह मंत्रालय जांच उन्हें सौंप देगा। वहीं श्री माता वैष्णो देवी के नारायणा अस्पताल में भर्ती मुठभेड़ के 13 घायलों में से चार को छुट्टी दे दी गई है। अन्यों की हालत स्थिर बताई जाती है और उनके स्वास्थ्य में सुधार हो रहा है। बार-बार बयान बदल रहे ओजीडब्ल्यू ट्रक चालक व सहचालक :

झज्जर कोटली आतंकी हमले के दौरान पकड़े गए ओवर ग्राउंड वर्कर (ओजीडब्ल्यू) ट्रक चालक रियाज अहमद और सहचालक मकबूल से सेना, पुलिस और एनआइए के अधिकारियों ने घंटों पूछताछ की। पूछताछ में कुछ महत्वपूर्ण सुराग भी मिले हैं। इन दोनों ओजीडब्ल्यू के तार कश्मीर में आतंकियों से भी जुड़ रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, दोनों हार्डकोर हैं और अपने बयानों को बार-बार बदल रहे हैं। जिससे कड़ियां जोड़ने में मुश्किलें आ रही हैं।

Posted By: Jagran