जम्मू, रोहित जंडियाल। राज्य में अभी तक पांच मेडिकल कॉलेज खुलने पर बेशक असमंजस बना हुआ हो लेकिन इनमें डॉक्टरों व पैरामेडिकल स्टाफ की नियुक्ति से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार के संकेत मिलना शुरू हो गए हैं। हर कॉलेज दो-दो सेंटर भी बनाएगा, जिनमें एक ग्रामीण प्राथमिक चिकित्सा केंद्र होगा। इनमें इन मेडिकल कॉलेजों के एमबीबीएस छात्र प्रशिक्षण लेंगे।

जम्मू संभाग में राजौरी, कठुआ और डोडा और कश्मीर में बारामुला तथा अनतंनाग में मेडिकल कॉलेज इसी सत्र से खुलने की तैयारी चल रही है। इन कॉलेजों में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने बड़ी संख्या में फैकल्टी सदस्यों की नियुक्ति की है। कठुआ मेडिकल कॉलेज में ही 21 फैकल्टी सदस्य, 17 जूनियर रेजीडेंट और 30 सीनियर रेजीडेंट शामिल हैं। इसी तरह डोडा मेडिकल कॉलेज में अभी तक 20 फैकल्टी सदस्य, 10 सीनियर रेजीडेंट और 19 जूनियर रेजीडेंट नियुक्त किए गए हैं। राजौरी मेडिकल कालेज में 41 फैकल्टी सदस्य, 25 सीनियर रेजीडेंट और 13 जूनियर रेजीडेंट नियुक्त हैं। अच्छी बात यह है कि इनमें कई विशेषज्ञ ऐसे हैं जो कि पहले इन जिलों में नहीं थे। कठुआ और राजौरी में कैंसर विशेषज्ञ नियुक्त किए गए हैं। दोनों ही जगहों पर उन्होंने ओपीडी और कीमोथेरेपी करना शुरू कर दी है। अब कठुआ और राजौरी के कई मरीज जम्मू में नहीं आ रहे हैं।

कठुआ मेडिकल कालेज में सौ कैंसर मरीजों का हुआ पंजीकरण

कठुआ मेडिकल कॉलेज में नियुक्त कैंसर विशेषज्ञ डॉ. दीपक अबरोल का कहना है कि डेढ़ महीने में सौ के करीब कैंसर के मरीजों ने पंजीकरण कराया है। इसी तरह मेडिसिन, गायनोकोलॉजी, सर्जरी, ईएनटी के डॉक्टरों की कमी ही दूर नहीं हुई है, बल्कि पहले की अपेक्षा अब इन जिलों में चार गुना हो गए हैं। डोडा मेडिकल कालेज की भी यही स्थिति है। डोडा ऐसा जिला था, जहां पर डॉक्टरों की भारी कमी थी। अभी भी स्वास्थ्य विभाग के अधीन आने वाले अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी है, मगर अब यहां पर खुल रहे मेडिकल कॉलेज में त्वचा रोग विशेषज्ञ से लेकर कैंसर विशेषज्ञ, पैथॉलोजी, माइक्रोबायोलॉजी, सर्जरी, मेडिसिन, गायनोकोलॉजी के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने अपनी सेवाएं देना शुरू कर दिया है। सेवानिवृत्त स्वास्थ्य निदेशक डॉ. बीएस पठानिया ने कहा नए कॉलेज खुलने से इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को काफी लाभ मिलेगा। बारामुला और अनंतनाग में फैकल्टी सदस्यों, सीनियर रेजीडेंट और जूनियर रेजीडेंट को मिलाकर करीब 200 डॉक्टरों की नियुक्ति हुई है। इससे इन क्षेत्रों के लोगों के लिए अब नए मेडिकल कॉलेजों में इलाज करवाना प्राथमिकता बन रहा है।

मेडिकल कॉलेज पर मरीजों का दबाव होगा कम

एक बार पूरी तरह से यह कॉलेज खुलने के बाद मेडिकल कॉलेजों में मरीजों का दबाव कम होगा। जीएमसी जम्मू में जम्मू जिले के अलावा ऊधमपुर, सांबा और रियासी और रामबन जिलों के लोग अधिक निर्भर होंगे। किश्तवाड़, भद्रवाह और डोडा के मरीज डोडा मेडिकल कालेज और पुंछ व राजौरी के लोग राजौरी मेडिकल कालेज पर निर्भर होंगे। कठुआ से अभी से ही जीएमसी जम्मू में मरीजों का आना कम हुआ है। कश्मीर में भी श्री महाराजा हरि सिंह अस्पताल और मेडिकल कॉलेज श्रीनगर में मरीजों का दबाव कम होगा।

ग्रामीण क्षेत्रों को अपनाएंगे

मेडिकल कॉलेज को एमबीबीएस के छात्रों के लिए एक ग्रामीण क्षेत्र और एक शहरी क्षेत्र के प्राथमिक चिकित्सा केंद्र में प्रशिक्षण करना अनिवार्य होता है। कॉलेजों के प्रीवेंटिव सोशल मेडिसिन विभाग के डॉक्टर भी इन प्राथमिक चिकित्सा केंद्रों में जाते हैं। जीएमसी कठुआ ने प्राथमिक चिकित्सा केंद्र बुद्धल और कृष्णा कॉलोनी को अपनाया है। वहीं डोडा मेडिकल कॉलेज ने प्राथमिक चिकित्सा केंद्र भल्ला और भट को अपनाया है। अन्य तीन कॉलेज भी दो-दो प्राथमिक चिकित्सा केंद्रों को अपनाएंगे। इससे इन प्राथमिक चिकित्सा केंद्रों पर निर्भर लोगों को भी बेहतर सुविधा मिलेगी।

मई से पहले होगा फैसला

स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव अटल ढुल्लु ने पांचों मेडिकल कॉलेजों को इसी सत्र से शुरू करने की मंजूरी देने के लिए लिखा है। मंजूरी मई महीना खत्म होने से पहले मिलने की उम्मीद है। बारामुला, कठुआ और अनंतनाग को 100-100 सीटें मिलना तय माना जा रहा है। डोडा व राजौरी पर असमंजस बना है।

 

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Posted By: Rahul Sharma

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