जम्मू के नेहरू मार्केट में जर्जर सरकारी क्वार्टर, 15 साल से टल रहा खतरा, नीचे चलती हैं 54 दुकानें, कब होगा समाधान?
जम्मू के नेहरू मार्केट में 15 साल से जर्जर पड़े सरकारी क्वार्टर बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं, जिन्हें ...और पढ़ें

15 साल पहले असुरक्षित घोषित किए जाने के बावजूद इन्हें गिराया नहीं गया। (फाइल फोटो)
HighLights
नेहरू मार्केट में 72 सरकारी क्वार्टर 15 साल से जर्जर।
2012 में असुरक्षित घोषित, अब भी खड़े हैं ये ढांचे।
जेडीए ने ध्वस्तीकरण और पुनर्विकास की प्रक्रिया शुरू की।
अंचल सिंह, जम्मू। व्यापारिक केंद्र नेहरू मार्केट में जर्जर हो चुके सरकारी क्वार्टर किसी बड़े खतरे को दावत दे रहे हैं। जम्मू विकास प्राधिकरण द्वारा लगभग 15 वर्ष पहले असुरक्षित घोषित किए जाने के बावजूद इन खस्ताहाल ढांचों को अब तक नहीं गिराया गया है। तीन मंजिला इन इमारतों में कुल 72 क्वार्टर हैं जो अब खाली तो पड़े हैं लेकिन इनके ठीक आसपास दुकानें और दिनभर लोगों की भारी आवाजाही रहती है। लगातार अनदेखी के चलते यह जर्जर इमारतें कभी भी ढह सकती हैं, जिससे जान-माल का बड़ा नुकसान होने की आशंका बनी हुई है।
जेडीए ने वर्ष 2012 में इन क्वार्टरों की जांच के बाद इन्हें असुरक्षित घोषित किया था। दो साल पहले ही इन्हें पूरी तरह खाली करवाया गया। दो साल पहले नेहरू मार्केट में वीसी जेडीए द्वारा इमारत अनसेफ होने का बोर्ड लगा दिया गया ताकि जो थोड़े से लोग इसमें रह रहे थे, वे भी खाली करें। मौजूदा समय इमारत खाली पड़ी हुई हैं।
यहां 54 दुकानें हैं। 1950 के दशक में इनका निर्माण किया गया था। नियम के अनुसार असुरक्षित घोषित इमारतों को तुरंत ध्वस्त किया जाना चाहिए ताकि कोई अप्रिय घटना न घटे। कागजों पर असुरक्षित का ठप्पा लगाने के बाद जर्जर इमारत आने-जाने वाले डरा रही हैं।
हादसे की कगार पर खड़ी तीन मंजिला इमारतें
नेहरू मार्केट इलाके में बनी तीन मंजिला इमारतों की हालत बेहद नाजुक हो चुकी है। दीवारों में गहरी दरारें आ चुकी हैं और छतों से प्लास्टर गिरना आम बात हो गई है। स्थानीय दुकानदारों और राहगीरों के अनुसार बरसात के मौसम में खतरा और अधिक बढ़ जाता है।
खाली पड़े होने के बावजूद यह क्षेत्र व्यस्त व्यापारिक गतिविधियों से घिरा हुआ है। यदि कोई हिस्सा अचानक ढह जाता है, तो नीचे मौजूद खरीदार और दुकानदार सीधे इसकी चपेट में आ सकते हैं। पहले इन इमारतों में दरबार मूव के कर्मचारियों को ठहराया जाता था।
क्या कहते हैं लोग
वेयर हाउस-नेहरू मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशन प्रधान दीपक गुप्ता बताते हैं कि इमारतें खस्ताहाल हो चुकी हैं। इन्हें तोड़ने की प्रक्रिया शुरू होनी चाहिए। इनके नीचे चल रही दुकानों काे तोड़कर दोबारा बनाकर दिया जाए। जेडीए दुकानदारों से वर्षों से किराया लेता है। उनकी जिम्मेवारी है कि दुकानें बनाकर दें। चरणबद्ध तरीके से काम होना चाहिए ताकि व्यापारियों का कामकाज भी प्रभावित न हो।
दुकानदार कपिल महाजन बताते हैं कि नेहरू मार्केट में रोजाना सैकड़ों लोग खरीदारी के लिए आते हैं। इन इमारतों के नीचे से गुजरते हुए हमेशा डर बना रहता है कि कहीं कोई हिस्सा सिर पर न गिर जाए। प्रशासन को बिना देरी नवीनीकरण का काम शुरू करना चाहिए। दुकानदारों को नई दुकानें बनाकर दी जानी चाहिए। सभी दुकानदार किराया देते आ रहे हैं।
क्या कहते हैं अधिकारी
जम्मू विकास प्राधिकरण सुप्रिंटेंडिंग इंजीनियर अल्ताफ हुसैन बताते हैं कि नेहरू मार्केट के 72 क्वार्टरों को तकनीकी रिपोर्ट के आधार पर पहले ही खाली करा लिया गया था। इमारतों को तोड़ने और उस स्थान के पुनर्विकास की योजना पर प्रक्रिया चल रही है। सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए बहुत जल्द इस दिशा में उचित कानूनी और तकनीकी कार्रवाई की जाएगी।
