जम्मू, राज्य ब्यूरो : अंतिम मतदाता सूचियों के प्रकाशन के बाद नेशनल कांफ्रेंस, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी और उन जैसे अन्य दल जो बाहरी लोगों को मतदाता बनाने की साजिश का दावा करते हुए शोर मचा रहे थे, अब चुप हो गए हैं। यह लोग अब विधानसभा क्षेत्र और मतदान केंद्र के आधार पर मतदाता सूचियों के आकलन में जुट गए हैं ताकि किसी अन्य राज्य के नागरिक को मतदाता बनाए जाने की पुष्टि कर सकें। शुरू में कहा जा रहा था कि 25 लाख नए मतदाता जोड़े जाएंगे, लेकिन करीब पौने आठ लाख ही नए मतदाता बने हैं जो पहले हो चुकी पुनरीक्षण की प्रक्रिया को ध्यान रखते हुए ज्यादा ही हैं।

चुनाव आयोग ने बीते शुक्रवार को जम्मू कश्मीर में अंतिम मतदाता सूची जारी की है। इसके मुताबिक, प्रदेश मे 8359771 मतदाता है। वर्ष 2019 के संसदीय चुनावों के दौरान जम्मू कश्मीर में लगभग 75.86 लाख मतदाता थे। मौजूदा मतदाता सूची में शामिल 11.28 लाख मतदाताओं में तीन लाख मतदाताओं की आयु 18-19 वर्ष के बीच है जो अक्टूबर 2022 से पूर्व ही 18 वर्ष के हुए हैं। 4.12 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं।

मतदाता सूचियों के अधिकारिक आंकड़ों के अध्ययन पर पता चलता है कि जम्मू कश्मीर में 1984 और 1989 के संसदीय चुनाव के बीच पांच साल के अंतर के दौरान 6.55 लाख नए मतदाता बने थे। 1996 और 1999 के संसदीय चुनावों के भीतर तीन साल के अंतर में 5.62 लाख नए मतदाता बने थे। इसके बाद 1999 और 2004 के बीच 11 लाख और वर्ष 2004 से वर्ष 2009 तक 3.80 लाख और वर्ष 2009 से 2014 कें संसदीय चुनाव तक 4.88 लाख और वर्ष 2014 से वर्ष 2019 के संसदीय चुनाव तक 6.33 लाख मतदाताओं में बढ़ोतरी हुई है।

विधानसभा चुनाव के लिए तैयार मतदाता सूचियों का आकलन किया जाए तो पता चलता है कि वर्ष 1996 के विधानसभा चुनाव से पहले यहां मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में 4.76 लाख मतदाता जोड़े गए थे। यह चुनाव छह वर्ष बाद हुए थे। 1996 के बाद 2002 में विधानसभा चुनाव हुए और छह वर्ष के इस अंतर के दौरान विधानसभा चुनाव के लिए मतदाता सूचियों में करीब 11.29 लाख नए वोटर शामिल किए गए। 2008 के विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची में 2.96 लाख और 2014 के विधानसभा चुनाव से पहले जब मतदाता सूची बनी तो उसमें 7.13 लाख नए मतदाता थे। पांच अगस्त 2019 से पूर्व जम्मू कश्मीर में संसदीय और विधानसभा चुनावों के लिए अलग अलग मतदाता सूची बनती थी। विधानसभा चुनाव की मतदाता सूची में सिर्फ जम्मू कश्मीर के स्टेट सब्जेक्ट की मतदाता के रूप में शामिल किए जाते थे। इसके अलावा जम्मू कश्मीर में विधानसभा का कार्यकाल भी छह वर्ष का था।

11 लाख का आंकड़ा बहुत ज्यादा : कश्मीर के राजनीतिक मामलों के जानकार आसिफ कुरैशी ने कहा कि अगर आप विधानसभा औार संसदीय चुनावों से पूर्व की मतदाता सूचियों का आकलन करेंगे तो आप पाएंगे कि 11 लाख का आंकड़ा बहुत ज्यादा है। प्रदेश में तीन साल बाद मतदाता सूची संशोधित हुई है, इसमें कई मृत मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, कई नए नाम जोड़े गए हैं। इसका मतलब यह हुआ कि जम्मू कश्मीर में बीते तीन साल के दौरान हर वर्ष औसतन पौने चार लाख नए मतदाता तैयार हुए हैं।

बूथ स्तर पर आकलन कर रहे : नेशनल कांफ्रेंस के प्रवक्ता तनवीर सादिक ने कहा कि हम बूथ स्तर पर मतदाता सूचियों का आकलन कर रहे हैं ताकि यह पता चल सके कि कौन नया मतदाता है ,क्या कोई बाहरी नागरिक यहां मतदाता तो नहीं बनाया गया। जब यह प्रक्रिया पूरी होगी तो उसके बाद हम अपने अगले कदम का एलान करेंगे।

संबंधित आंकड़े को मंगवा रहे : पीडीपी के वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता स. हरबख्श सिंह ने कहा कि हम सभी जिलों और विधानसभा क्षेत्रों से संबंधित आंकड़े को मंगवा रहे हैं। हम देख रहे हैं कि किन इलाकों में ज्यादा वोटर बढ़े हैं और कहां ज्यादा वोटरों के नाम घटाए गए हैं। मसला 25 लाख या 11 लाख का नहीं है।मसला जम्मू कश्मीर के लोगों के हक और उनके राजनीतिक सशक्तीकरण का है। 

Edited By: Vikas Abrol

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