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जम्मू, रोहित जंडियाल। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद से ही कई उद्योगपतियों ने यहां पर निवेश करने की घोषणा की है। मगर एक क्षेत्र ऐसा है, जिस पर सभी की निगाहें टिकी हैं। दवाइयां बनाने वाली कंपनियों के लिए जम्मू-कश्मीर का वातावरण उनके लिए मुफीद हैं। यह कंपनियां इस बात का इंतजार कर रही हैं कि सरकार उन्हें यहां पर क्या रियायतें देती है। विशेषज्ञों का भी मानना है कि जम्मू में कई कंपनियां दवाइयों के निर्माण में निवेश कर सकती हैं।

इस समय जम्मू-कश्मीर में करीब 50 कंपनियां दवाइयों का निर्माण कर रही हैं। अधिकांश जम्मू के औद्यौगिक क्षेत्र में हैं। इनमें सनफार्मा, कैडिला, ल्यूपिन एमक्योर, विवेक फार्मा और डाबर जैसी कंपनियां भी हैं। मगर इन कंपनियों को राज्य सरकारों ने कभी प्राथमिकता नहीं दी। यही कारण है कि इनमें से कुछ कंपनियों ने अपना उत्पादन भी कम कर दिया। बावजूद इसके, यहां पर कई कंपनियां बेहतर पैकेज मिलने पर निवेश कर सकती हैं। ड्रग एंड फूड कंट्रोल आर्गनाइजेशन के पूर्व कंट्रोलर सतीश गुप्ता भी मानते हैं कि जम्मू कश्मीर दवाइयों के उद्योग के लिए बेहतर है। मगर यह निर्भर करता है कि सरकार उन्हें आकर्षित करने के लिए क्या कदम उठाती है। उद्योगपति भी इसका इंतजार कर रहे हैं कि केंद्र सरकार उन्हें क्या पैकेज देती है। जम्मू में कई सालों से दवाइयां सप्लाई करने वाले एक कंपनी के प्रबंध निदेशक ने बताया कि हिमाचल प्रदेश और जम्मू दोनों ही फार्मा उद्योग के लिए सही है। मगर आने वाले दिनों में जम्मू में कितने उद्योग स्थापित होंगे, यह सरकार पर निर्भर करेगा।

एक हजार करोड़ का है व्यापार

जम्मू कश्मीर में इस समय दवाइयों का कारोबार एक हजार करोड़ रुपये के आसपास है। इनमें भी अधिकांश बाहर की कंपनियां ही हैं। जम्मू के बड़ी ब्राह्मणा और सांबा में कई फार्मा कंपनियां हैं जो कि एंटी बॉयोटिक्स से लेकर विटामिन और अन्य दवाइयां बनाती हैं। यह दवाइयां जम्मू कश्मीर में ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों में सप्लाई की जाती हैं।

इसलिए मुफीद है जम्मू-कश्मीर

जम्मू कश्मीर में जल विद्युत के कई प्रोजेक्ट होने के कारण बिजली काफी सस्ती है। प्रति यूनिट दो से तीन रुपये ही बिजली की लागत है। वहीं, अन्य प्रदेशों में प्रति यूनिट बिजली छह से सात रुपये दर है। यहां पानी के प्राकृतिक स्नोतों की कोई कमी नहीं है। गुणवत्ता में भी पानी कई प्रदेशों से बेहतर है। यहां का तापमान भी सामान्य है जो कि वैक्सीन सहित कई दवाइयों के लिए अनुकूल है।

जम्मू को प्राथमिकता दे रहे फार्मा उद्योग से जुड़े लोग

कश्मीर की अपेक्षा फार्मा उद्योग से जुड़े लोग जम्मू में उद्योग स्थापित करने को प्राथमिकता देते हैं। कैडिला, ल्यूपिन, सनफार्मा, डाबर जैसी कंपनियों ने जम्मू और सांबा जिलों में ही अपने यूनिट स्थापित किए हैं। कश्मीर में स्थानीय उद्योगपतियों ने ही अपने यूनिट लगाए हैं। जम्मू में बारह महीने काम होता है लेकिन कश्मीर में बर्फबारी के कारण सर्दियों में कामकाज पर असर पड़ता है। जम्मू के स्थानीय उद्योगपतियों को विश्वास है कि केंद्र सरकार बंद हो चुकी दवाइयों की लघु इकाइयों को फिर से शुरू करने के लिए विशेष पैकेज दे सकती है। 

Posted By: Rahul Sharma

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