जम्मू, राज्य ब्यूरो । सरपंचों को सुरक्षा उपलब्ध करवाने से संबंधित मानवाधिकार कार्यकर्ता अश्विनी कुमार चंरगू की शिकायत पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने केंद् व जम्मू कश्मीर सरकार से चार सप्ताह में रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। शिकायत में कहा गया कि सरपंचों को सुरक्षा प्रदान करने के कई बार आग्रह किए गए लेकिन केंद्र शासित प्रशसन जम्मू कश्मीर ने कोई कदम नहीं उठाया। यह भी आरोप लगाया कि जम्मू कश्मीर मेंं अल्पसंख्यक हिंदुओं को मारने की खुली चेतावनी दी गई थी।

जम्मू कश्मीर में सरपंच अपने आप को असुरक्षित महसूस कर रहे

जम्मू कश्मीर में सरपंच अपने आप को असुरक्षित महसूस कर रहे है। अल्पसंख्यकों को मारने की चेतावनी आतंकवादी संगठनों हिजबुल मुजाहिदीन, लश्कर-ए-ताेयबा, जैश-ए-मोहम्मद आदि ने दी। शिकायत में कहा कि आयोग संबंधित अधिकारियों को निर्देश दें कि सरपंचों को पर्याप्त सुरक्षा दी जाए। अगर ऐसा संभव नहीं है तो संबंधित अधिकारियों को चाहिए कि वे सरपंचों में डर को दूर करें।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयाेग ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के सचिव, जम्मू कश्मीर के मुख्य सचिव से कहा कि चार सप्ताह के भीतर कार्रवाई योजना रिपोर्ट को पेश करें। अगर निर्धारित समय के भीतर रिपोर्ट जमा नहीं करवाई जाती है तो आयोग संबंधित कानून के तहत संबंधित अधिकारियों को पेश होने के लिए कह सकता है।

जम्मू कश्मीर में गैर मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय के साथ आतंकवादियों और कट्टरवादियों द्वारा की गई ज्यातियों की जांच भी करें

मुख्य शिकायत चरंगू ने दर्ज करव पाई है जिसमें यह भी मांग की गई है कि जम्मू कश्मीर सरकार को निर्देश दिए जाएं कि जून 1999 के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के फैसले के तहत विशेष अपराध ट्राईब्यूनल बनाया जाए जो कश्मीर में अल्पसंख्यक कश्मीरी पंडितों के साथ हुए अन्याय के मामलों की जांच करें। शिकायत में कहा गया हे कि पूर्व जम्मू कश्मीर में गैर मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय के साथ आतंकवादियों और कट्टरवादियों द्वारा की गई ज्यातियों की जांच भी करें।

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