जम्मू में जानवरों की रहस्यमयी बीमारी ने बढ़ाई किसानों की चिंता, 2 दिन में दूध देने वाले दो पशुओं की मौत
जम्मू के चंदू चक गांव में एक रहस्यमयी बीमारी से 10 दिनों में दो दुधारू पशुओं की मौत हो गई है, जिससे किसानों में चिंता बढ़ गई है।
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जम्मू में रहस्यमयी बीमारी से दूध देने वाले पशुओं की मौत।
HighLights
10 दिनों में दो दुधारू पशुओं की रहस्यमयी बीमारी से मौत
पशुपालन विभाग जांच रिपोर्ट देने में देरी कर रहा है
स्टाफ की कमी के कारण विभाग को चुनौतियों का सामना
संवाद सहयोगी, आरएसपुरा (जम्मू)। जम्मू के सीमांत गांव चंदू चक में पशुओं की रहस्यमयी बीमारी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले दस दिनों में दो किसानों के दो दुधारू पशुओं की मौत हो चुकी है।
पहली मौत के बाद पशुपालन विभाग की टीम ने मृत पशु का सैंपल लेकर जांच के लिए चंडीगढ़ भेज दिया, लेकिन दस दिन बीतने के बाद भी किसानों को बीमारी के कारण और जांच रिपोर्ट की कोई जानकारी नहीं दी गई।
रविवार को एक और दुधारू पशु की मौत ने विभाग और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। किसानों को आशंका है कि अगर समय रहते बीमारी की पहचान कर रोकथाम के कदम नहीं उठाए गए तो यह अन्य पशुओं में भी फैल सकती है।
चंदू चक के किसान नीरज कुमार पुत्र कस्तूरी लाल की करीब दस दिन पहले एक गाय की संदिग्ध बीमारी के कारण मौत हो गई थी। परिवार की ओर से तत्काल संबंधित पशुपालन विभाग को इसकी सूचना दी गई। सूचना मिलने पर विभागीय टीम गांव पहुंची और मृत पशु का सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा गया।
किसानों को उम्मीद थी कि जांच रिपोर्ट आने के बाद बीमारी की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी और क्षेत्र में पशुओं को बचाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे, लेकिन दस दिन बाद भी रिपोर्ट का इंतजार खत्म नहीं हुआ है।
किसानों को बीमारी फैलने की सता रही चिंता
सीमांत किसान सुरजीत सिंह ने बताया कि विभागीय कर्मचारियों को पशु की मौत के संबंध में सूचित किया गया था। टीम गांव में आई थी और सैंपल लेकर चली गई, लेकिन इसके बाद किसानों को यह नहीं बताया गया कि सैंपल की जांच में क्या सामने आया है।
उन्होंने कहा कि रविवार को गांव के ही किसान बंशीलाल पुत्र पलाराम के एक दुधारू पशु की भी इसी तरह संदिग्ध बीमारी के कारण मौत हो गई। लगातार दूसरी मौत के बाद गांव के किसानों में भय का माहौल है।
किसानों का कहना है कि पहली मौत के बाद विभाग को मामले को गंभीरता से लेते हुए गांव में पशुओं की जांच का व्यापक अभियान चलाना चाहिए था। उनका आरोप है कि विभाग ने सैंपल लेने के बाद आगे की कार्रवाई के संबंध में किसानों को कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी। अब दूसरी मौत के बाद किसानों की चिंता और बढ़ गई है।
किसानों ने वर्ष 2022 में क्षेत्र में पशुओं में फैली ऐसी ही रहस्यमयी बीमारी का भी हवाला दिया। उस दौरान बड़ी संख्या में पशुओं की मौत हुई थी।
किसानों का कहना है कि वे नहीं चाहते कि उस तरह के हालात दोबारा पैदा हों। अगर बीमारी की समय रहते पहचान नहीं हुई और संक्रमित अथवा बीमार पशुओं का उपचार तथा आवश्यक रोकथाम नहीं की गई तो इसका सीधा असर किसानों की आजीविका पर पड़ सकता है।
विभाग के पास डॉक्टरों की कमी
लाइव स्टॉक अधिकारी आरएसपुरा डॉ. मुदस्सिर ने बताया कि विभाग की टीम ने मृत पशु का सैंपल लिया था और उसे जांच के लिए चंडीगढ़ भेजा गया है।
अभी रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है, इसलिए यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि पशु की मौत किस बीमारी के कारण हुई। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट आने में अभी कुछ दिन और लग सकते हैं।
उन्होंने बताया कि विभागीय कर्मचारियों को गांव-गांव जाकर पशुओं की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। यदि किसी पशु में बीमारी के लक्षण दिखाई देते हैं तो उसका उपचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विभाग लगातार मामले पर काम कर रहा है।
हालांकि डॉ. मुदस्सिर ने विभाग के सामने आ रही एक बड़ी समस्या की ओर भी इशारा किया। उन्होंने कहा कि पशुपालन विभाग के अधिकांश कर्मचारियों को जिला प्रशासन की ओर से दूसरे कार्यों में लगाया गया है।
इसके चलते आरएसपुरा क्षेत्र में डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी है और विभागीय टीमों को गांवों तक पहुंचने में परेशानी तथा देरी का सामना करना पड़ रहा है।
प्रशासन से स्टाफ वापस फील्ड में भेजने की मांग
लाइव स्टॉक अधिकारी ने जिला प्रशासन से मांग की कि पशुपालन विभाग के जिन डॉक्टरों और अन्य कर्मचारियों को दूसरे कार्यों में लगाया गया है, उन्हें वापस विभागीय फील्ड ड्यूटी में लगाया जाए, ताकि गांवों में पशुओं की समय पर जांच और उपचार हो सके।
सीमांत क्षेत्र में पशुधन किसानों की आय का महत्वपूर्ण साधन है, ऐसे में किसी भी बीमारी के फैलने की स्थिति को हल्के में लेना किसानों के लिए भारी नुकसान का कारण बन सकता है।
वहीं, किसान सुरजीत सिंह, नीरज कुमार सहित अन्य किसानों ने विभाग और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर रोष जताया। किसानों ने कहा कि पहली मौत के बाद ही अगर पूरे गांव में पशुओं की जांच शुरू कर दी जाती और किसानों को बीमारी से बचाव के संबंध में जागरूक किया जाता तो दूसरी मौत को लेकर पैदा हुई चिंता को काफी हद तक कम किया जा सकता था।
किसानों ने चेतावनी दी कि अगर विभाग और प्रशासन ने जल्द बीमारी की पहचान करवाकर आवश्यक कदम नहीं उठाए तो बीमारी के फैलने से और पशुओं की जान जा सकती है।
किसानों ने कहा कि ऐसी स्थिति में होने वाले नुकसान की जिम्मेदारी संबंधित विभाग और प्रशासन की होगी। उन्होंने कहा कि यदि जल्द उचित कार्रवाई नहीं हुई तो किसान सड़क पर उतरकर विरोध करने के लिए मजबूर होंगे और अपने पशुओं के नुकसान का मुआवजा भी प्रशासन एवं संबंधित विभाग से मांगेंगे।
