जागरण संवाददाता, जम्मू : कश्मीर के बड़गाम जिले में आतंकी हमले में मारे गए बीडीसी चेयरमैन भूपेंद्र सिंह का शव वीरवार की सुबह करीब 10:30 बजे जैसे ही सैनिक कॉलोनी के सेक्टर ई स्थित उनके घर पहुंचा, वहां कोहराम मच गया। हर तरह चीख-पुकार की आवाज आ रही थी। शव से लिपटकर परिजन रो रहे थे और पड़ोसी व रिश्तेदार उनको संभाल रहे थे।

भूपेंद्र के बड़े बेटे अमनदीप सिंह की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं रहे थे। उसकी मां तो बदहवासी की हालत में चली गई थी। उनको संभालना मुश्किल हो रहा था। अमनदीप के छोटे भाई-बहन भूपेंद्र के शरीर से लिपट कर उनसे बस एक बार बात करने की गुहार लगा रहे थे। यह देख कर वहां मौजूद सभी लोगों की आंखें नम हो गई। परिवार को ढांढस बंधाने के लिए भाजपा प्रदेशाध्यक्ष रविद्र रैना, पूर्व मुख्यमंत्री कविद्र गुप्ता, पूर्व एमएलसी विक्रम रंधावा के अलावा एसएसपी जम्मू श्रीधर पाटिल भी भूपेंद्र के घर पर पहुंचे हुए थे। दोपहर बाद करीब चार बजे भूपेंद्र सिंह का शास्त्री नगर के श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार किया गया।

------- अंजाम तक पहुंचाए जाएंगे आतंकी : रैना

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रविद्र रैना ने कहा कि यह बहुत दुखद घटना है। बडगाम में हुआ हमला पाकिस्तान और आतंकियों की बौखलाहट को दर्शाता है। भूपेंद्र सिंह जो लोगों की सेवा कर रहे थे, उनकी जिस तरह हत्या की गई, उसकी जितनी निंदा की जाए कम है। आतंकियों ने एक बड़ी साजिश के तहत वारदात को अंजाम दिया है। सुरक्षा बलों ने आतंकियों को घेर लिया है, जल्द ही उनको अंजाम पर पहुंचा दिया जाएगा।

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हताश है आतंकी : कविंद्र गुप्ता

्र पूर्व उपमुख्यमंत्री कविद्र गुप्ता ने कहा कि कश्मीर घाटी में सुरक्षा बलों ने पांच सौ से अधिक आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया है। इससे आतंकी हताश हैं और बौखलाए हुए हैं। भूपेंद्र सिंह की हत्या जिन आतंकियों ने की है, उनको छोड़ा नहीं जाएगा। घाटी में जनता के लिए काम करने वालों की सुरक्षा सरकार का प्राथमिक कर्तव्य है। -------------

देश के लिए शहीद हो गए मेरे पिता

जागरण संवाददाता, जम्मू : कश्मीर के बड़गाम जिले में आतंकी हमले में मारे गए बीडीसी चेयरमैन भूपेंद्र सिंह के परिजनों को उन पर गर्व है। उनका कहना है कि भूपेंद्र सिंह आतंकी धमकियों से डरे नहीं और लोगों के लिए काम करते हुए शहीद हो गए। भूपेंद्र सिंह के बड़े बेटे अमनदीप सिंह का कहना है कि मेरे पिता देश के लिए शहीद हो गए। मेरे पिता को कई बार आतंकियों से धमकियां मिलती थीं, लेकिन वे इसकी परवाह किए बिना आम लोगों के लिए काम करते रहे। अमनदीप ने कहा कि उसके पिता कहते थे कि लोगों ने उनको चुन कर बीडीसी बनाया है, इसलिए वे आतंकियों से डरे बिना काम करते रहेंगे।

भूपेंद्र सिंह के बेटे अमनदीप ने बताया कि उसके पिता ने हत्या से पूर्व अंतिम बार उसकी मां से फोन पर बात की थी। तब तक सब कुछ ठीक था। इसके बाद वे बड़गाम प्रशासन के साथ बैठक में शामिल हुए। बैठक के बाद जब वे अपने घर पहुंचे तो पहले से घात लगाए आतंकियों ने उन पर पीछे से गोलियां बरसानी शुरू कर दी। अमनदीप ने सवाल किया कि जब आतंकी उसके पिता पर गोलियां बरसा रहे थे, तो उनके अंगरक्षक सुरक्षाकर्मी कहां थे? प्रशासन को इस सवाल का जवाब देना होगा। प्रशासन की जिम्मेदारी बनती थी कि उन्हें सुरक्षा दी जाती।

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