श्रीनगर, राज्य ब्यूरो। कश्मीर में सांप्रदायिक सौहार्द की एक और मिसाल पेश करते हुए रविवार को मुस्लिम समुदाय के लोगों ने बारामुला में एक कश्मीरी पंडित महिला के देहावसान पर उसकी अर्थी को कंधा दिया। यही नहीं, उसके अंतिम संस्कार का भी प्रबंध किया।

जानकारी के अनुसार, 1990 के दशक के दौरान जब पूरी वादी में धर्माध आतंकियों के फरमान के कारण कश्मीरी पंडित पलायन कर रहे थे तो बारामुला जिले के वुस्सन, टंगमर्ग गांव में निरंजन नाथ कश्मीरी पंडित ने तमाम मुश्किलों के बावजूद अपने घर में ही रहने का फैसला किया था।

उन्होंने पलायन नहीं किया। रविवार सुबह उनकी पत्नी दुलारी (85) का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। उसके निधन की खबर फैलते ही पूरा गांव शोक जताने पहुंच गया।मुस्लिम पड़ोसियों ने शोक संतप्त परिवार को सांत्वना देते हुए अंतिम संस्कार के लिए आवश्यक प्रबंध किए। उन्होंने दिवंगत के परिजनों का हर संभव सहयोग किया और उसकी अर्थी को कंधा देते हुए श्मशान घाट पहुंचाया। उसके पुत्र ने चिता को मुखाग्नि दी।

स्थानीयवासी इरशाद अहमद ने बताया कि वुस्सन में कभी सांप्रदायिक तनाव नहीं रहा है और न किसी ने कश्मीरी पंडितों को तंग किया। हम सभी यहां ¨हदू-मुस्लिम की तरह नहीं बल्कि कश्मीरी बनकर रहते हैं। मजहब चाहे कोई हो, लेकिन हम सभी कश्मीरी हैं और कश्मीरियत ही हमारी तहजीब है। 

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