जम्मू, नवीन नवाज। कश्मीर में स्थानीय आतंकियों की फौज तैयार करने में जुटे जिहादी तत्व अगर किसी से डरते हैं तो वह सिर्फ मां से। गुमराह होकर आतंकी बनने निकले कई युवकों की माएं ही अपनी ममता से उन्हें वापसी के लिए मजबूर कर चुकी हैं। हालांकि, हर मां अपने बेटे को मौत के रास्ते से वापस नहीं ला सकी है, लेकिन बीते तीन वर्षों में जो एक दर्जन युवा जिहाद को तौबा कर घर लौटे हैं, वे सिर्फ मां की दलीलों और पुकार के कायल होकर। यही कारण है कि आतंकियों को मुख्यधारा में लाने के लिए सुरक्षा एजेंसियों ने मां बुला रही है अभियान भी चलाया।

अनंतनाग का नवोदित फुटबॉलर माजिद अरशिद खान जब लश्कर-ए-तैयबा का आतंकी बना तो उसके पिता, बहन ने सभी ने अपील की, पर वह नहीं लौटा। सुरक्षा एजेंसियां भी उसे वापस लाने में नाकाम रही। जब उसकी मां आयशा ने अपील करते हुए उसी सोशल मीडिया का सहारा लिया जिस पर माजिद ने आतंकी बनने का एलान किया था, न सिर्फ माजिद घर लौटने को मजबूर हो गया बल्कि लश्कर ने भी एक बयान जारी कर कहा कि सिर्फ उसे उसकी मां की खातिर जिहाद के रास्ते से लौटने के लिए कहा है। इस समय वह कश्मीर से बाहर नई जिंदगी की इमारत तैयार कर रहा है। माजिद की वापसी से उत्साहित होकर कश्मीर का कंधार कहलाने वाले त्राल में जेनब बदला हुआ नाम ने भी अपने बेटे से बंदूक छोड़ने की अपील की। उसने भी आयशा की तरह उसे दूध का वास्ता देते हुए पूछा था कि बता वह कौन सा इस्लाम है जो मां के पैरों को छोड़ जिहाद की सीख देता है। उसकी करुण पुकार जो भी सुनता था,उसका दिल रो देता था। उसका बेटा जिसने शुरू में मां की अपील पर कहा था कि वह अब नहीं लौटेगा, कुछ दिन बाद बंदूक को नमस्ते कर घर लौट आया।

मां में है ताकत

मां की ममता में बड़ी ताकत है। हमने देखा है कि बहुत से लड़के अपनी मां की पुकार पर ही घर लौटे हैं। हमारा प्रयास रहता है कि हम ऐसे परिवारों की पूरी रक्षा करें, उनके पुनर्वास में सहयोग करें।

रवि दीप साही, आइजी सीआरपीएफ

करीब एक दर्जन युवकों ने कुछ वर्षों में आतंकवाद का रास्ता छोड़ा है, उन्हें वापस लाने में उनकी मां की भूमिका अहम रही है। मां की पुकार से कश्मीरी बच्चों को आतंकवाद की तरफ धकेलने वाले तत्व भी डरते हैं। यही कारण है कि कई बार जिहादी तत्व कश्मीर की माओं से कहते हैं कि वह दोबारा जिहाद के रास्ते से बच्चों को लौटने के लिए न कहें। श्रीनगर में तीन माह बाद बंदूक छोडऩे वाले स्थानीय आतंकी दानिश के बारे में कहा जाता है कि उसे सरेंडर के लिए उसकी मां ने ही मनाया है। बीते सप्ताह दक्षिण कश्मीर के त्राल में जैश का आतंकी बनने के तीन दिन बाद घर लौटने वाला युवक भी मां की पुकार पर ही लौटा है।

-इम्तियाज हुसैन मीर, एसएसपी।   

मां की भूमिका अहम

राज्य पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि स्थानीय युवकों को बेहतर ङ्क्षजदगी जीने का रास्ता दिखाने में उनकी मां की भूमिका अहम है। आज से चार-पांच साल पहले तक कश्मीर में शायद ही कोई मां आतंकी बने अपने बेटे तक पहुंच बना सकती थी, जब वह उससे संपर्क करती थी तो वह आतंकवाद में रम चुका होता था। अब सोशल मीडिया के जरिए मां अपनी पुकार अपने बेटे तक आसानी से पहुंचा देती है। अब पहले से कहीं ज्यादा संख्या में माएं अपने बच्चों को मुख्यधारा में लाने के लिए सक्रिय हैं। उनके पास जो जानकारी होती है वह देती हैं और कहती हैं कि बस उनका बेटा उन्हें लौटा दो। दक्षिण कश्मीर में आतंकरोधी अभियानों में सक्रिय भूमिका निभा रही विक्टर फोर्स ने तो सोशल मीडिया पर कई गाने और अपीलें भी रिकार्ड कर, उन्हें स्थानीय मस्जिदों व अन्य जगहों पर लाउड स्पीकरों पर प्रसारित कर स्थानीय आतंकियों की घर वापसी का कार्यक्रम भी चलाया। इस कार्यक्रम को मां बुला रही है,नाम दिया था। इसका असर भी हुआ और इससे हताश आतंकी कमांडरों ने हाल-फिलहाल आतंकी बने युवकों के घरों में जाकर परिजनों को भी धमकाया था।

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Posted By: Sachin Mishra

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