संवाद सहयोगी, बारामुला (श्रीनगर)। उत्तरी कश्मीर के सोपोर में आतंकियों ने एक युवक को अगवा कर गोलियों से भूनकर उसे मौत के घाट उतर दिया। पेश से दर्जी का काम करने वाले मुश्ताक अहमद मीर के जनाजे में सैकड़ों लोग शामिल हुए। सोपोर में बीते कुछ सालों में यह पहला मौका है, जब आतंकियों द्वारा मौत के घाट उतारे गए किसी आम नागरिक के जनाजे में इतनी ज्यादा तादाद में लोग आए हों।

इस दौरान लोगों में आतंकियों के खिलाफ आक्रोश भी साफ नजर आया। स्वचालित हथियारों से लैस आतंकियों के एक दल ने गत शनिवार देर रात सोपोर के हारवन में रहने वाले मुश्ताक को उसके घर से अगवा कर लिया था। मुश्ताक के परिजनों ने इसकी सूचना तत्काल पुलिस को दी। पुलिस ने रात को ही सोपोर व उसके साथ सटे इलाकों में तलाशी अभियान चलाने के अलावा आतंकियों के संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी भी की थी, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।

सोमवार सुबह सोपोर से कुछ दूरी पर स्थित लटीशरट गांव के लोगों ने सेब के बाग में मुश्ताक का गोलियों से छलनी शव देखा। पुलिस ने आवश्यक कानूनी औपचारिकताओं को पूरा कर शव उसके वारिसों के हवाले कर दिया। हालांकि किसी आतंकी संगठन ने इस वारदात की जिम्मेदारी नहीं ली है और न पुलिस ने उसकी हत्या के कारणों का खुलासा किया है, लेकिन स्थानीय लोगों के मुताबिक, मुश्ताक मीर को लश्कर व हिज्ब के चार आतंकियों ने अगवा किया था और उन्होंने उसे सुरक्षाबलों का मुखबिर होने के संदेह में मौत के घाट उतारा है।

इस बीच, मुश्ताक की हत्या की खबर फैलते ही हारवन और उसके साथ सटे इलाकों में तनाव फैल गया। लोगों ने कारोबार बंद कर दिए। बताया जाता है कि मुश्ताक मीर के जनाजे में सैकड़ों लोग शामिल हुए। अन्यथा आतंकियों द्वारा सुरक्षाबलों का मुखबिर होने के संदेह में मारे गए व्यक्ति के जनाजे में उसके परिजन और चंद रिश्तेदार ही नजर आते हैं। 

Posted By: Preeti jha

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