जागरण संवाददाता, जम्मू : 'जाको राखे साइयां मार सके ना कोए'। यह कहावत झज्जर कोटली में रहने वाले गणेश दास पर सटीक बैठती है। आतंकियों ने उसे मारने के लिए तीन गोलियां चलाई, लेकिन मौत मानो उसे छू कर निकल गई। गणेश दास की दाहिनी बाजू में गोली का एक छर्रा लगा है।

सेरीकल्चर विभाग की नर्सरी में तैनात गार्ड गणेश दास बुधवार सुबह साढ़े साज बजे रोज की तरह ड्यूटी पर जा रहे थे। जैसे ही वह झज्जर कोटली पुल के पास पहुंचे तो उनके सामाने तीन आतंकी हाथों में घातक हथियार लेकर खड़े थे। गणेश दास ने गाड की खाकी रंग की वर्दी पहनी हुई थी। आतंकियों ने उसकी वर्दी देखकर उसे पुलिस कर्मी समझा। बकौल गणेश दास, 'एक आतंकी मुझपर चिल्लाकर बोलो, मैं तुझे नहीं छोड़ूगा और उसने मुझपर तीन गोलियां चला दी। सौभाग्य से मुझे एक भी गोली नहीं लगी। अलबत्ता, एक गोली जो सड़क किनारे दीवार पर लगी थी, उसका छर्रा मेरी दाहिनी बाजू पर जा लगा। जान बचाने के लिए मैं भागकर वहां किसी के घर में घुस गया, जिसके बाद तीनों आतंकी नाले की तरफ भाग गए।'

जीएमसी अस्पताल में दाखिल गणेश दास ने बताया कि आतंकियों से सामना होने से पूर्व उन्हें गोलियां चलने की आवाज आई थी। पहले तो उन्होंने सोचा कि स्थानीय लोग अपने खेतों से बंदरों को भगाने के लिए बम चला रहे हैं, लेकिन बाद में उन्हें पता चला कि आतंकियों ने वहां तैनात पुलिस कर्मियों पर गोली चलाई थी। वहीं बाद में मौके पर पहुंची पुलिस ने आतंकी हमले में घायल गणेश दास को उपचार के लिए डंसाल अस्पताल पहुंचाया। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें विशेष उपचार के लिए जम्मू के जीएमसी अस्पताल में भेज दिया गया। गणेश दास का उपचार कर रहे डॉक्टरों ने बताया कि उनकी हालत स्थिर बनी हुई है। बड़ा हमला टला पर खतरा बरकरार :

जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर झज्जर कोटली में हमले से पहले सकेतर के पास जहां पुलिस ने नाके पर ट्रक को रोका था, वहां कई बच्चे स्कूल की बस का इंतजार कर रहे थे। कई लोग सुबह हाईवे पर दफ्तर जाने की लिए बसों के इंतजार में थे। यदि ट्रक में छिपे बैठे आतंकी नाके पर ही गोलाबारी कर देते तो बड़ा नुकसान हो सकता था। आतंकियों ने नाके पर पुलिस के देखकर आगे निकलने में ही अपनी भलाई समझी। बाद में हमले की जानकारी मिलते ही सकेतर के साथ लगते दिल्ली पब्लिक स्कूल सहित अन्य सरकारी सरकारी स्कूलों में छुट्टी कर दी गई। श्री माता वैष्णो देवी विश्व विश्वविद्याल और ककरेयाल में स्थित नारायणा हॉस्पिटल में भी सर्तकता बढ़ा दी गई है। कटड़ा से जम्मू आने वाली बम्बे सुपर फास्ट को भी पीछे ही रोक दिया गया। बाद में ट्रेन को रवाना किया गया। बड़ा हमला तो फिलहाल टल गया है, लेकिन मौके से भाग निकले आतंकियों के पकड़े या मारे जाने तक खतरा बरकरार है।

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