श्रीनगर, नवीन नवाज: खुशीपोरा का नाम सुनकर कोई भी अंदाजा लगाने लगता है कि अनंतनाग जिले के इस गांव का मिजाज और माहौल हमेशा खुशनुमा रहता है। लोग भी हंसमुख ही होंगे। वीरवार को गांव में जो भी पहुंचा, उसे ऐसा कुछ नजर नहीं आया। गांव में चारों तरफ सन्नाटा था। एक घर में विलाप करती महिलाओं की आवाज ही इस सन्नाटे को तोड़ रही थी।

जो चेहरा नजर आता, वह गमजदा होता, हर आंख नम थी क्योंकि सबके साथ सहृदयता से पेश आने वाला, हर मुसीबत में हर संभव मदद करने को तैयार हंसमुख रमीज राजा आतंकियों का मुकाबला करते हुए शहीद हो गया था। उसके घर में शादी की तैयारियां चल रही थीं। मां सेहरा सजा रही थी, लेकिन आतंकियों ने उनके बेटे को छीन लिया। वीरवार को उनके घर से उसकी बरात नहीं, जनाजा निकला।

रमीज राजा जम्मू कश्मीर पुलिस में कुछ साल पहले ही भर्ती हुआ था। वह वीरवार सुबह श्रीनगर के अरिगाम नौगाम में भाजपा नेता अनवर खान के मकान पर आतंकी हमले को नाकाम बनाते हुए शहीद हो गया। दोपहर बाद तिरंगे में लिपटे उसके पाॢथव शरीर को जैसे ही गांव में लाया गया, वहां का माहौल पूरी तरह गमजदा हो गया। दुकानें बंद हो गईं। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक सब उसके घर पहुंच गए। मां और बहन की हालत रो-रोकर बहुत बिगड़ चुकी थी।

वह किसी से संभाले नहीं संभल रही थीं। घर के आंगन में मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम थीं। शहीद के जनाजे में सिर्फ स्थानीय, बल्कि आसपास के गांवों के लोग भी शामिल हुए। गांव में पैतृक कब्रिस्तान में शहीद के पार्थिव शरीर को सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

ईद के बाद थी शादी: राबिया नामक एक महिला ने अपनी आंखें पोंछते हुए कश्मीरी भाषा में आतंकियों के लिए बददुआ करते हुए कहा कि जिन्होंने हमारे रमीज को शहीद किया है, उनके घर बिजली गिरे। आज इस घर में मातम देख रहे हैं, दो दिन पहले यहां दावत हो रही थी। दो दिन पहले ही रमीज का निकाह तय हुआ था। ईद के बाद दुल्हन को लेने जाना था। यहां शादी की तैयारियां चल रही थी। बरातियों की सूची बनाई जा रही थी। अब देखो, क्या हो गया।

मां बोली-आतंकियों ने हमें तो जीते जी कत्ल कर दिया: अपनी बेटी के पास बैैठी शहीद की मां नसीमा ने कहा कि जिन्होंने मेरे रमीज को शहीद किया है, उन्होंने हम सभी को जीते जी कत्ल कर दिया है। कहते हैं कि मेरे बेटे को मुजाहिदों ने मारा है, यह कौन से मुजाहिद हैं। मेरा बेटा भी तो मुजाहिद ही था, वह भी इसी कौम की खातिर, इसी कश्मीर के लिए पुलिस में भर्ती हुआ था। मेरा खाविंद भी पुलिस में ही था। मेरे बेटे को शहीद करने वाले कभी भी मुजाहिद नहीं हो सकते। मैं तो उसके लिए सेहरा सजा रही थी।

सबको खुश रखता था: शहीद का पाॢथव शरीर लेकर आए उसके साथी नजर मोहम्मद ने कहा कि रमीज हमेशा मजाक करता था। वह किसी ने नहीं डरता था। जब भी हम उसे कहते कि थोड़ा संजीदा हो जाओ तो वह कहता था कि मैं खुशीपोरा का हूं, खुश रहूंगा, हंसूगा-हंसाऊंगा। संजीदा नहीं रह सकता।

आतंकियों के खिलाफ हर चेहरे पर गुस्सा: शहीद रमीज के पड़ोसी राशिद ने कहा कि वह अपने पिता स्वर्गीय अब्दुल सलाम के नक्शेकदम पर चलते हुए पुलिस में भर्ती हुआ था। अपनी मां नसीमा और छोटी बहन व छोटे भाई आकिब के लिए हमेशा फिक्रमंद रहने वाला रमीज गांव में हरदिल अजीज था। वह बहुत बहादुर था। उन्होंने कहा कि मेरी उम्र 42 साल है। मैंने अपने गांव में कई शहीद पुलिसकर्मियों के जनाजे देखे हैं, लेकिन आज पहली बार यूं लोगों को हुजूम देखा है। यह पूछने पर कि लोग क्या कहते हैं तो राशिद ने कहा कि यहां बेशक कोई नहीं बोलेगा, लेकिन नम आंखें और गमजदा चेहरों पर गुस्से की लकीरें बता देती हैं कि वह क्या सोचते हैं। लोगों में बहुत गुस्सा है। 

Edited By: Rahul Sharma