श्रीनगर, नवीन नवाज। कश्मीर घाटी में कोरोना बम बनकर घूम रहे विदेश से लौटे स्थानीय नागरिक ही इस समय कोरोना को हराने की प्रशासन की मुहिम में सबसे बड़ी दीवार बनते जा रहे हैं। इन लोगों का पता लगाना और उन्हें क्वारंटाइन केंद्रों में पहुंचाना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। इस मुश्किल का पार पाने के लिए प्रशासन ने पुलिस व स्वास्थ्यकर्मियों के संयुक्त दस्तों के अलावा निगरानी दस्ते भी गठित किए हैं। पुलिस के खुफिया तंत्र को भी काम में लगाया गया है। पंचायत व स्थानीय निकाय प्रतिनिधियों सहित गांवों के नंबरदारों, चौकीदारों और मौलवियों की मदद ली जा रही है और नियंत्रण कक्ष भी बनाया है। नियंत्रण कक्ष में विदेश यात्रा कर अपने घरों में छुपकर बैठे ऐसे लोगों की अभी तक 400 से ज्याद शिकायतें एक सप्ताह के भीतर प्राप्त हो चुकी हैं और इस पर कार्रवाई करते हुए 170 लोगों को पकड़ क्वरंटाइन भी किया गया है।

घाटी में अब तक एक ही कोरोना पीड़ित की मौत हुई है। उसके अलावा करीब दो दर्जन संदिग्ध कोरोना मरीज हैं जबकि आठ में कोरोना वायरस के संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है। करीब साढ़े तीन हजार लाेगों को विभिन्न क्वरंटाइन केंद्रों में रखा गया है। वादी में अभी तक जो भी कोरोना के संदिग्ध या पाजिटीव मरीज मिले हैं, वे सभी मरीज विदेश यात्रा से ही लौटे हैं। या फिर कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों के संपर्क में आए हैं। कश्मीर की पहली कोरोना पीड़ित महिला साऊदी अरब से लौटी थी। अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर क्वारंटाइन प्रक्रिया से गुजरे बिना वह अपने घर पहुंच गई थी। बाद में उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। कश्मीर में काेरोना से मरने वाला पहला व्यक्ति भी दिल्ली, उत्तर प्रदेश में मलेशिया और इंडोनेशिया से आए लोगों के साथ संपर्क में रहा था। कश्मीर में कोरोना से संक्रमित पहली महिला मरीज भी साऊदी अरब से लौटी थी। वह भी स्क्रीनिंग प्रक्रिया से बचकर अपने घर पहुंची थी।

कश्मीर घाटी में बांग्लादेश, इटली, अमरीका, इंग्लैंड, थाईलैंंड, हंगरी, श्रीलंका, पाकिस्तान, साऊदी अरब और ईरान समेत काेरोना प्रभावित मुल्कों से बहुत से लोग बीते तीन माह के दौरान आए हैं। शेर-ए-कश्मीर आयुर्विज्ञान संस्थान सौरा के निदेशक डाॅ. एजी अहंगर ने कहा कि कोरोन वायरस से पीड़ित लोगों की संख्या अगर बढ़ती है तो उसके लिए लोग खुद जिम्मेदार होंगे। अभी समय है। लोग अपनी विदेश यात्रा को छिपाकर घर में आराम कर रहे हैं। बांडीपोर से जो चार मामले सामने आए हैं, वे करोनो संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में रहने से ही हैं। इसलिए जो लोग अपनी विदेश यात्रा को छिपा रहे हैं या कोरोना संक्रमित व्यक्ति को छिपा रहे हैं, कोरोना लक्षणों के बावजूद डाॅक्टर के पास नहीं पहुंच रहे हैं, तो वे कश्मीर को तबाह करने पर तुले हैं। सीडी अस्पताल श्रीनगर में कार्यरत एक डाक्टर ने कहा कि जो लोग अपनी विदेश् यात्रा के बारे में छिपा रहे हैं, वे एक तरह से कोरोना वायरस बम ही हैं जो कभी भी फट सकता है।

विदेश यात्रा करने वाले स्थानीय लोगों का पता लगाने के लिए कश्मीर प्रशासन ने कश्मीर में 50 से ज्यादा निगरानी दस्ते बनाए हैं। इन दस्तों में पुलिस, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अलावा एक मजिस्ट्रेट भी शामिल है। इसके अलावा श्रीनगर में एक नियंत्रण कक्ष भी बनाया गया है। इसमें आईटी प्रोफेशन्लस और साइबर पुलिस का एक दस्ता भी तैनात किया गया है। मजहबी नेताओं से भी कहा गया है कि वे अपने-अपने स्तर पर लोगों से अपील कर, विदेश यात्रा करने वालों के बारे में पता लगाने में मदद करें। पंचायत प्रतिनिधियों, निकाय प्रतिनिधियों और गांवों के नबंरदारों व चौकीदारों को भी इस पक्रिया में शामिल किया गया है। उन्हें कहा गया है कि वे अपने-अपने इलाकों में ऐसे सभी लोगों का पता लगाएं जो बीते तीन माह के दौरान विदेश यात्रा पर गए हैं या फिर विदेशियों के संपर्क में रहे हैं।

Posted By: Rahul Sharma

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