श्रीनगर, रजिया नूर। कोरोना वायरस के खतरे से निपटने को वादी में भी पूरी तरह लॉकडाउन है। संक्रमितों के इलाज व रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग, प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद हैं। शारीरिक दूरी के नियम का पालन करने के लिए लोग घरों से नहीं निकल रहे हैं। उधर, आम दिनों में व्यस्तता के कारण पढ़ने-लिखने के लिए समय न निकाल पाने वाले साहित्य मनीषियों को इस दौरान सृजन का मौका मिल गया है। कुछ लोगों ने अपनी अधूरी किताबें भी लॉकडाउन में पूरी कर ली। कुछ लोग अच्छे साहित्य पढ़ने का शौक पूरा कर रहे हैं।

घर में पड़ी पुस्तकों के अलावा लोग ऑनलाइन भी पुस्तकें पढ़ रहे हैं। कश्मीर विश्वविद्यालय के फारसी विभाग के रिसर्च स्कॉलर मुदासिर हुसैन ने कहा, इस लॉकडाउन ने मुझे अपने घर में बैठकर अपना एक रिसर्च पेपर मुकम्मल करने का मौका दिया। समय न मिलने के कारण यह पेपर मुकम्मल नहीं कर पा रहा था। इस लॉकडाउन ने न केवल झे यह पेपर मुकम्मल करने बल्कि अन्य विषयों पर लिखने का मौका भी दिया।

स्वच्छता के सूत्र पूरा किया : पाठक

कश्मीर विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में सहायक प्रोफेसर डॉ. भारतेंदु कुमार पाठक ने कहा कि वह दो वर्ष से तुलसी साहित्य में स्वच्छता के सूत्र के नाम से एक पुस्तक लिख रहे थे। समय के अभाव से उसे पूरी नहीं कर पा रहे थे। लॉकडाउन में इसे पूरा कर दिया है। अब इसका रिवीजन कर रहे हैं। पाठक ने कहा, अपनी किताब को मुकम्मल करने के साथ कई ऐसी किताबें भी पढ़ीं, जिसे पहले पढ़ नहीं पाया था।

पढ़ने का शौक पूरा हो रहा : डॉ. वानी

दक्षिणी कश्मीर के पुलवामा जिले के डॉ. इम्तियाज वानी निजी कॉलेज में उर्दू साहित्य के लेक्चरर हैं। साहित्य पढ़ना शौक है। लॉकडाउन हुआ तो यह शौक पूरा करने का मौका मिल गया।

बच्चों के लिए किताब लिख रहे नजीर

वरिष्ठ कवि, साहित्यकार व साहित्य अकादमी के युवा पुरस्कार से सम्मानित सागर नजीर ने कहा, मैं जूनमोज नाम से बच्चों के लिए किताब लिख रहा हूं। यह कितब पिछले साल लिखनी शुरू की थी। छोटी सी किताब है 100-170 पन्नों की। पिछले साल 60 पन्ने ही लिख पाया था। इस साल एक महीने के दौरान मेरी यह किताब मुकम्मल होने जा रही है। मैं इस किताब को अंतिम रूप दे रहा हूं। लॉकडाउन खत्म होते ही इसे प्रिंट के लिए भेज दूंगा। सागर ने कहा, लॉकडाउन के चलते साहित्य गतिविधियां ठप पड़ी हुई हैं। ऐसे में मुङो अपनी यह अधूरी किताब मुकम्मल करने का अच्छा मौका मिला।

अच्छा लिखने के लिए पढ़ना बहुत जरूरी: राही

वादी के वरिष्ठ कवि, साहित्यकार व ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित प्रो. रहमान राही ने कहा, एक साहित्यकार व कवि तब तक एक अच्छा साहित्यकार या कवि नहीं बन सकता जब तक वह अन्य साहित्यकारों व कवियों के लेख न पढ़े, इन पर शोध न करे। मैं भी आजकल यही कर रहा हूं। मैं अपनी वादी के मशहूर कवियों जिनमें रसूल मीर, महजूर, हब्बा खातून, ललदेद के साथ उर्दू के नामी शायरों फैज अहमद फैज, बशीर बद्र, अहमद फराज की कविताएं पढ़ता हूं। लॉकडाउन के बीच वक्त बहुत अच्छे से कटता है। लॉकडाउन हमारे बचाव के लिए ही है। हमें इसका पूरी तरह से पालन करना चाहिए और हम अगर कोशिश करें तो इसका भरपूर फायदा उठा शौक पूरे कर सकते हैं।

 

Posted By: Rahul Sharma

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस