जम्मू, ललित कुमार। जम्मू से करीब 45 किलोमीटर दूर स्थित मानसर व उससे करीब 27 किलोमीटर दूर स्थित सुरुईंसर झील की धार्मिक मान्यता होने के कारण एक साल पहले तक सालाना एक से दो लाख श्रद्धालु-पर्यटक ही यहां पहुंचते थे। इन झीलों के सौंदर्य को पर्यटन मानचित्र पर लाने के लिए यहां मूलभूत ढांचा भी तैयार किया गया, लेकिन इसका उचित प्रचार न होने के कारण यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हो पाई। अब यहां पर्यटकों को लाने के लिए पर्यटन विभाग विशेष प्रयास कर रहा है।

इको-टूरिज्म को दिया जा रहा बढ़ावा : स्थानीय व बाहरी राज्यों के पर्यटकों को जम्मू के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल मानसर की तरफ आकर्षित करने के लिए पर्यटन विभाग ने इसे इको-टूरिज्म का केंद्र बनाने का फैसला किया है। पर्यटन विभाग जम्मू की ओर से जम्मू-कश्मीर वन्यजीव संरक्षण विभाग व सुरुईंसर-मानसर डेवलपमेंट अथारिटी के सहयोग से पांच जून 2019 को यहां इको-टूरिज्म के तहत कार्यक्रम आयोजित भी किया गया था। इसमें पर्यटकों को झील का भ्रमण करवाने के साथ उन्हें बैटरी कार की सैर भी करवाई गई।

पर्यटकों को इस झील की विशेषता व इतिहास की जानकारी देने के लिए विभाग के गाइड पर्यटकों के साथ उपलब्ध रहे। पर्यटकों को स्थानीय संस्कृति से रूबरू करवाने के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रमों भी हुआ। इसकी खास बात यह रही कि यहां पर पारंपरिक व्यंजनों के स्टाल लगाए गए और रोटी पत्तों के डूनों व पत्तल में परोसी गई, ताकि पर्यटकों को स्थानीय संस्कृति के बारे में जागरूक किया जा सके।

छोटे-छोटे प्रयास से मिल रही सफलता : मानसर- सुरुईंसर डेवलपमेंट अथॉरिटी ने वर्ष 2018 में इन झीलों का प्रचार शुरू किया और पर्यटकों के अलावा जम्मू के स्थानीय युवाओं को इनकी ओर आकर्षित करने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन शुरू किया। उसी का नतीजा था कि वर्ष 2018 में 10 लाख 77 हजार पर्यटक इन झीलों की सैर करने पहुंचे। इससे पहले वर्ष 2017 में यह संख्या 5 लाख 54 हजार थी। अथॉरिटी के यह प्रयास लगातार जारी है। ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि यह संख्या इस साल और बढ़ेगी।

हेरिटेज ट्रैकिंग का बन सकता है केंद्र : सुरुईंसर-मानसर डेवलपमेंट अथारिटी की ओर से मानसर से माहौरगढ़ के लिए हेरिटेज ट्रैकिंग का सफल ट्रायल किया जा चुका है। इस क्षेत्र में ट्रैकिंग की आपार संभावनाएं हैं। अगर इन्हें सही ढंग से प्रोत्साहित किया जाए तो यह जम्मू में ट्रैकिंग का केंद्र बन सकता है। मानसर से माहौरगढ़ तक के पारंपरिक रूट को ट्रैकिंग के रूप में पेश किया जा सकता है। मानसर झील से माहौरगढ़ तक का ट्रैक पांच किलोमीटर लंबा है। पूरा रास्ता प्राकृतिक सौंदर्य से भरा पड़ा है और ऊंचाई से क्षेत्र की खूबसूरती निहारी जा सकती है। ऊंचाई से नीली मानसर झील का नजारा साफ नजर आता है। इस ट्रैक पर प्राकृतिक खूबसूरती कूट-कूट कर भरी है जिससे थकावट का अहसास नहीं होता।

किले का हो जीर्णोद्धार : माहौरगढ़ के ऐतिहासिक किले के नाम पर आज वहां केवल प्रवेश द्वार व साथ लगती दीवार ही शेष बची है। किले के प्रवेश द्वार व दीवार से ही इस किले के शौर्य का अंदाजा लग जाता है। अगर किले का जीर्णोद्धार किया जाए तो यह किला यहां आने वाले पर्यटकों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र साबित हो सकता है।

Posted By: Rahul Sharma

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