जम्मू, राज्य ब्यूरो। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। दो सप्ताह में दो पूर्व मंत्रियों के साथ छोड़ने के बाद शुक्रवार को एक और पूर्व विधायक आबिद अंसारी ने पार्टी को अलविदा कह दिया। ऐसे में पीडीपी के बिखर रहे कुनबे को एकजुट रखने की महबूबा की कोशिशों को एक और झटका लगा है।

इसी वर्ष जून में भाजपा-पीडीपी की गठबंधन सरकार गिरने के बाद से पीडीपी में अंतर्कलह बढ़ती जा रही है। पीडीपी अध्यक्ष महबूबा पर उनकी पार्टी के वरिष्ठ नेता परिवारवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाने के साथ उन्हें एक अक्षम नेता भी करार दे रहे हैं। पार्टी में विभाजन को टालने के लिए ही महबूबा ने कांग्रेस और नेकां के साथ मिलकर गठबंधन सरकार बनाने का प्रयास किया था, जो नाकाम रहा और विधानसभा भंग हो गई।

विधानसभा भंग होने पर लग रहा था कि पीडीपी घाटे में नहीं रही, बल्कि एक तरह से उसकी जीत हुई है, क्योंकि उसका टूट रहा कुनबा बच गया है, लेकिन समय बीतने के साथ उनकी जमात में विभाजन गहराने के साथ ही कई पुराने नेता उनका साथ छोड़ रहे हैं।

महबूबा को सबसे पहला झटका पट्टन से विधायक, पूर्व मंत्री और शिया नेता इमरान रजा अंसारी ने देते हुए पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के चेयरमैन सज्जाद गनी लोन का दामन थाम लिया। महबूबा ने इस झटके से उभरने का प्रयास करते हुए पीडीपी के संस्थापकों में शामिल मुजफ्फर हुसैन बेग जो इस समय उत्तरी कश्मीर के सांसद भी हैं, को मनाने के लिए उनके घर जाकर उनसे मुलाकात की।

उन्होंने बेग और उनकी पत्नी सफीना की नाराजगी दूर करने का प्रयास करते हुए उनकी सभी शर्तें को मानने का भी यकीन दिलाया। लेकिन उनका यह प्रयास अभी तक कामयाब होते नजर नहीं आया है, क्योंकि बेग ने उन्हें किसी तरह का जवाब नहीं दिया है और वह आज महबूबा द्वारा बुलाई गई एक बैठक में भी शामिल नहीं हुए। हालांकि महबूबा ने उन्हें निजी तौर पर फोन किया था।

महबूबा ने दो दिन पहले पूर्व वित्तमंत्री डॉ. हसीब द्राबू के साथ भी कथित तौर पर संपर्क कर उन्हें बैठक के लिए बुलाया था, लेकिन द्राबू ने उनके फोन पर कोई सकारात्मक रुख नहीं अपनाया और गत रोज उन्होंने पीडीपी को अलविदा बोलने के साथ ही सोशल मीडिया पर अपने इस्तीफा भी वायरल कर दिया। हालांकि उन्होंने महबूबा की कोई आलोचना नहीं की, लेकिन उन्होंने यह लिखकर सबकुछ साफ कर दिया कि जिसके नेतृत्व में चुनाव लड़ा और जीता हो, उसके खिलाफ हंगामा करना नैतिकता नहीं।

इस बीच, नाराज चल रहे श्रीनगर के जडीबल से पूर्व विधायक आबिद अंसारी ने पीडीपी से हर नाता तोड़ने का एलान कर दिया है। उन्होंने कहा कि बेशक मैंने अपना इस्तीफा सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन मैंने पीडीपी से हर नाता तोड़ लिया है। पीडीपी अध्यक्ष ने दक्षिण कश्मीर से एक पूर्व विधायक अब्दुल मजीद पडर और गुलमर्ग के पूर्व विधायक अब्बास वानी को मनाने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने भी उन्हें कोई सकारात्मक जवाब नहीं दिया है।

बेग समर्थक नहीं ले रहे पार्टी की बैठकों में हिस्सा 
पीडीपी के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार, बेशक मुजफ्फर हुसैन अभी पीडीपी में ही हैं, लेकिन उत्तरी कश्मीर में पीडीपी की अधिकांश इकाइयों में विभाजन नजर आ रहा है। बेग समर्थक किसी भी बैठक में हिस्सा नहीं ले रहे हैं। दक्षिण कश्मीर जोकि पीडीपी का मजबूत गढ़ माना जाता है, वहां महबूबा ने पिछले दिनों एक बैठक के आयोजन का मन बनाया था, लेकिन स्थानीय कार्यकर्ताओं के एक वर्ग विशेष के हंगामे की आशंका के चलते यह आयोजन रद हो गया था।

 

Posted By: Arun Kumar Singh