श्रीनगर, नवीन नवाज : जम्मू कश्मीर की सियासत में महाराजा हरि सिंह हमेशा बहस का केंद्र रहे हैं। हरेक कोई अपनी सियासी विचारधारा के आधार पर उनका विरोध या समर्थन करता है, लेकिन कोई भी जम्मू-कश्मीर को एक विकसित राज्य बनाने के उनके योगदान का जिक्र नहीं करता, कश्मीर के वरिष्ठ साहित्यकार हसरत गड्डा ने कहा।

इंसान को इंसान एक ही चीज बनाती है और वह है-शिक्षा। यहां कुछ स्कूलों को जबरी स्कूल कहते हैं। मेरे जैसे कई बढ़ों से बात करोगे तो पता चलेगा कि यह जबरी स्कूल क्या होते हैं। महाराजा हरि सिंह पूरे प्रदेश में प्राथमिक शिक्षा काे अनिवार्य बनाते हुए 1931 में सभी वर्गाें के लिए स्कूल, कालेज खोले। किसी को भी जाति या उसके मजहब के आधार पर स्कूल व कालेज में पढ़ाई से नहीं रोका जा सकता था।

हसरत गड्डा ने कहा कि महाराजा हरि सिंह ने कश्मीर में जब प्राथमिक शिक्षा अनिवार्य बनाई तो कईं मां-बाप अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजते थे। लोग गरीब थे। मुस्लिम वर्ग में ही अशिक्षा सबसे ज्यादा थी। महाराजा के आदेश पर सभी छोटे बच्चों को उनके इलाके में स्थित प्राथमिक स्कूलों में जबरन भर्ती किया गया। उनके लिए वजीफा भी लगाया गया। इसके अलावा उन्होंने छात्रों के लिए 500 छात्रवृत्तियां भी शुरु की थी। कश्मीर के कई नामी नेता और नौकरशाह इन्हीं जबरी स्कूलों की देन हैं।

उम्र के करीब 90 वसंत पार कर चुके डाउन टाउन में रहने वाले एक बुजुर्ग मोहम्मद युसुफ खान ने कहा कि हम पंरपरागत रूप से दस्तकार हैं। मुझे याद है कि एक दिन मेरे माता-पिता मुझे जबरदस्ती स्कूल ले गए। उन्हें डर था कि महाराजा के लोगों को अगर पता चल गया कि मुझे स्कूल नहीं भेजा जा रहा है तो दंड मिलेगा। स्कूल प्रशासन ने मुझे एक कमीज और पाजामा दिया। इसके अलावा मुझे एक रूपया वजीफा भी मिला। इंग्लैंड में प्रकाशित पुस्तकें और कापियां मुफ्त मिली। इसलिए महाराजा ने जो स्कूल उस समय शुरु किए थे, उन्हें जबरी स्कूल कहते हैं। महाराजा हरि सिह ने ही कश्मीरी मुस्लिमों में शिक्षा की लौ जगाई थी।

जम्मू कश्मीर मामलों के विशेषज्ञ प्रो हरि ओम ने कहा कि महाराजा हरि सिंह के समय जम्मू कश्मीर में प्राथमिक स्कूलों की संख्या लगभग 21 हजार थी। उन्होंने जम्मू कश्मीर में शिक्षा को निशुल्क और सभी के लिए अनिवार्य बनाया था। 

Edited By: Rahul Sharma