जम्मू, जागरण संवाददाता : ज्योतिष शास्त्र के दृष्टिकोण से चतुर्दशी तिथि के स्वामी भगवान भोलेनाथ अर्थात स्वयं शिव ही हैं।धर्मग्रंथों के अनुसार फाल्गुन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महादेव शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए थे। जिस दिन ये घटना घटी, उस दिन को महाशिवरात्रि के नाम से जाना जाता है। लेकिन तब से हर माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी के दिन मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है।

माघ मासिक शिवरात्रि पर्व के विषय में श्री कैलख ज्योतिष एवं वैदिक संस्थान ट्रस्ट के अध्यक्ष ज्योतिषाचार्य महंत रोहित शास्त्री ने बताया कि इस वर्ष माघ मासिक शिवरात्रि 30 जनवरी रविवार को मनाई जाएगी। इस दिन सुबह से ही शिव मंदिरों में शिव भक्त जुटने लगते हैं। वर्तमान में कोरोना महामारी के चलते घर में ही पार्थिव शिवलिंग बनाकर शिव पूजन करें। इसी दिन भगवान शिव को समर्पित प्रदोष व्रत भी है।इस कारण इस तिथि का महत्व भी कहीं ज्यादा बढ़ गया है।

यह रहेगा समय, शुभ मुहूर्त में करें पूजा : माघ कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 30 जनवरी शाम 05 बजकर 29 मिनट पर शुरू होगी और जो अगले दिन 31 जनवरी 2022 सोमवार को दोपहर 02 बजकर 19 मिनट पर समाप्त होगी। चूंकि मासिक शिवरात्रि की पूजा में रात्रि पूजन का विशेष महत्व होता है। मासिक शिवरात्रि पूजन शुभ मुहूर्त 30 जनवरी रविवार रात्रि को ही प्राप्त हो रहा है और सोमवार दोपहर 02 बजकर 19 मिनट के बाद अमावस्या तिथि शुरू हो जाएगी। धर्मग्रंथों के अनुसार मासिक शिवरात्रि की पूजा रात्रि के समय की जाती है। इसलिए चतुर्दशी की तिथि रात्रि 30 जनवरी को प्राप्त हो रही है। इसलिए मासिक शिवरात्रि का पर्व 30 जनवरी रविवार को ही मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार मासिक शिवरात्रि रात्रि पूजा का शुभ मुहूर्त 30 जनवरी, रविवार को रात 11 बजकर 57 मिनट से शुरू होगा और देर रात 12 बजकर 51 मिनट तक रहेगा। विधिपूर्वक व्रत रखने पर गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद, फूल, शुद्ध वस्त्र, बिल्व पत्र, धूप, दीप, नैवेध, चंदन का लेप, ऋतुफल, आक धतूरे के पुष्प, चावल आदि डालकर शिवलिंग को अर्पित किये जाते है।

सभी पापों का श्रय करने वाली है शिव पूजा : मास शिवरात्रि के दिन शिव पूजन शिवपुराण, रुद्राभिषेक, शिव कथा, शिव स्तोत्रों व ॐ नम: शिवाय का पाठ करते हुए रात्रि जागरण करने से अश्वमेघ यज्ञ के समान फल प्राप्त होता हैं और शिवरात्रि का व्रत करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। शिव पूजा सभी पापों का क्षय करने वाली है।

महिलाओं के लिए है विशेष महत्व : महिलाओं के लिए शिवरात्रि का विशेष महत्व है। अविवाहित महिलाएं भगवान शिव से प्रार्थना करती हैं कि उन्हें उनके जैसा ही पति मिले।वहीं विवाहित महिलाएं अपने पति और परिवार के लिए मंगल कामना करती हैं। मासिक शिवरात्रि के व्रत को रखने वालों को उपवास के पूरे दिन भगवान शिव शंकर का ध्यान करना चाहिए। प्रात: स्नान करने के बाद भस्म का तिलक कर रुद्राक्ष की माला धारण की जाती है। शिव की अराधना इच्छा-शक्ति को मजबूत करती है और अन्तःकरण में अदम्य साहस व दृढ़ता का संचार करती है। इस बात का खास ध्यान रखना चाहिए कि भोलेनाथ पर चढ़ाया गया प्रसाद न खाएं। अगर शिव की मूर्ति के पास शालीग्राम हो, तो प्रसाद खाने में कोई दोष नहीं होता। 

Edited By: Rahul Sharma