लद्दाख घूमने वालों के लिए खुशखबरी, 10,600 फीट पर खुला दुनिया का सबसे ऊंचा ट्विन फ्लावर फील्ड; देखें मनमोहक तस्वीरें
लेह में दुनिया के सबसे ऊंचे ट्विन फ्लावर फील्ड्स का उद्घाटन किया गया, जो 10,600 फीट की ऊंचाई पर 40 ...और पढ़ें

LG सक्सेना ने लेह में दुनिया के सबसे ऊंचे ट्विन फ्लावर फील्ड्स का उद्घाटन किया।
HighLights
लेह में 10,600 फीट पर दुनिया के सबसे ऊंचे फूल खेत खुले।
40 एकड़ में 25 लाख से अधिक लिलीयम और ग्लैडियोलस फूल।
वाणिज्यिक फूलों की खेती से किसानों की आय और रोजगार बढ़ेगा।
डिजिटल डेस्क, जम्मू। लेह में आज दुनिया के सबसे ऊंचे ट्विन फ्लावर फील्ड्स का उद्घाटन किया गया। लेफ्टिनेंट गवर्नर श्री विनय कुमार सक्सेना ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के मौके पर उद्घाटन किया। लेह में चोगलमसर और स्टकना में 10,600 फीट की ऊंचाई पर स्थित ये दो फूलों के खेत न केवल दुनिया में सबसे ऊंचे हैं, बल्कि देश के सबसे ऊंचे और सबसे बड़े फूलों के खेत भी हैं।
40 एकड़ में फैले इन खेतों में 25 लाख से ज़्यादा कीमती फूल हैं, जिनमें 24 लाख लिलीयम और 1 लाख ग्लैडियोलस शामिल हैं। लेह में इतनी ऊंचाई पर इस तरह का और इतने बड़े पैमाने पर यह पहला प्रयोग है और इसके सफल क्रियान्वयन ने लद्दाख के अन्य हिस्सों में भी इस मॉडल को अपनाने का रास्ता साफ कर दिया है। तस्वीरों में देखिए इनकी खूबसूरती...

इन ट्विन फ्लावर फील्ड्स का विकास लद्दाख में कमर्शियल फ्लोरीकल्चर के जरिए खेती में विविधता लाने, किसानों को सशक्त बनाने और आजीविका के नए अवसर पैदा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

दिलचस्प बात यह है कि चोगलमसर में फूलों का खेत रिकॉर्ड समय में यानी सिर्फ़ दो महीनों में तैयार किया गया है। चोगलमसर में पौधे लगाने का काम 16 जुलाई को शुरू हुआ और सितंबर के पहले हफ़्ते में पहली बार फूल खिले।

स्टकना फ्लावर फील्ड में लगभग 14 लाख लिलीयम के पौधे लगाने का काम अगस्त में शुरू हुआ और अक्टूबर के आखिर तक पहली बार फूल खिलने की उम्मीद है।

बाज़ार की दरों के अनुसार, लिलीयम थोक बाज़ार में 60-70 रुपये प्रति स्टिक की अच्छी कीमत पर बिकता है, जबकि खुदरा बिक्री में लिलीयम की कीमत और भी ज़्यादा होती है।

चोगलमसर फ्लावर पार्क एक डेमोंस्ट्रेशन और मॉडल फ्लोरीकल्चर सेंटर के तौर पर काम करेगा, जहां लिलीयम, ग्लैडियोलस, ट्यूलिप और सजावटी पौधों की अन्य प्रजातियों जैसी कीमती फूलों की खेती की जाएगी, जिनकी राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में भारी मांग है।

इस प्रोजेक्ट के तहत, एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट पहले साल में फूलों का खेत तैयार करेगा और फूल खिलने के समय इसे चुने हुए सेल्फ-हेल्प ग्रुप्स और कोऑपरेटिव सोसायटियों को सौंप देगा। डिपार्टमेंट ज़्यादा से ज़्यादा फ़ायदा पाने के लिए नेशनल और इंटरनेशनल मार्केट में फूलों की मार्केटिंग में SHGs और कोऑपरेटिव्स की मदद करेगा। इसके बाद, अगले साल से कोऑपरेटिव्स खुद ही लिलियम फूलों की कमर्शियल खेती, कटाई और वैल्यू एडिशन का काम संभालेंगे।

सक्सेना ने कहा, 'फ्लोरीकल्चर खेती की एक ऐसी एक्टिविटी है जिससे अच्छी कमाई होती है। यह पारंपरिक खेती के साथ मिलकर किसानों की आमदनी बढ़ा सकती है और रोज़गार व एंटरप्रेन्योरशिप के नए रास्ते खोल सकती है।'

फ़्लावर गार्डन 18 सितंबर, 2026 से आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा। इसकी सही देखभाल और रखरखाव के लिए, बड़ों के लिए ₹25 और बच्चों के लिए ₹10 की मामूली एंट्री फ़ीस तय की गई है। इससे होने वाली कमाई का इस्तेमाल गार्डन की देखभाल और रखरखाव के लिए किया जाएगा।
