लद्दाखियों ने बलिदान दिवस के रूप में मनाई लेह हिंसा की पहली बरसी, सोनम वांगचुक ने की अमित शाह के इस्तीफे की मांग
लद्दाख में लेह हिंसा की पहली बरसी बलिदान दिवस के रूप में मनाई गई, जिसमें पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक ने गृहमंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग की।
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सोनम वांगचुक ने की अमित शाह के इस्तीफे की मांग। फोटो सोशल मीडिया
HighLights
लेह हिंसा की पहली बरसी पर बलिदान दिवस मनाया गया।
सोनम वांगचुक ने गृहमंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग की।
मृतकों के परिजनों को एक करोड़ रुपये मुआवजे की मांग।
राज्य ब्यूरो, जम्मू। केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में वीरवार को बलिदान दिवस के रूप में मनाई गई लेह हिंसा की पहली बरसी पर पर्यावरणविद्ध सोनम वांगचुक ने गृहमंत्री अमित शाह को चार लद्दाखियों की मौतों का जिम्मेदार ठहराते हुए उनके इस्तीफे की मांग बुलंद की।
लद्दाख के लेह व कारगिल में बंद के बीच लेह में गत वर्ष हिंसक प्रदर्शन के दौरान पुलिस फायरिंग में मारे गए चार लोगों को श्रदांजलि दी गई। लेह के एनडीएस ग्राउंड में हुई रैली के दौरान 24 सितंबर 2025 के हिंसक प्रदर्शनों में जांच की रिपोर्ट को जारी करने के साथ मृतकों के परिजनों को उचित मुआवजा देने की मांग जोरशोर से उठी।
बलिदानियों की याद में लद्दाख बुद्धिस्ट एसोसिएशन द्वारा आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पर्यावरणविद्ध साेनम वांगचुक ने कड़े तेवर दिखाए।
गृहमंत्री का इस्तीफा मांगने वाले राहुल गांधी का समर्थन
वांगचुक ने कहा कि, आज मैं भी कहता है कि लद्दाख में निहत्थे लोगों को गोलियां मारने की जिम्मेदारी लेते हुए गृहमंत्री अमित शाह त्यागपत्र दें। वांगचुक ने कहा कि मैं जंतर मंतर पर लाठीचार्ज, पैलेट गन चलाने के विरोध में गृहमंत्री का इस्तीफा मांगने वाले राहुल गांधी का समर्थन करता हूं।
उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण, निहत्थे लद्दाखी लोगों पर एके 47 से पुलिस द्वारा गोलियां चलवाने का सारा गुनाह गृहमंत्री के सिर पर है। लेह में प्रदर्शन में पुलिस अधिकारियों का गलत इस्तेमाल किया गया। वांगचुक ने लोगों के साथ मिलकर ये नारे बुलंद किए कि अमित शाह त्यागपत्र दें।
एनडीएस ग्राउंड में रैली को लेह अपेक्स बाडी के सह अध्यक्ष छेरिंग दोरजे व अन्य पदाधिकारियों ने भी संबोधित किया। इस दौरान वक्ताओं ने लेह में गत वर्ष हुई मौतों का सच सामने लाने के साथ प्रशासन द्वारा मृतकों के परिजनों के लिए घोषित पंद्रह लाख के मुआवजे को अनुचित करार देते हुए उन्हें एक-एक करोड़ रूपये का मुआवजा देने की मांग उठाई।
वक्ताओं का कहना है कि केंद्र सरकार लद्दाख के लोगों की उम्मीदों से खिलवाड़ ने करे। इससे पहले बुधवार को लेह हिंसा के मृतकों की याद में पद्यात्रा का भी आयोजन किया गया है। इसका नेतृत्व पर्यावरणविद्ध साेनम वांगचुक ने किया था।
प्रदर्शन ने ले लिया था उग्र रूप
लद्दाख के लेह जिले में गत वर्ष 24 सितंबर को राज्य दर्जे, संविधान की छठी अनुसूची के तहत विशेष संवैधानिक सुरक्षा व क्षेत्र के लिए जनजातीय दर्जे सहित विभिन्न मांगों को लेकर हुए प्रदर्शन ने उग्र रूप ले लिया था।
जलवायु कार्यकर्ता और शिक्षाविद् सोनम वांगचुक ने 10 सितंबर 2025 को लेह में भूख हड़ताल शुरू की थी। इसके बाद 24 सितंबर 2025 को लेह में स्थिति उस समय गंभीर हो गई, जब भाजपा कार्यालय व लेह स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद परिसर के बाहर प्रदर्शन हिंसक हो गया था। प्रदर्शनकारियों व सुरक्षा बलों के बीच झड़प के दौरान सुरक्षा बलों ने गोलीबारी की।
इस गोलीबारी में चार नागरिकों की मौत हो गई थी जबकि हिसंक प्रदर्शन में पुलिस, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के कई जवान, लोग घायल हुए थे। पुलिस की गोलीबारी में मारे गए लोगों में सिवांग थारचिन, जिग्मित दोरजे, स्टेंजिन नामग्याल व रिंचेन ददूल के रूप में हुई। सिवांग थारचिन कारगिल युद्ध के पूर्व सैनिक थे।
पीड़ित परिवारों के लिए बेहतर मुआवजे की मांग
घटना के बाद केंद्र सरकार और लद्दाख प्रशासन की ओर से स्थिति बिगड़ने के लिए कथित रूप से भड़काऊ बयानों को जिम्मेदार ठहराया गया। इसके बाद सोनम वांगचुक को गिरफ्तार किया गया। घटना ने पूरे लद्दाख में व्यापक प्रतिक्रिया पैदा की व स्थानीय नागरिक संगठनों ने मामले की व्यापक जांच तथा पीड़ित परिवारों के लिए बेहतर मुआवजे की मांग उठाई।
लेह एपेक्स बाडी व कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस ने घटना की निष्पक्ष और व्यापक जांच की मांग को प्रमुखता से उठाया। दोनों संगठनों ने लंबे समय से लंबित संवैधानिक और राजनीतिक मांगों के समाधान के साथ-साथ मृतकों के परिवारों को उचित मुआवजा देने की मांग भी की। घटना के बाद प्रशासन ने परिस्थितियों और हिंसा के कारणों की जांच के लिए मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए थे।
