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लद्दाख में ग्लेशियरों की बर्फ और बारिश के पानी के संरक्षण से दूर होगा जल संकट, 50 जलाशय बनाए जाएंगे

By Vivek Singh Edited By: Rahul Sharma
Published: Sat, 11 Apr 2026 12:18 PM (IST)

लद्दाख में जल संरक्षण हेतु 'हिम सरोवर' अभियान शुरू हुआ है। इसके तहत लेह और कारगिल जिलों में 50 जलाशय ...और पढ़ें

उपराजपाल विनय कुमार सक्सेना ने की पहल, भारतीय सेना और आईटीबीपी का सहयोग।

उपराजपाल विनय कुमार सक्सेना ने की पहल, भारतीय सेना और आईटीबीपी का सहयोग।

HighLights

  1. लद्दाख में 50 नए जलाशय बनाए जाएंगे।

  2. ग्लेशियर और बारिश का पानी संरक्षित होगा।

  3. बंजर भूमि को खेती योग्य बनाया जाएगा।

राज्य ब्यूरो, लद्दाख। लद्दाख में ग्लेशियरों की बर्फ और बारिश के पानी को जलाशयों में संरक्षित कर उसे सिंचाई व अन्य जरूरतों के लिए इस्तेमाल करने का अभियान शुरू किया गया है।

जल संरक्षण के इस अभियान में लेह व कारगिल जिलों में 50 जलाशय बनाए जाएंगे। यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विजन के अनुरूप है जिसमें वर्ष 2030 तक देश में 2.6 करोड़ हेक्टेयर बंजर भूमि को हरा भरा करने का लक्ष्य रखा गया है। उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने शुक्रवार को लेह में प्रोजेक्ट हिम सरोवर से जलाशय बनाने का अभियान शुरू किया।

यह जलाशय 40 मीटर लंबे, 30 मीटर चौड़े व लगभग दो मीटर गहरे होंगे। इन्हें इस तरह से डिजाइन किया जाएगा कि विशेष रूप से बर्फ व ग्लेशियर के पिघलने वाला पानी उनमें एकत्र हो सके। लद्दाख में हर साल बड़ी मात्रा में यह पानी बिना इस्तेमाल के बह जाता है।

भूस्खलन को रोकने में भी मदद मिलेगी

अब जलाशयों में संरक्षित किए जाने वाला पानी लेह व कारगिल जिलों के दूरदराज के गांवों में लोगों की जरूरतों को पूरा करेगा। इसके साथ जलाशय बनने से बारिश से क्षेत्र में होने वाले भूस्खलन को रोकने में भी मदद मिलेगी। इस पहल को भारतीय सेना, आईटीबीपी व सीमा सड़क संगठन के सहयोग से पूरा किया जाना है।

उपराज्यपाल सक्सेना ने हिम सरोवर को एक ऐतिहासिक पहल बताया। कहा, यह प्रोजेक्ट लद्दाख में बंजर भूमि को खेती लायक बनाने के लिए अहम साबित होगा। सभी जलाशय वैज्ञानिक तरीके से तैयार किए जा रहे हैं। ये किफायती होने के साथ-साथ पारंपरिक जल संरक्षण तकनीकों पर आधारित हैं। लद्दाख जैसे ठंडे रेगिस्तानी क्षेत्र में यह माडल विशेष रूप से प्रभावी साबित होगा।

पहले चरण में लद्दाख के लगभग 25 प्रतिशत गांवों को इस योजना से जोड़ा जा चुका है। सामूहिक प्रयासों से अगले एक वर्ष में कम से कम 100 गांवों को इस परियोजना के दायरे में लाने का लक्ष्य रखा गया है।