लद्दाख में गांवों के मुखियाओं की बल्ले-बल्ले, मानदेय में 233% से ज्यादा इजाफा; अब हर महीने मिलेंगे 5000 रुपये
लद्दाख में गांव के मुखियाओं का मासिक मानदेय ₹1,500 से बढ़ाकर ₹5,000 कर दिया गया है, जो 233% से अधिक ...और पढ़ें

लद्दाख के गांव के मुखियाओं का मानदेय 233% बढ़ा। (फाइल फोटो)
HighLights
लद्दाख के गांव मुखियाओं का मासिक मानदेय ₹1,500 से ₹5,000 हुआ।
मानदेय में 233% से अधिक की बढ़ोतरी, 247 मुखियाओं को लाभ।
उप-राज्यपाल की मंजूरी से जमीनी स्तर पर शासन मजबूत होगा।
डिजिटल डेस्क, जम्मू। केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में गांव के मुखियाओं के मासिक मानदेय में बढ़ोतरी की गई है। अब उन्हें हर महीने 1,500 रुपये की जगह 5,000 रुपये मानदेय मिलेगा। उप-राज्यपाल विनय कुमार सक्सेना की मंजूरी के बाद यह फैसला लिया गया है।
संशोधित मानदेय जम्मू और कश्मीर लंबरदारी अधिनियम, 1972 और जम्मू और कश्मीर लंबरदारी नियम, 1980 के प्रावधानों के तहत तय किया गया है, जो लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश पर लागू होते हैं। बता दें कि लद्दाख में गांव के मुखियाओं को स्थानीय भाषा में 'गोबा' (gobas) कहा जाता है।
अधिकारियों ने बताया कि मानदेय में 233 प्रतिशत से ज़्यादा की यह बढ़ोतरी पिछले 10 साल में पहली बार की गई है, जिससे पूरे लद्दाख में 247 मुखियाओं को फ़ायदा होगा। उप-राज्यपाल ने कहा कि इस फ़ैसले से गांव के मुखियाओं को ज़्यादा आर्थिक मदद मिलेगी और ज़मीनी स्तर पर खासकर दूर-दराज और मुश्किल इलाकों में लोगों की भागीदारी वाली शासन व्यवस्था मज़बूत होगी।
LG को मिले ज्ञापन
अधिकारियों ने बताया कि यह फ़ैसला लंबे समय से चली आ रही मानदेय बढ़ाने की मांग के बाद लिया गया है। लद्दाख के गांवों के दौरे के दौरान, सक्सेना को इस मुद्दे पर ज्ञापन मिले थे। 19 सितंबर को, अलग-अलग गांवों के नंबरदारों के एक प्रतिनिधिमंडल ने भी LG से मुलाकात की और अपनी ज़िम्मेदारियों और मौजूदा मानदेय की अपर्याप्तता का हवाला देते हुए इसमें बढ़ोतरी की मांग की।
LG ने स्थानीय मुद्दों को उजागर करने में मुखियाओं द्वारा निभाई गई सक्रिय भूमिका पर भी ध्यान दिया। उन्होंने कहा, 'उनके द्वारा गांवों में शुरू की गई पहलों के माध्यम से पानी से संबंधित कई मुद्दों का समाधान मुखियाओं द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर किया गया था।
1,500 से बढ़ाकर 5,000 रुपये
सक्सेना ने कहा, 'मुखियाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है क्योंकि वे लोगों के साथ निकटता से जुड़े रहते हैं और प्रशासन तथा हमारे गांवों के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम करते हैं। 1,500 रुपये से बढ़ाकर 5,000 रुपये प्रति माह करने का निर्णय उनकी ज़िम्मेदारियों और लंबे समय से चली आ रही मांग को मान्यता देता है।
उन्होंने कहा, 'मुझे विश्वास है कि यह कदम उनकी भूमिका को और मजबूत करेगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि विकास कार्यक्रम, कल्याणकारी योजनाएं और सरकारी सेवाएं हर घर तक समय पर और प्रभावी ढंग से पहुंचें, साथ ही सहभागी शासन को और मजबूत किया जा सके।'
(समाचार एजेंसी पीटीआई के माध्यम से)
