लद्दाख वालों के लिए खुशखबरी! हैंडलूम और हैंडीक्राफ्ट सीखने वालों का स्टाइपेंड बढ़ा, 1,000 युवाओं को फायदा
लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने हैंडलूम और हैंडीक्राफ्ट प्रशिक्षणार्थियों के स्टाइपेंड में 275% की बढ़ोतरी की है। इस फैसले से करीब 1,000 प्रशिक्षुओं को लाभ मिलेगा।

लद्दाख में हैंडलूम-हैंडीक्राफ्ट सीख रहे युवाओं का स्टाइपेंड बढ़ा। (फाइल फोटो)
HighLights
लद्दाख में हैंडलूम-हैंडीक्राफ्ट प्रशिक्षुओं का स्टाइपेंड 275% बढ़ा।
प्रशिक्षणार्थियों को अब प्रतिदिन 40 की जगह 150 रुपये मिलेंगे।
यह बढ़ोतरी लगभग 1,000 स्थानीय कारीगरों को सशक्त करेगी।
राज्य ब्यूरो, जम्मू। केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने युवाओं और स्थानीय कारीगरों को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए हैंडलूम व हैंडीक्राफ्ट प्रशिक्षण केंद्रों में प्रशिक्षण ले रहे प्रशिक्षुओं के स्टाइपेंड में 275 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। अब प्रशिक्षणार्थियों को पहर रोज 40 रुपये की जगह 150 रुपये मिलेंगे।
उपराज्यपाल प्रशासन के इस कदम से लद्दाख के करीब 1,000 प्रशिक्षु कारीगरों को लाभ मिलेगा। यह फैसला पारंपरिक हुनर को आजीविका का बेहतर साधन बनाने की दिशा में एक पहल है।
उपराज्यपाल के जून महीने में पूर्वी लद्दाख के हनले स्थित एक प्रशिक्षण केंद्र के दौरे के दौरान यह मुद्दा सामने आया था। इसके बाद उपराज्यपाल ने एक समीक्षा बैठक में संबंधित विभाग को प्रशिक्षणार्थियों के वजीफे को बढ़ाकर 150 रुपये प्रतिदिन करने की व्यवहार्यता तलाशने के निर्देश दिए गए थे।
हुनर सीखने वालों को मिलेगी राहत
इस दिशा में साकारात्मक कदम उठाते हुए स्टाइपेंड बढ़ाने का फैसला कर दिया गया है। इससे उन प्रशिक्षणार्थियों को सीधा लाभ मिलेगा जाे लद्दाख में कालीन निर्माण, पाबू जूता निर्माण, लकड़ी की नक्काशी, बुनाई, निटिंग व सिलाई जैसे पारंपरिक हुनर सीख रहे हैं।
उपराज्यपाल का कहना है कि स्टाइपेंड में यह बढ़ोतरी प्रशिक्षणार्थियों को आर्थिक सहायता प्रदान करने के साथ-साथ अधिक युवाओं को पारंपरिक शिल्प से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित करेगी। इससे हैंडलूम व हस्तशिल्प क्षेत्र को युवाओं के लिए व्यवहारिक, टिकाऊ व आकर्षक आजीविका का विकल्प बनाने में मदद मिलेगी।
पारंपरिक शिल्प को मिलेगा बढ़ावा
उपराज्यपाल का कहना है कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्थानीय कारीगरों को सशक्त बनाने, पारंपरिक शिल्प को बढ़ावा देने व आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के आह्वान से प्रेरित है। पारंपरिक कला एवं शिल्प को आर्थिक रूप से मजबूत करने से लद्दाख की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
