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लद्दाख में उगेगा 'लाल सोना', लेह में पहली बार 90 हजार ईरानी केसर के कॉर्म लगाए; LG ने बताया पूरा प्लान

Published: Fri, 02 Oct 2026 02:04 PM (IST)

लद्दाख में 'प्रोजेक्ट हिम सरोवर' के तहत पहली बार बंजर जमीन पर प्रीमियम ईरानी केसर की खेती शुरू की गई ...और पढ़ें

लद्दाख में केसर की खेती का नया अध्याय शुरू।

लद्दाख में केसर की खेती का नया अध्याय शुरू।

HighLights

  1. लद्दाख में 'प्रोजेक्ट हिम सरोवर' के तहत केसर की खेती शुरू।

  2. 4000 वर्ग मीटर बंजर भूमि पर ईरानी केसर के कॉर्म लगाए गए।

  3. उप-राज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने कृषि विविधता को बढ़ावा दिया।

डिजिटल डेस्क, जम्मू। लेह में तीन महीने पहले तक जो जमीन बंजर पड़ी थी, अब उसी पर लद्दाख की ठंडी जमीन में पहली बार प्रीमियम केसर उगाने की तैयारी हो रही है। करीब 4000 वर्ग मीटर जमीन पर प्रीमियम ईरानी केसर के लगभग 800 किलोग्राम कॉर्म लगाए गए हैं। इनकी संख्या करीब 90 हजार है। खास बात यह है कि 'प्रोजेक्ट हिम सरोवर' के तहत इस बंजर जमीन को दोबारा खेती के लायक बनाया गया है।

लद्दाख में लिली के फूलों की खेती की सफलता के बाद अब ठंडे रेगिस्तान में केसर की खेती का प्रयोग शुरू किया गया है। उप-राज्यपाल विनय कुमार सक्सेना के मार्गदर्शन में यह पहल शुरू हुई है। इसका मकसद लद्दाख में खेती के नए विकल्प तलाशना और कृषि क्षेत्र में विविधता लाना है। कृषि विशेषज्ञों को उम्मीद है कि लगाए गए केसर के कॉर्म से अच्छी मात्रा में केसर का उत्पादन हो सकता है।

ईरानी केसर के सबसे उम्दा कॉर्म लगाए गए

LG सक्सेना ने कहा कि केसर की खेती का यह पायलट प्रोजेक्ट लेह में स्पितुक फड़का के कमांड एरिया गेट नंबर 27 पर किया जा रहा है। इसके लिए उच्च गुणवत्ता वाले ईरानी केसर के कॉर्म लगाए गए हैं, जिनका घेरा 8 से 10 सेमी, व्यास 2.5 से 3 सेमी या उससे ज़्यादा और वजन 10 ग्राम या उससे ज़्यादा है। इन्हें सबसे अच्छे कॉर्म माना जाता है। ये विशेषताएँ उच्च गुणवत्ता वाले केसर के उत्पादन के लिए उपयुक्त मानी जाती हैं।

केसर की खेती में लद्दाख की अनोखी अधिक ऊंचाई वाली कृषि-जलवायु परिस्थितियों में एक और उच्च-मूल्य वाली फसल लाकर हमारी स्थानीय अर्थव्यवस्था को मज़बूत करने की अपार क्षमता है। उन्होंने कहा कि इससे यह गलत धारणा भी दूर होगी कि लद्दाख में केसर नहीं उगाया जा सकता और बंजर या खराब हो चुकी ज़मीन को फिर से ठीक नहीं किया जा सकता।

LG सक्सेना ने बताया केसर का प्लान

LG सक्सेना ने कहा, 'हमारी कोशिश खराब और बंजर जमीन को उपजाऊ ज़मीन में बदलने और किसानों के लिए नए मौके पैदा करने की है। केसर की खेती शुरू करना फसल विविधता की दिशा में एक और अहम प्रयोग है। इससे किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए एक महंगी फसल के जरिए नए रास्ते खुल सकते हैं।'

लद्दाख में केसर की खेती का क्यों हो रहा प्रयोग?

केसर एक महंगी फसल है जिसकी बाज़ार में बहुत मांग है और अच्छी कीमत मिलती है। इससे किसानों को आमदनी का एक अतिरिक्त और फायदेमंद ज़रिया मिल सकता है। भारत में केसर की खेती मुख्य रूप से जम्मू-कश्मीर में होती है, जहां देश का लगभग 90 प्रतिशत उत्पादन होता है।

लद्दाख में इसे शुरू करने का काम एक पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर किया जा रहा है, ताकि वहां के मौसम के हिसाब से इसकी उपयुक्तता का पता लगाया जा सके और इसकी आर्थिक संभावनाओं को समझा जा सके।

नहर का बेकार पानी अब आएगा काम

ध्यान देने वाली बात यह है कि केसर लगाने की जगह उस 800 एकड़ जमीन का हिस्सा है जिसे लेह में फिर से ठीक किया जा रहा है। इसके लिए पास की इगू-फे सिंचाई नहर से ताज़ा पानी लाया जा रहा है, जिसे हाल ही में ठीक करके चालू किया गया था। लेफ्टिनेंट गवर्नर के निर्देश पर, नहर के बेकार या अतिरिक्त पानी को बंजर जमीन की तरफ भेजा जा रहा है ताकि उसमें नमी बढ़ाई जा सके और उसे खेती के लायक बनाया जा सके।

इस इलाके में 'प्रोजेक्ट हिम सरोवर' के तहत पानी के चार तालाब भी हैं। ये तालाब केसर की खेती वाली जगह के पास ही बने हैं और इनकी कुल भंडारण क्षमता लगभग 24 मिलियन लीटर है।