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14 हजार फीट ऊंचे चरागाहों से दिल्ली के फैशन रैंप तक पहुंचा पश्मीना, लद्दाख के लोगों ने जीता दिल; हर तरफ हो रही तारीफ

Published: Mon, 19 Oct 2026 08:13 AM (IST)

लद्दाख के चांगथांग क्षेत्र का पश्मीना दिल्ली के फैशन रैंप पर पहुंचा, जहां 'द फिफ्थ सीजन' आयोजन में कारीगरों ने अपनी सदियों पुरानी विरासत और हुनर को प्रदर्शित किया।

फोटो एआई द्वारा जनरेट की गई है।

फोटो एआई द्वारा जनरेट की गई है।

HighLights

  1. चांगथांग का पश्मीना दिल्ली के फैशन रैंप पर पहुंचा।

  2. 'द फिफ्थ सीजन' में कारीगरों ने अपनी विरासत दिखाई।

  3. पारंपरिक शिल्प को आधुनिक डिजाइन से जोड़ने का प्रयास।

राज्य ब्यूरो, जम्मू। लद्दाख के चांगथांग क्षेत्र के करीब 14 हजार फीट ऊंचे चरागाहों से निकलकर पश्मीना की महीन चमक रविवार को जब दिल्ली के फैशन रैंप पर पहुंची, तो उसके साथ सदियों पुरानी परंपरा, स्थानीय समुदायों का हुनर और आत्मनिर्भरता की नई उम्मीदें भी सामने आईं।

लैक्मे फैशन वीक और फैशन डिजाइन काउंसिल आफ इंडिया (एफडीसीआई) के संयुक्त आयोजन में 18 अक्टूबर को प्रस्तुत ‘द फिफ्थ सीजन : ए फैशन स्टोरी फ्राम लद्दाख’ ने लद्दाख की समृद्ध वस्त्र विरासत को समकालीन फैशन के साथ जोड़ते हुए एक ऐसी कहानी पेश की, जिसके केंद्र में केवल परिधान नहीं, बल्कि उन्हें गढ़ने वाले लोग भी थे।

इस प्रस्तुति की खासियत रही चांगथांग के कारीगरों की भागीदारी। कठिन जलवायु में पाली जाने वाली स्थानीय चांगरा बकरियों से प्राप्त महीन रेशे को पश्मीना में बदलने की प्रक्रिया पशुपालकों, कताई करने वालों, बुनकरों और महिला कारीगरों के पीढ़ियों से चले आ रहे ज्ञान पर आधारित है।

रैंप पर उनकी मौजूदगी ने बताया कि पश्मीना की असली पहचान उसकी गुणवत्ता के साथ उस मानवीय मेहनत और सांस्कृतिक विरासत में भी निहित है, जो उसेविशिष्ट बनाती है।

18 परिधान पेश किए गए

लद्दाख के चार डिजाइनरों और हस्तशिल्प ब्रांडों ने इस विरासत को नए अंदाज में प्रस्तुत किया। पद्मा यांगचन के ‘नाम्जा’ ने ब्रोकेड और पश्मीना से तैयार 18 परिधानों में पारंपरिक तत्वों को आधुनिक रूप दिया।

स्टैनजिन पाल्मो के ‘जिलजोम’ ने चांगथांग के प्राकृतिक दृश्यों से प्रेरित सिल्क प्रिंट और पारंपरिक ऊनी वस्त्र ‘स्नाम्बू’ की समकालीन व्याख्या के साथ 18 परिधान पेश किए।

वहीं, डेस्किट आंग्मो के ‘चांगरा लद्दाख’ और रिगजिन यांगडोल के ‘चरखा लद्दाख’ ने हाथ से काते और बुने पश्मीना शॉलों के जरिए स्थानीय शिल्प की प्रामाणिकता प्रदर्शित की। शालिनी पासी ने ‘जिलजोम’ के डिजाइन किए गाउन में शोस्टापर के रूप में प्रस्तुति को खास बनाया, जबकि दशुग्स बैंड की लाइव संगीत प्रस्तुति ने आयोजन में लद्दाख की सांस्कृतिक रंगत भर दी।

उपराज्यपाल ने की तारीफ

लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने वर्चुअल संबोधन में इस पहल की सराहना करते हुए पारंपरिक शिल्प को आधुनिक डिजाइन, उद्यमिता और व्यापक बाजारों से जोड़ने की जरूरत पर बल दिया।

उन्होंने कहा कि पश्मीना को मिल रही पहचान का लाभ पशुपालकों, बुनकरों, कारीगरों, महिला उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों तक पहुंचना चाहिए, ताकि विरासत का संरक्षण टिकाऊ आजीविका का आधार भी बने।

उद्योग एवं वाणिज्य विभाग, केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख ने केंद्रीय एमएसएमई मंत्रालय की ‘रैम्प’ योजना और एफडीसीआई के सहयोग से इस शोकेस की पहल की। कौशल उन्नयन, साझा सुविधा केंद्रों और बेहतर उत्पादन सुविधाओं के माध्यम से स्थानीय हस्तशिल्प तथा हथकरघा उद्यमों को मजबूत करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

इस पहल का अगला पड़ाव 23 और 24 अक्टूबर को प्रस्तावित लद्दाख पश्मीना कान्क्लेव होगा। इसमें 50 से अधिक स्टाल और 100 से ज्यादा उद्यमियों व खरीदारों की भागीदारी की उम्मीद है। इसका उद्देश्य उत्पादकों और खरीदारों के बीच सीधे संपर्क तथा नए कारोबारी अवसर विकसित करना है।