लद्दाख में शराबबंदी पर क्या फैसला लेगी सरकार? 23 से बढ़कर 40 हुए बार, मुख्य सचिव का बड़ा बयान
मुख्य सचिव ने कहा कि लद्दाख में पूर्ण शराबबंदी पर निर्णय सभी सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक पहलुओं पर चर्चा के ...और पढ़ें

लद्दाख में शराब की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगाने की मांग। (फाइल फोटो)
HighLights
पूर्ण शराबबंदी पर निर्णय सभी पक्षों से चर्चा के बाद।
महिला प्रतिनिधियों ने शराब बिक्री और सेवन पर प्रतिबंध की मांग की।
मुख्य सचिव ने संतुलित नीति और हितधारकों के विचारों पर जोर दिया।
राज्य ब्यूरो, जम्मू। लद्दाख में शराब पर प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर मुख्य सचिव आशीष कुंद्रा ने मंगलवार को विभिन्न धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। मुख्य सचिव आशीष कुंद्रा ने कहा कि लद्दाख में शराबबंदी की मांग पर कोई भी निर्णय सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए और सभी पक्षों से चर्चा के बाद ही होगा। हमारा प्रयास है कि संतुलित नीति हो जो सभी की चिंताओं का समाधान करती हो।
इस दौरान महिला प्रतिनिधियों ने शराब की बिक्री और सेवन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग उठाते हुए बढ़ते बार लाइसेंस पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि शराब का बढ़ता प्रचलन क्षेत्र के सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों को प्रभावित कर सकता है।
बैठक में आबकारी आयुक्त रोमिल सिंह डोंक, आल लद्दाख गोम्पा एसोसिएशन, लद्दाख बौद्ध एसोसिएशन, अंजुमन इमामिया लेह, एएलजीएएचए, एएलटीओए तथा अन्य संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
नए लाइसेंस जारी होने के बाद बार की संख्या बढ़कर 40
अधिकारियों ने बताया कि जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए आबकारी नीति 2026-27 वापस ले ली गई है और फिलहाल 2025-26 की नीति लागू है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष शराब की दो खुदरा दुकानें संचालित थीं, जबकि इस वर्ष एक दुकान चल रही है।
वहीं, रेस्तरां से जुड़े और खुदरा बिक्री करने वाले बार की संख्या पहले 23 थी, जो 17 नए लाइसेंस जारी होने के बाद बढ़कर 40 हो गई है।
शराबबंदी पर फैसला लेने से पहले सभी पक्षों की राय जरूरी
मुख्य सचिव ने कहा कि पूर्ण शराबबंदी का मुद्दा महत्वपूर्ण है, लेकिन किसी भी निर्णय से पहले सभी हितधारकों के विचार जानना जरूरी है। उन्होंने बिहार और हरियाणा का उदाहरण देते हुए शराबबंदी के बाद नकली शराब तथा अन्य नशीले पदार्थों से जुड़ी चुनौतियों का उल्लेख किया। कुंद्रा ने पर्यटन, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर संभावित प्रभावों का आकलन करने की जरूरत भी बताई।
उन्होंने सुझाव दिया कि लद्दाख बौद्ध एसोसिएशन के अध्यक्ष सभी संबंधित पक्षों की बैठक बुलाकर सहमति बनाने की पहल करें। मुख्य सचिव ने आश्वासन दिया कि आवश्यकता पड़ने पर जल्द ही बैठक आयोजित की जाएगी।
