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लद्दाख में 60 हजार एकड़ बंजर भूमि पर लद्दाखियों को मिलेगा मालिकाना हक, LG वीके सक्सेना ने दी मंजूरी

Published: Fri, 04 Sep 2026 07:28 PM (IST)

लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने 60 हजार एकड़ सरकारी बंजर भूमि के मालिकाना अधिकार लद्दाखियों को देने का ऐतिहासिक फैसला किया है।

लद्दाखियों को 60 हजार एकड़ बंजर भूमि के मालिकाना अधिकारी देने का मार्ग प्रशस्त।

लद्दाखियों को 60 हजार एकड़ बंजर भूमि के मालिकाना अधिकारी देने का मार्ग प्रशस्त।

HighLights

  1. उपराज्यपाल ने 60 हजार एकड़ बंजर भूमि के अधिकार दिए

  2. नोतोर भूमि के नियमितीकरण से आर्थिक सशक्तिकरण होगा

  3. पात्र धारकों को 10 एकड़ तक मालिकाना हक मिलेगा

राज्य ब्यूरो, जम्मू। उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने एक एतिहासिक फैसला करते हुए लद्दाखियों को प्रदेश में साठ हजार एकड़ सरकारी बंजर भूमि के मालिकाना अधिकार देने का मार्ग प्रशस्त कर दिया है। उपराज्यपाल ने शुक्रवार को केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन ने लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद (नोतोर) सरकारी बंजर भूमि नियमितीकरण नियम, 2026 को मंजूरी दे दी है।

इस फैसले से दशकों से लंबित नोतोर भूमि के नियमितीकरण का रास्ता साफ होगा। पात्र भूमि धारकों को संपत्ति संबंधी अधिकार प्राप्त होंगे। दशकों से स्पष्ट कानूनी ढांचे के अभाव में नोतोर भूमि के प्रभावी उपयोग में बाधाएं आ रही थी।

लद्दाख में सरकार के स्वामित्व वाली करीब 60,000 एकड़ से अधिक बंजर व बेकार भूमि खेती के लिए लोगों को आवंटित की गई थी। लेकिन कानूनी व्यवस्था स्पष्ट न होने के कारण भूमि धारकों को इसका पूरा आर्थिक लाभ नहीं मिल पा रहा था।

इस संबंध में बनाए गए नए नियमों का उद्देश्य नोतोर भूमि के संबंध में पारदर्शिता, जवाबदेही व जमीनी स्तर पर लोगों का आर्थिक सशक्तीकरण सुनिश्चित करना है। नए नियमों के तहत पात्र नोतोर भूमि में से अधिकतम 10 एकड़ तक भूमि पर मालिकाना अधिकार दिए जाएंगे।

दस एकड़ से अधिक भूमि को सिर्फ लीजहोल्ड आधार पर ही आवंटित किया जा सकेगा। नियमित की गई भूमि को अब कानूनी रूप से बैंकों से कर्ज लिया जा सकेगा। इससे भूमि धारकों को कृषि एवं अन्य विकास कार्यों के लिए वित्तीय संसाधन जुटाने में मदद मिलेगी। नए नियमों के तहत नियमित नोतोर भूमि के भूमि उपयोग में परिवर्तन की अनुमति भी दी गई है।

प्रशासन ने 27 अक्टूबर 2020 से पहले कब्जे में रही नोतोर भूमि के लिए एक बार के नियमितीकरण का प्रावधान रखा है। अब सभी 7 जिलों में नोतोर भूमि के आवंटन का अधिकार संबंधित लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषदों के पास होगा।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नियमों की अंतिम अधिसूचना जारी करने से पहले इन्हें दो सप्ताह के लिए सार्वजनिक परामर्श हेतु रखा जाएगा। इस दौरान आम लोगों व संबंधित हितधारकों से सुझाव एवं आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी।

उपाराज्यपाल का कहना है कि यह व्यवस्था प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ईज ऑफ लिविंग के दृष्टिकोण और व्यापक नियामकीय सुधार एवं डीरेग्युलेशन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

इससे नोतोर भूमि धारकों को कानूनी निश्चितता मिलेगी व लंबे समय से उपयोग में रही इन जमीनों को वास्तविक आर्थिक परिसंपत्ति में बदलने का अवसर मिलेगा। यह निर्णय क्षेत्र में समान, समावेशी व जमीनी स्तर पर विकास को बढ़ावा देने तथा लोगों की समृद्धि सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।