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लद्दाख में शुरू हुई देश की पहली हाई-एल्टीट्यूड सफारी, स्नो लेपर्ड के दीदार का मौका; जानें कहां-कहां जाएगी

Published: Thu, 08 Oct 2026 11:59 AM (GMT+05:30)

केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में देश की पहली हाई-एल्टीट्यूड स्नो लेपर्ड वाइल्डलाइफ सफारी शुरू हो गई है, जिससे पर्यटक हिम ...और पढ़ें

लद्दाख में देश की पहली हाई-एल्टीट्यूड स्नो लेपर्ड वाइल्डलाइफ सफारी शुरू। (फाइल फोटो)

लद्दाख में देश की पहली हाई-एल्टीट्यूड स्नो लेपर्ड वाइल्डलाइफ सफारी शुरू। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. लद्दाख में देश की पहली हाई-एल्टीट्यूड स्नो लेपर्ड सफारी शुरू।

  2. हिम तेंदुओं, भूरे भालू और भेड़ियों को प्राकृतिक आवास में देखें।

  3. मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने को AI डिवाइस भी लॉन्च।

राज्य ब्यूरो, जम्मू। केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में हिम तेंदुओं के साथ हिमालयी भूरे भालू, भेड़ियों और अन्य वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास में देखने के इच्छुक पर्यटकों के लिए देश की पहली हाई-एल्टीट्यूड स्नो लेपर्ड वाइल्डलाइफ सफारी शुरू हो गई है।

लद्दाख 477 हिम तेंदुओं का घर है। देश में हिम तेंदुओं की संख्या 718 के करीब है। देश, विदेश के पर्यटक लद्दाख में हिम तेंदुओं को उनके प्राकृतिक आवास में देखने के लिए आते हैं। ऐसे में बुधवार को उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने लद्दाख में वन्यजीव पर्यटन व समुदाय आधारित संरक्षण को बढ़ावा देने की दिशा में पहल करते हुए वाइल्डलाइफ सफारी का लेह में शुभारंभ किया।

उन्होंने वन्यजीव सप्ताह 2026 के तहत लेह में लद्दाख स्नो लेपर्ड सफारी के लिए विशेष रूप से तैयार छह ओपन-बैक वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसे भारत की पहली हाई-एल्टीट्यूड वाइल्डलाइफ सफारी के रूप में पेश किया गया है।

वन्यजीवों से संघर्ष रोकने में मदद करेगी AI आधारित डिवाइस

उपराज्यपाल ने इस मौके पर लद्दाख में मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए पहले एआई आधारित ह्यूमन-वाइल्डलाइफ कान्फ्लिक्ट मिटिगेशन डिवाइस का भी उद्घाटन किया। इसका उद्देश्य मानव व वन्यजीवों के बीच बेहतर सह-अस्तित्व स्थापित करने तथा संघर्ष की घटनाओं को कम करने में मदद करना है। इससे वन्यजीव पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ स्थानीय समुदायों को संरक्षण प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार बनाया जाएगा।

वन्यजीवों पर दबाव कम करने की तैयारी

उपराज्यपाल ने कहा कि इस डिवाइस से अवैध आफ-रोडिंग व वन्यजीवों को परेशान करने जैसी गतिविधियों पर अंकुश लगने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि लद्दाख की नाजुक पारिस्थितिकी को देखते हुए इस माडल में स्थानीय लोगों को प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षक के रूप में शामिल करने की परिकल्पना की गई है। समुदाय की भागीदारी, जिम्मेदार पर्यटन और तकनीक के संयोजन से लद्दाख में पर्यावरण संरक्षण और इको-टूरिज्म का नया मॉडल विकसित करने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य केवल पर्यटन बढ़ाना नहीं, अपितु वन्यजीव पर्यटन को जिम्मेदार, नियंत्रित और संरक्षण के अनुकूल बनाना है। निर्धारित संख्या में पर्यटकों को अनुमति, स्वीकृत मार्गों का पालन व प्रशिक्षित स्थानीय कर्मियों की तैनाती से वन्यजीवों पर पड़ने वाले दबाव को कम किया जा सकेगा।

उपराज्यपाल ने कहा कि लद्दाख में पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं होनी चाहिए। स्थानीय समुदायों को भी इसका सक्रिय भागीदार बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वन्यजीव संरक्षण व स्थानीय लोगों की आजीविका के बीच संतुलन कायम करना जरूरी है। स्थानीय गाइड को स्नो लेपर्ड साइटिंग से आय व महिलाओं को संरक्षण आधारित हस्तशिल्प से लाभ होना चाहिए।

प्रमुख जगहों पर बनेंगे बर्ड-वाचिंग हाइड

उपराज्यपाल ने बताया कि 20 स्थानीय युवाओं को पक्षियों की पहचान, बर्डवाचिंग और स्पाटिंग का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्हें दूरबीन भी उपलब्ध कराई जाएगी व प्रमुख पक्षी-दर्शन स्थलों पर बर्ड-वाचिंग हाइड विकसित किए जाएंगे। इससे युवाओं के लिए वन्यजीव गाइड, बर्ड गाइड व नेचर इंटरप्रेटर के रूप में रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इस अवसर पर वाइल्ड एनिमल फेल्टिंग कार्यक्रम का भी उल्लेख किया गया।

इसमें तुरतुक, फोटोक्सार, सांग्रह, चुशुल व शरगोल की 50 महिलाएं शामिल हैं। इस पहल के माध्यम से पारंपरिक कौशल व स्थानीय ऊन को संरक्षण आधारित उद्यमों से जोड़ा जा रहा है। उपराज्यपाल ने कहा कि लद्दाख की पर्यावरणीय सुरक्षा के लिए प्राकृतिक संपदा को बचाना जरूरी है।

5 अगस्त को हुई भी सफारी शुरू करने की घोषणा

उपराज्यपाल प्रशासन ने 5 अगस्त को सफारी शुरू करने की गई घोषणा की थी। करीब दो महीने में इस घोषणा को पूरा किया गया है। शुरुआती चरण में सफारी का संचालन रुमबक, शांग व उले क्षेत्रों में किया जाएगा।

पर्यटकों को इस सफारी में प्रशिक्षित स्थानीय ड्राइवरों व वन्यजीव गाइडों के साथ दूरदराज के इलाकों में हिम तेंदुओं के अलावा हिमालयी भूरे भालू, भेड़ियों तथा विभिन्न वन्यजीवों को पास से देखने का मौका मिलेगा। 

340 से अधिक पक्षी प्रजातियाें का घर है लद्दाख

केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में वन्यजीवों व जैव विविधता की समृद्धता को देखते हुए सफारी शुरू करने की पहल विशेष महत्व रखती है। लद्दाख में 340 से अधिक पक्षी प्रजातियां व करीब 1,800 संवहनी पौधों की प्रजातियां पाई जाती हैं।

आने वाले समय में सफारी के लिए अतिरिक्त मार्गों की पहचान की जा रही है। इनमें हेमिस नेशनल पार्क, चांगथांग, काराकोरम वाइल्डलाइफ सेंक्चुरी, नुब्रा, जांस्कर, शाम, कारगिल व द्रास के क्षेत्र शामिल हैं।