लद्दाख में LAC पर परिंदा भी पर नहीं मार सकेगा, चुशुल में सेना-ITBP ने मिलाया हाथ; बर्फबारी में भी नहीं थमेगी गश्त
पूर्वी लद्दाख में भारत-चीन सीमा पर सुरक्षा बढ़ाने के लिए सेना और आईटीबीपी ने चुशुल सेक्टर में संयुक्त बैठक की ...और पढ़ें

लद्दाख एलएसी पर सेना-आईटीबीपी का साझा मोर्चा।
HighLights
पूर्वी लद्दाख में सेना-आईटीबीपी की संयुक्त बैठक।
चुशुल सेक्टर में सीमा प्रबंधन पर जोर दिया गया।
सर्दियों में गश्त, संचार, रसद पर सहमति बनी।
डिजिटल डेस्क, जम्मू। भारत-चीन सीमा से लगे पूर्वी लद्दाख में सुरक्षा व्यवस्था को और धार देने के लिए भारतीय सेना और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आइटीबीपी) ने संयुक्त बैठक की है। यह बैठक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण चुशुल सेक्टर में 20 अक्टूबर को आयोजित हुई।
सेना की फायर एंड फ्यूरी कोर ने बताया कि बैठक का मुख्य उद्देश्य सीमा प्रबंधन को मजबूत करना और आपसी सहयोग को बढ़ाना रहा।
चुशुल में सेना और ITBP का तालमेल क्यों जरूरी?
चुशुल सेक्टर पैंगोंग और स्पांगुर झील के करीब स्थित है। यहां वास्तविक नियंत्रण रेखा पर आइटीबीपी के जवान ऊंचाई वाली चौकियों पर तैनात रहते हैं। इन चौकियों का संचालन सेना के नियंत्रण में होता है। ऐसे में दोनों बलों के बीच बेहतर तालमेल अनिवार्य है।
कड़ाके की ठंड में भी नहीं थमेगी गश्त
बैठक में तय किया गया कि सर्दी के मौसम में गश्त, संचार और रसद व्यवस्था में कोई बाधा न आए। खुफिया जानकारी साझा करने, संयुक्त गश्त बढ़ाने और किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई पर भी सहमति बनी।
अधिकारियों ने बताया कि इस तरह की बैठकें आगे भी जारी रहेंगी। इससे न केवल सीमा पर निगरानी सुदृढ़ होगी, बल्कि जवानों का मनोबल भी बढ़ेगा। सेना और आइटीबीपी ने दोहराया कि वे कंधे से कंधा मिलाकर देश की सीमाओं की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।
(समाचार एजेंसी पीटीआई के माध्यम से)
