जम्मू में किश्तवाड़ बाईपास का 436.37 करोड़ रुपये का ठेका रद, दो साल तक निविदाओं में हिस्सा नहीं ले सकेंगी कंपनियां
राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (एनएचआईडीसीएल) ने किश्तवाड़ बाईपास परियोजना का 436.37 करोड़ रुपये का ठेका रद्द कर ...और पढ़ें

किश्तवाड़ बाईपास का 436 करोड़ रुपये का ठेका रद (फाइल फोटो)
HighLights
किश्तवाड़ बाईपास का 436.37 करोड़ का ठेका रद्द।
परियोजना में भारी देरी और लक्ष्य पूरे न होने पर कार्रवाई।
संबंधित कंपनियों पर दो साल का निविदा प्रतिबंध लगाया गया।
राज्य ब्यूरो, जम्मू। राष्ट्रीय राजमार्ग-244 के पैकेज-चार के तहत किश्तवाड़ बाईपास परियोजना में देरी और निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने में विफल रहने पर राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (एनएचआईडीसीएल) ने 436.37 करोड़ रुपये का ठेका समाप्त कर दिया है।
निगम ने मैसर्स एपीएस हाइड्रो प्राइवेट लिमिटेड और मैसर्स यूनिक कंस्ट्रक्शन के संयुक्त उद्यम के खिलाफ कार्रवाई करते हुए संबंधित कंपनियों और अनुबंध के दायरे में आने वाले पक्षों पर दो वर्ष का प्रतिबंध भी लगाया है। इस अवधि में वे निगम की निविदाओं में व्यक्तिगत रूप से या संयुक्त उद्यम के माध्यम से भाग नहीं ले सकेंगे।
एनएचआईडीसीएल के जम्मू भौगोलिक मंडल के उप महाप्रबंधक (तकनीकी) आशीष गुप्ता की ओर से जारी नोटिस में अनुबंध की धारा 23.1 के तहत ठेका समाप्त करने का उल्लेख है।
निगम के अनुसार, बार-बार चेतावनी देने और कार्य पूरा करने के लिए 861 दिन का अतिरिक्त समय देने के बावजूद ठेकेदार निर्धारित माइलस्टोन हासिल नहीं कर सका और संशोधित समय-सीमा में भी परियोजना अधूरी रही।
24 महीने में पूरा होना था काम, समय-सीमा बढ़ाने पर भी नतीजा नहीं
11 अगस्त 2021 को आवंटित इस ठेके के तहत राष्ट्रीय राजमार्ग-244 के खेलानी–किश्तवाड़–छात्रू खंड पर पक्के शोल्डर के साथ दो-लेन सड़क का निर्माण और उन्नयन किया जाना था।
इसमें दुलहस्ती के डिजाइन किलोमीटर 80.675 से भंडारकोट के किलोमीटर 95.550 तक लगभग 14.88 किलोमीटर राजमार्ग और किश्तवाड़ शहर को जोड़ने वाली 1.871 किलोमीटर संपर्क सड़क शामिल थी।
परियोजना को 24 महीने में पूरा करने के लिए 23 अगस्त 2023 की समय-सीमा तय की गई थी। देरी के बाद इसे बढ़ाकर 31 दिसंबर 2025 कर दिया गया, लेकिन काम पूरा नहीं हुआ। वर्ष 2026 तक के निगरानी आकलनों में परियोजना की भौतिक प्रगति लगभग 50.64 प्रतिशत दर्ज की गई।
एनएचआईडीसीएल के अनुसार, निर्माण कार्य की गति बनाए रखने के लिए आवश्यक श्रमिकों और संसाधनों की तैनाती नहीं की गई। संरचनात्मक और संबंधित कार्यों के लिए लगभग 250 कुशल श्रमिकों की जरूरत के मुकाबले करीब 141 कर्मचारी ही तैनात थे।
श्रमिकों के साथ निर्माण सामग्री, मशीनरी और तकनीकी संसाधनों की कमी से पुलों की नींव, अधोसंरचना और जल निकासी संबंधी कार्य भी प्रभावित हुए।
2025 और 2026 में कई बार समीक्षा की गई
निगम के अभियंताओं और विशेष परियोजना निगरानीकर्ताओं की निरीक्षण रिपोर्टों के अलावा वरिष्ठ अधिकारियों ने वर्ष 2025 और 2026 में कई बार परियोजना की समीक्षा की। इसके बावजूद अपेक्षित प्रगति नहीं हुई।
ठेका समाप्त होने के बाद परियोजना से जुड़े ठेकेदारों और सामग्री आपूर्तिकर्ताओं के लंबित भुगतानों को लेकर चिंता बढ़ गई है। कंपनी के कई कर्मचारियों का वेतन भी बकाया होने की खबर है।
बताया जा रहा है कि किश्तवाड़ स्थित कंपनी कार्यालय में अनिश्चितता का माहौल है और अधिकांश वरिष्ठ अधिकारी जिला छोड़ चुके हैं। ठेकेदारों, आपूर्तिकर्ताओं और कर्मचारियों को अपने बकाया भुगतान की स्थिति जानने के लिए प्रबंधन से संपर्क करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
