जम्मू, राज्य ब्यूरो। जनवरी 2018 में कठुआ मामले ने भाजपा-पीडीपी सरकार की बुनियाद हिला दी थी। पूरे डेढ़ साल के बाद सोमवार को पठानकोट की विशेष अदालत ने 7 में से 6 को दोषी करार दिया है।

राज्य के कठुआ जिले में खानाबदोश समुदाय की आठ साल की बच्ची के साथ सामूहिक दुष्कर्म और उसकी हत्या का मामला 17 जनवरी को बच्ची का शव बरामद होने के बाद सतह पर आया था। ठीक डेढ़ साल पहले 10 जनवरी को 8 साल की बच्ची को अगवा कर उसका दुष्कर्म किया गया था, फिर उसकी हत्या कर दी गई थी। कठुआ मामले ने देश को हिला कर रख दिया। बारह जनवरी को हीरानगर पुलिस स्टेशन में पीड़िता के पिता की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई। शिकायत दर्त करने के पांच दिन बाद बच्ची का शव बरामद हाेने के बाद पोस्टमार्टम में सामूहिक दुष्कर्म और हत्या की पुष्टि हुई थी।

जम्मू कश्मीर पुलिस की अपराध शाखा को सौंप दिया गया मामला

उस समय पीडीपी-भाजपा सरकार की मुख्यमंत्री व गृह विभाग का प्रभार संभालने वाली महबूबा मुफ्ती ने 22 जनवरी को यह मामला जम्मू कश्मीर पुलिस की अपराध शाखा को सौंप दिया गया। इस मामले के तूल पकड़े जाने के बाद 17 जनवरी 2018 को 'हिंदू एकता मंच' संगठन ने मामले में सीबीआई जांच करवाने की मांग पर आंदोलन शुरू कर दिया। कठुआ में वकीलों ने भी इसके समर्थन में रैली निकाली। इसमें भाजपा के स्थानीय विधायक राजीव जसरोटिया व अन्य कुछ नेता भी शामिल थे। कठुआ मामले के बाद राज्य में भाजपा-पीडीपी सरकार के हित टकरा गए व यह मामला सतह पर आने के ठीक छह महीने के बाद 19 जून 2018 को भाजपा-पीडीपी की सरकार गिर गई।

कठुआ की अदालत में आरोपपत्र किए गए दाखिल

इससे पहले पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 10 फरवरी 2018 को पुलिस के स्पेशल पुलिस आफिसर दीपक खजुरिया को गिरफ़्तार कर लिया था। इसके बाद पुलिस द्वारा इस मामले में मास्टर माइंड करार दिए गए सांझी राम ने 5 अप्रैल 2018 को पुलिस के आगे आत्मसमर्पण कर दिया था। इसके बाद 9 अप्रैल, 2018 को पुलिस ने आठ आरोपियों में से सात के खिलाफ कठुआ की अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया। अगले दिन आठवें अभियुक्त के खिलाफ चार्जशीट दायर की गई जिसके किशोर होने का दावा किया गया।

भाजपा के दो मंत्रियों चौधरी लाल सिंह और चंद्र प्रकाश गंगा से इस्तीफा लिया गया

कठुआ मामले में सियासत के चलते भाजपा ने अपने 13 अप्रैल 2018 को अपने मंत्रियों चौधरी लाल सिंह और चंद्र प्रकाश गंगा से इस्तीफ़ा ले लिया था। वहीं पुलिस ने 14 अप्रैल, 2018 को अपराध शाखा के अधिकारियों को अदालत में चार्जशीट दाखिल करने से रोकने के लिए वकीलों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की। इसके बाद 16 अप्रैल, 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू और कश्मीर सरकार से इस बात का जवाब मांगा कि पीड़िता के परिवारवालों ने मामले के ट्रायल को राज्य से बाहर कराए जाने की मांग की है। वहीं 18 अप्रैल 2018 को पहली सुनवाई में क्राइम ब्रांच से कहा गया कि सभी आरोपियों को आरोप-पत्र की कॉपी दी जाए। इसके बाद 7 मई, 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने मामले को पंजाब के कठुआ से पठानकोट में शिफ्ट किया।

इस मामले की सुनवाई 3 जून को पूरी हुई व 10 जून, 2019 को सामूहिक दुष्कर्म और उसकी हत्या के मामले में विशेष अदालत ने सात में से छह आरोपियों को दोषी करार दिया। 

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Posted By: Rahul Sharma

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