कटड़ा, राकेश शर्मा। नये कश्मीर की नाहिदा अपने दावपेंचों से अखाड़े में डंका बजा रही है। आतंकग्रस्त जिले बारामुला के सोपोर की बेटी नाहिदा नबी कश्मीर की पहली महिला पहलवान है। वह घाटी में कभी भी चरमपंथियों और राष्ट्रविरोधियों के फरमानों के आगे झुकी नहीं। बल्कि उसने कश्मीर में 'बेटी को पहलवान बनाओ का नारा' दे दिया है। फिलहाल नाहिदा का सपना कश्मीर में दंगल अकादमी खोलकर बेटियों को खेलों में आगे लाना है।

ताकि वादी की लड़कियां अपने सपनों को करें पूरा 

नाहिदा ने बातचीत में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाई का नारा दिया है, लेकिन मैं कश्मीर में 'बेटी को पहलवान बनाओ का नारा देती हूं ताकि वादी की लड़कियां अपने सपनों को पूरा कर सकें। दरअसल, आतंकवाद व अलगाववाद के कारण कश्मीर में लड़कियां खुलकर किसी भी क्षेत्र में आगे आने से कतराती हैं। राज्य के बदले हालात को लेकर नाहिदा ने कहा कि कश्मीर का युवा उत्साहित है कि आने वाले समय में खुली हवा में उनके सपनों को पंख लगेंगे। मेरा सपना कश्मीर में दंगल के लिए अकादमी खोलना है। ताकि कश्मीर की लड़कियां इस खेल में राज्य के साथ देश का नाम रोशन कर सकें। उसने जेएंडके इंडियन स्टाइल रेसलिंग एसोसिएशन के प्रधान शिवकुमार शर्मा ने भी मार्गदर्शन किया।

खेलों का कोई धर्म नहीं होता

नाहिदा ने कश्मीर की लड़कियों से निडरता के साथ लक्ष्य को साधने व खेलों में हिस्सा लेकर नाम रोशन करने की अपील की। उसका कहना है कि खेलों का कोई धर्म नहीं होता है।

जम्मू विवि में सीखे दावपेंच

जम्मू विश्वविद्यालय रहते हुए दंगल के दांव-पेच सीखे। पिता गुलाम नबी तथा भाई जावेद का सहयोग हर पल मिला। कोच निशा, अनिल, कुलदीप, शाम , अंकुश का विशेष योगदान रहा है।

स्पीड पोस्ट से न्योता मिलने पर महादंगल में लिया भाग

माता वैष्णो देवी के आधार शिविर कटड़ा में जारी नवरात्र महोत्सव में हाल ही में हुए मिशन दोस्ती महादंगल में कश्मीर की एक मात्र महिला पहलवान नाहिदा नबी ने शिरकत की। रोमांचक मुकाबले में दिल्ली की पहलवान संगीता ने नाहिदा को मात दी। महादंगल में भाग लेने के लिए कोच निशा शर्मा का विशेष योगदान है। कश्मीर में संचार सेवाएं ठप हैं। ऐसे में कोच निशा ने मुङो स्पीड पोस्ट से पत्र भेज इस आयोजन के बारे में सूचित किया जिसके बाद वह तुरंत जम्मू रवाना हो गई।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नेतृत्व करना है सपना

सोपोर की नाहिदा नबी ने बताया कि वह बचपन से खेलों के प्रति खासी रुचि रही हं। हॉकी के साथ कबड्डी और खो-खो जैसे अन्य खेलों में भाग ले चुकी हैं। रेसलिंग को लेकर उसका विशेष रुझान रहा है। वह चार साल से दंगल खेल से जुड़ी हैं। उसका सपना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नेतृत्व करना है। उसने कहा कि कश्मीर के हालात के मद्देनजर उन्हें किसी भी कोच से प्रशिक्षण नहीं मिला। उसने पहली राष्ट्रीय दंगल प्रतियोगिता वर्ष 2018 में उत्तर प्रदेश के गोंडा में खेली। हालांकि, उसका प्रदर्शन ठीक नहीं रहा, लेकिन वह न तो थकी है और न ही झुकी है वह पूरी तरह से रेसलिंग को लेकर समर्पित है। 

Posted By: Rahul Sharma

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