मोदी सरकार - 2.0 के 100 दिन

श्रीनगर, नवीन नवाज। कश्मीर में बदलाव की बयार के बीच अब अलगाववादियों की धमकियों और फतवों के खिलाफ भी लोग खुलकर सामने आ रहे हैं। कल तक उनके इशारे पर सड़कों पर भीड़ उमड़ पड़ती थी अब उनके फरमानों पर आम कश्‍मीरी कान ही नहीं दे रहे हैं। अब न कोई उनके हड़ताली कैलेंडर पर ध्यान दे रहा है और न जिक्र करना पसंद करता है। जिसे पूछो वही कहता है, अब दिल्ली को इनकी दुकान पर बड़ा ताला लगा चाबी झेलम में फेंक देनी चाहिए, तभी वादी में हमेशा के लिए अमन बहाल हो पाएगा।

अनुच्‍छेद 370 हटाए जाने के बाद पिछले एक पखवाड़े में पूरी वादी में माहौल तेजी से बदला है। पाबंदियों में जैसे-जैसे ढिलाई दी जा रही है, वादी में सामान्य जनजीवन भी पटरी पर लौट रहा है। ऐसे में अपनी दुकान पर ताला लगते देख हताश अलगाववादी व उनके समर्थक फिर जहर फैलाने की साजिश रच रहे हैं।

वह विभिन्न माध्यमों से लोगों को उकसाकर, राष्ट्रीय विरोधी प्रदर्शनों का दौर शुरू करने के लिए हर तरीका इस्तेमाल करने से नहीं चूक रहे हैं। पोस्‍टर के माध्‍यम से धमकियां दी जा रही है और अराजक तत्‍वों के सहारे खुली दुकानों और वाहनों पर पथराव कराने की साजिश रची जा रही है, लेकिन आम कश्‍मीरी अब उनके फरमान को मानने से इनकार कर रहे हैं। वहीं, कुछ लोग स्‍वयं सामने आकर सुरक्षाबलों से अराजक तत्‍वों की शिकायत भी कर रहे हैं।

श्रीनगर के सौरा इलाके में बुधवार को हुर्रियत समेत कई अलगाववादी संगठनों के साझा संगठन जेआरएल (ज्वाइंट रजिस्टेंस लीडरशिप) ने कुछ पोस्‍टर चिपकाकर कर माहौल बिगाड़ने का प्रयास किया। कंप्‍यूटर से निकाले गए इन पोस्‍टरों में भड़काऊ भाषा का इस्‍तेमाल किया गया था और मार्च निकालने का आह्वान किया था।

इससे पूर्व आठ अगस्त को राजबाग इलाके में जेआरएल व एक अन्य संगठन द्वारा हड़ताली कैलेंडर के पोस्टर चिपकाकर प्रदर्शनों के लिए उकसाया गया। ईद से दो दिन पहले भी डाउन-टाउन और बटमालू में कुछ आपत्तिजनक पोस्टर मिले। पर लोगों ने उनकी तमाम साजिशों की हवा निकाल दी और कोई भी प्रदर्शन करने नहीं पहुंचा। अलबत्ता, कुछ स्थानीय लोग ऐसी साजिशों के बारे में उसी समय पुलिस व सुरक्षाबलों को सूचित कर रहे हैं।

राजबाग में तैनात एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि कुछ दिन पहले कुछ स्थानीय लोग ही पोस्टर लेकर हमारे पास पहुंचे। साथ ही, ऐसे तत्‍वों से बचाने की गुहार की। हालत यह है कि न किसी ने हड़ताल के उकसावे पर अमल किया और बाजार भी खुले रहे। उन्‍होंने कहा कि यह मेरे लिए बहुत हैरानी की बात थी। पहले इस तरह के पोस्टर तक हटाने में हमें खासी मशक्‍कत करनी पड़ती थी।

सौरा में इश्तियाक अहमद नामक एक बुजुर्ग ने कहा कि इन पोस्टरों और इन्हें जारी करने वालों ने ही तो हमें तबाह किया है। यहां किसी ने आपके साथ कोई इनका जिक्र किया है, नहीं। यह सिर्फ मीडिया वाले ही इन्‍हें उछालते हैं और इन पोस्टरों पर अमल के लिए लोगों में भय पैदा कर देते हैं। इनका जिक्र न करो तो ही बेहतर है। अगर लोग इनके साथ होते तो आपको पूरे शहर में इस समय जुलूस नजर आते। कोई बड़ा प्रदर्शन देखा क्‍या आपने।

बटमालू स्थित सब्जीमंडी में अपनी दुकान का शटर उठा रहे यूसुफ से जब पूछा गया कि हुर्रियत और जेआरएल की दुकान अब बंद हो रही है, उसे खुलने का मौका मत दो मेरे भाई। नहीं तो मेरी दुकान का शटर कब उठेगा, यह कोई नहीं बता पाएगा। यहां सभी लोग रोज-रोज के बंद और हड़ताल से तंग आ चुके थे। सभी ने शुक्र मनाया कि अब हमें इससे आजादी मिलेगी और आप हमें फिर हड़ताल की बात सुना रहे हो। लगता है आपको भी यहां अमन से बदहजमी हो जाती है।

कश्मीर मामलों के जानकार एजाज अहमद ने कहा कि बदले हालात में कश्मीर में बहुत कुछ बदल चुका है। अभी आपको इसका असर शायद कम नजर आए, लेकिन चार से छह माह बाद आप खुद यहां जमीन पर बदलाव को प्रत्यक्ष रुप से महसूस करेंगे। यह कोई छोटी बात नहीं कि शरारती तत्वों के हंगामें के बावजूद कई दुकानदारों ने अपनी दुकानें खुली रखी हैं। सड़कों पर वाहन भी चल रहे हैं। अब यहां अलगाववादियों के फरमान को कोई गंभीरता से नहीं ले रहा है।  

जम्मू-कश्मीर की अन्य खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

पढ़ेंः जम्मू-कश्मीर: बंद हो सकती है 143 साल पुरानी दरबार मूव की परंपरा, बचेंगे छह सौ करोड़

 

Posted By: Preeti jha

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप