श्रीनगर, राज्य ब्यूरो। कश्मीर घाटी में बंद पड़े मंदिरों के कपाट खोलने और क्षतिग्रस्त मंदिरों के जीर्णोद्धार की घोषणा का ऑल पार्टी माइग्रेंट कोआॢडनेशन कमेटी (एपीएमसीसी) ने स्वागत किया है। कमेटी ने घाटी में मंदिर संरक्षण बिल लाने और मंदिरों की जमीन-जायदाद पर अतिक्रमण की सीबीआइ जांच कराने की मांग की है।

केंद्रीय गृह राज्यमंत्री जी किशन रेड्डी ने गत सोमवार को कश्मीर घाटी में क्षतिग्रस्त मंदिरों के जीर्णोद्धार करने और बंद पड़े मंदिरों को खोलने के लिए सर्वे कराने का एलान किया था। गौरतलब है कि एपीएमसीसी कश्मीरी पंडितों का संगठन है, जिसने वादी में आतंकियों और जिहादी तत्वों द्वारा क्षतिग्रस्त मंदिरों के जीर्णोद्धार की प्रक्रिया शुरू कर रखी है। इस संगठन के प्रयास से ही घाटी में तमाम अवरोधों के बावजूद करीब दो दर्जन पौराणिक मंदिरों में पूजा की घंटियां गूंज रही हैं।

एपीएमसीसी के चेयरमैन विनोद पंडित ने बताया कि हम वादी में मंदिरों के संरक्षण के लिए केंद्र सरकार को हर संभव मदद देंगे। केंद्र सरकार को चाहिए कि वह मंदिरों के सर्वे के लिए जो समिति बनाए, उसमें जमीनी स्तर पर काम करने वाले कश्मीरी पंडित समुदाय के लोगों को जरूर शामिल करे। हमारा संगठन बीते दो दशक से मंदिर संरक्षण बिल लाने की मांग कर रहा है। हमने बीते साल इस बिल का एक प्रारूप भी जारी किया था।

मंदिरों को धर्मस्थल के रूप में ही बहाल करें : भारती

एपीएमसीसी के प्रवक्ता किंग सी भारती ने कहा कि केंद्रीय गृह राज्यमंत्री की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हमें कश्मीर में मंदिरों के संरक्षण के लिए भरोसा दिलाने की पुष्टि करता है। केंद्र सरकार मंदिरों को सिर्फ पर्यटन स्थल के तौर पर न खोले बल्कि धर्मस्थल के रूप में ही बहाल करे। प्रत्येक मंदिर में सनातन परंपराओं के मुताबिक पूजा अर्चना हो। इस प्रक्रिया की शुरुआत मार्तण्ड मंदिर खेरीबल अनंतनाग, अवंतीपोरा मंदिर और गांदरबल के नारानाग स्थित शिव मंदिर का खोया गौरव बहाल कर की जानी चाहिए।

 

मंदिरों का पुनर्निर्माण हो और अतिक्रमण को हटाया जाए : कांदरु

एडवोकेट अरुण कांदरु ने कहा कि केंद्र सरकार पहले वादी में क्षतिग्रस्त मंदिरों का पुनर्निर्माण करे फिर मंदिरों पर अतिक्रमण को हटाए। बारामुला स्थित सात फुट ऊंचा शिवलिंग हमारी समृद्ध सनातन संस्कृति का प्रतीक है। केंद्र सरकार इस शिवङ्क्षलग को फिर से स्थापित कर इसका गौरव बहाल करे। भारती ने कहा कि विनोद पंडित ने वादी में मंदिरों के संरक्षण के लिए 2011 में जम्मू में 10 दिन और वर्ष 2013 में पोरबंदर, गुजरात में 15 दिन का अनशन किया था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जो उस समय गुजरात के मुख्यमंत्री थे, ने कश्मीरी पंडितों के मुद्दों को हल करने का यकीन दिलाया था।

मंदिरों, झीलों, पहाड़ियों व श्मशान घाटों की जमीन जल्द मुक्त हो

भारती ने कहा कि बीते दो दशक में भूमाफिया ने सत्तासीन लोगों से मिलीभगत कर मंदिरों की जमीन जायदाद पर कब्जा कर लिया है। केंद्र सरकार मंदिरों, पवित्र झीलों, पहाड़ियों और श्मशान घाटों की जमीन को जल्द मुक्त कराए। मंदिरों पर हुए हमलों और मंदिरों की संपत्ति पर कब्जे की सीबीआइ जांच करवा कर दोषियों को दंडित किया जाए।

Posted By: Rahul Sharma

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