श्रीनगर, राज्य ब्यूरो। कश्मीरी पंडितों के वैश्विक संगठन ग्लोबल कश्मीरी पंडित डायसपोरा (जीकेपीडी) ने कश्मीर घाटी से अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के विस्थापन की 30वीं बरसी पर उनके जातीय नरसंहार को संयुक्त राष्ट्र समेत सभी महत्वपूर्ण वैश्विक मंचों पर उठाने का फैसला किया है। बरसी 19 जनवरी 2020 को होगी।

जीकेपीडी के अध्यक्ष केएल चौधरी ने कहा कि 30 साल बीतने जा रहे हैं, लेकिन कश्मीरी पंडितों की कोई सुध लेने को तैयार नहीं है। न्याय नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा कि जनवरी 1990 में कश्मीरियों को वादी से भगाया गया। विस्थापन के कारण तनाव में दम तोड़ने वाले कश्मीरी पंडितों, महिलाओं में पैदा हुई स्वास्थ्य संबधी दिक्कतों, घटती आबादी, युवाओं में कश्मीरी जुबान और संस्कृति को लेकर घटती रुचि समेत कई मुददों पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की है। संयुक्त राष्ट्र, मानवाधिकारवादी संगठनों व अन्य संस्थाओं के समक्षं यह रिपोर्ट एक दस्तावेजी सबूत होगी।

उन्होंने कहा कि कश्मीरी पंडितों पर हुए इस अत्याचार पर राज्य के साथ केंद्र सरकार भी खामोश है। जीकेपीडी की पोलिटिकल स्टीयि‍रिंग कमेटी के चेयरमैन मोती लाल कौल ने कहा कि शर्म की बात है कि भाजपा के अलावा किसी अन्य राष्ट्रीय या क्षेत्रीय दल ने कश्मीरी पंडितों की घर वापसी का मुद्दा अपने चुनावी घोषणा पत्र में शामिल नहीं किया है।

प्रो. केएन पंडिता ने कहा कि इससे बड़ी त्रासदी और विडंबना क्या होगी कि सात लाख लोगों को कश्मीर से खदेड़ दिया जाता है और कोई भी राज्य या केंद्र सरकार इसकी जांच के लिए कोई आयोग नहीं बैठाती। 

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