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'कश्मीरी हिंदुओं को अलग पहचान दी जाए...', जनगणना अधिकारी बोले, नरसंहार पीड़ित का दर्जा देने की उठी मांग

Published: Fri, 15 May 2026 03:11 PM (IST)

जनगणना 2027 में विस्थापित कश्मीरी हिंदुओं को आंतरिक रूप से विस्थापित नरसंहार पीड़ित के रूप में मान्यता देने की मांग की गई है।

जनगणना 2027 में कश्मीरी हिंदुओं को अलग पहचान देने की मांग।

जनगणना 2027 में कश्मीरी हिंदुओं को अलग पहचान देने की मांग।

HighLights

  1. जनगणना 2027 में नरसंहार पीड़ित के रूप में पहचान की मांग

  2. विस्थापन लक्षित हिंसा, भय के कारण, स्वैच्छिक नहीं था

  3. मूल निवास स्थान कश्मीर घाटी को भी दर्ज करने की अपील

जागरण संवाददाता, जम्मू। पनुन कश्मीर के एक प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को जनगणना 2027 के संदर्भ में मुख्य जनगणना अधिकारी अमित शर्मा को ज्ञापन सौंप कर विस्थापित कश्मीरी हिंदुओं को आंतरिक रूप से विस्थापित नरसंहार पीड़ित एवं जीवित बचे के रूप में मान्यता देने की मांग की।

डॉ. अग्निशेखर ने स्पष्ट किया कि कश्मीरी हिंदुओं का विस्थापन स्वैच्छिक नहीं था, बल्कि यह लक्षित हिंसा, भय और राज्य की सुरक्षा व्यवस्था के विफल होने के कारण हुआ। इसलिए उन्हें सामान्य माइग्रेंट के रूप में वर्गीकृत करना वास्तविकता को गलत ढंग से प्रस्तुत करना होगा।

ज्ञापन में मांग की गई कि जनगणना में विस्थापित कश्मीरी हिंदुओं की अलग से पहचान और गणना की जाए व उनके मूल निवास स्थान, कश्मीर घाटी को भी रिकार्ड में दर्ज किया जाए, ताकि उनकी सांस्कृतिक और भौगोलिक पहचान बनी रहे।

साथ ही विस्थापन की अवधि, कारण और पीढ़ीगत प्रभावों को भी शामिल करने की बात कही गई। पनुन कश्मीर ने जोर देकर कहा कि तीन दशकों से अधिक समय से जारी यह विस्थापन सामान्य प्रवासन नहीं है और इसे उसी गंभीरता से दर्ज किया जाना चाहिए। संगठन ने संयुक्त राष्ट्र के नरसंहार रोकथाम संबंधी कन्वेंशन का हवाला देते हुए सरकार से इस दिशा में ठोस कानूनी और नीतिगत कदम उठाने की मांग की।

प्रतिनिधिमंडल ने उम्मीद जताई कि जनगणना 2027 में इस मुद्दे को संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ लिया जाएगा, ताकि विस्थापित कश्मीरी हिंदु समुदाय की वास्तविक स्थिति को सही रूप में दर्ज किया जा सके।