कश्मीरी हिंदू युवा पढ़-लिखकर भी बेरोजगार! सरकार से मांगी 20000 नौकरियां, बोले- रोजगार नहीं तो घाटी से जुड़ाव कैसे?
कश्मीरी हिंदू संगठनों ने सरकार से युवाओं के लिए नए रोजगार पैकेज की मांग की है, क्योंकि 2010 के बाद ...और पढ़ें
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कश्मीरी हिंदू युवाओं को रोजगार की दरकार, सरकार से मांगा पैकेज।
HighLights
कश्मीरी हिंदू युवाओं के लिए नए रोजगार पैकेज की मांग।
2010 के बाद से कोई नया पैकेज नहीं मिला।
संगठन 15-20 हजार नौकरियों के लिए आंदोलन को तैयार।
जागरण संवाददाता, जम्मू : कश्मीरी हिंदुओं ने सरकार से युवाओं के लिए रोजगार पैकेज की मांग की है। कश्मीरी हिंदुओं के विभिन्न संगठनों का कहना है कि सरकार ने 2010 में पीएम रोजगार पैकेज कश्मीरी हिंदू युवाओं को दिया था, जिसके तहत 6000 नौकरियां दी गई थीं। मगर इस पैकेज के बाद सरकार ने कोई रोजगार का पैकेज नहीं दिया, जिससे कश्मीरी हिंदू युवा बेरोजगारी का सामना कर रहे हैं।
कुछ समय पहले जम्मू आई केंद्र सरकार की समिति के समक्ष भी इस मांग को बढ़-चढ़कर उठाया था। रोजगार के मसले को लेकर यूथ आल इंडिया कश्मीरी समाज ने कई बार धरने-प्रदर्शन किए। अब संगठन युवाओं के रोजगार के मुद्दे को लेकर आंदोलन करने की तैयारी कर रहे हैं। पनुन कश्मीर चार सितंबर को धरना-प्रदर्शन करेगा।
कश्मीरी हिंदू युवा पढ़कर भी बेरोजगार
चेयरमैन टीटू गंजू का कहना है कि पिछले 10-15 वर्षों से कश्मीरी हिंदू युवा पढ़कर भी बेरोजगार हैं। केंद्र सरकार ने 6000 नौकरियों का एक पैकेज तो दिया मगर उसके बाद चुप हो गई। अब 20 हजार नौकरियों का पैकेज मिलना चाहिए, ताकि कश्मीरी हिंदुओं के बच्चे सेटल हो सकें। यह युवा पढ़-लिखकर भी आज अपने पैरों पर खड़ा नहीं हो पा रहे हैं।
रोजगार के मुद्दे को कश्मीरी हिंदू संगठनों ने बहुत गंभीरता से लिया है और आने वाले दिनों में इसको लेकर संघर्ष और तेज होने वाला है।
युवा नौकरियों के लिए दर-बदर हो रहे
यूथ आल इंडिया कश्मीरी समाज उप प्रधान संजय गंजू का कहना है कि 1990 में जब कश्मीर में आतंकवाद के कारण बहुत खराब हालत थीं, तो हमारे घर वालों को मजबूरी में वहां से निकलना पड़ा। जम्मू आकर यह लोग विस्थापित कालोनियों में चले गए या कहीं किराए पर रहने लग पड़े।
कठिन हालातों से गुजरकर बच्चों को पढ़ाया-लिखाया। मगर आज यह युवा नौकरियों के लिए दर-बदर हो रहे हैं। इसलिए एक और रोजगार पैकेज दिए जाने की जरूरत है।
यह कश्मीर से जुड़ने की एक राह
पनुन कश्मीर वरिष्ठ सदस्य एमके धर का कहना है कि विस्थापित कश्मीरी हिंदुओं की आर्थिक तौर पर हालात तभी सुधरेगी जब इनके बच्चों का भविष्य उज्जवल हो। यह युवा कश्मीर से भी जुड़े रहनी चाहिए। इसलिए जैसे रोजगार का पैकेज पहले निकला था, ऐसा ही पैकेज एक और चाहिए। इसमें 15 से 20 हजार नौकरियां हों। इसी से कश्मीरी हिंदू युवाओं को कश्मीर से जुड़ने की एक राह भी मिलेगी।
सरकार का काम है रोजगार देना
वहीं बरनाई के चांद गंजू का कहना है कि पिछले 36 वर्ष से कश्मीरी हिंदू की घाटी वापसी नहीं हो पाई है। विस्थापित शिवरों में रहकर ही कश्मीरी हिंदुओं की जिंदगी गुजर रही है। फिर भी कश्मीरी हिंदुओं ने अपने बच्चों को पढ़ाया। अब सरकार का काम है कि उनको रोजगार दे। आज कश्मीरी हिंदू युवा पढ़-लिखकर रोजगार के लिए भाग-दौड़ कर रहा है। न ही प्रदेश में और न ही दूसरे राज्यों में इन युवाओं को नौकरियां मिल पा रही हैं। ऐसे में इन युवाओं को सरकार से काफी उम्मीदें हैं।
